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सिंगरौली - सांसद रीती पाठक को भाजपा द्वारा फिर से टिकट दिए जाने का भाजपा जिला अध्यक्ष कांति देव सिंह ने किया विरोध, भाजपा जिला अध्यक्ष पद से दिया इस्तीफा, पार्टी पर लगाया सिंगरौली जिले के भाजपा कार्यकर्ताओं की उपेक्षा का आरोप, टिकट में बदलाव की हो रही थी मांग।



अजीत नारायण सिंह

वाराणसी आज वाराणसी में सिगरा थाना अंतर्गत सोनिया चौकी प्रभारी महेश सिंह को पुलिस चौकी पर घुस के रूप में पांच हज़ार रुपया लेते हुए भ्रष्टाचार निवारण संगठन (एंटी करप्शन टीम) ने रंगे हाथो गिरफ्तार कर लिया।
दरोगा महेश सिंह अभी हाल मे ही सिगरा थाना अंतर्गत सोनिया पुलिस चौकी का पद-भार ग्रहण किया था एंटी करप्शन टीम को एक शिकायत मिला था कि एक विवेचना के सम्बन्ध में वादी से मुकदमे में से नाम निकालने के लिए रिश्वत मांगा जा रहा है। एंटी करप्शन टीम अपनी रणनीति के तहत आज घूसखोरी के आरोप में दरोगा महेश सिंह को सोनिया पुलिस चौकी मे रंगेहाथो घुस लेते गिरफ्तार कर लिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार इस सम्बन्ध में वाराणसी भ्रष्टाचार निवारण संगठन इकाई के प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि सिगरा थानाक्षेत्र में कोरियर कंपनी चलाने वाले राज कुमार गुप्ता ने गबन के सिलसिले से एक मुकदमा अपराध संख्या 652/2018 अंतर्गत धारा 419, 420, 467, 468,120(8)1 504, 506 सिगरा थाने में पंजीकृत करवाया था।
इस मुकदमे की विवेचना सोनिया चौकी इंचार्ज महेश सिंह कर रहे थे। मुकदमे की विवेचना कर कार्रवाई आगे बढ़ाने के लिए महेश सिंह, राज कुमार गुप्ता से पांच हज़ार रूपये की मांग कर रहे थे। इस बात से परेशान राज कुमार गुप्ता ने 22 मार्च को भ्रष्टाचार निवारण संगठन कार्यालय पर आकर इस बाबत एक लिखित शिकायती पत्र देकर कार्रवाई की मांग किया था। इस पर गोपनीय तरीके से बात का पता कराने पर बात सच साबित हुई। इस पर भ्रष्टाचार निवारण संगठन के उच्चाधिकारियों को मामले की जानकारी देते हुए ट्रैप टीम और ट्रैप का अनुमोदन मिलते ही सोनिया चौकी पर भ्रष्टाचार निवारण संगठन की टीम मे निरीक्षक विनोद कुमार यादव के नेतृत्व में भेजी गई जिसमे दो अन्य निरीक्षक संतोष कुमार दीक्षित और अशोक कुमार सिंह, मुख्य आरक्षी नरेंद्र कुमार सिंह, विजय नारायण प्रधान और आरक्षी सुनील कुमार यादव मौजूद रहे। इन लोगों ने सोनिया चौकी पर पहुंचकर ट्रैप के अनुसार महेश सिंह को पैसे लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
पकडे गए चौकी इंचार्ज ने अपने बचाव में कहा कि वह पैसे उसने होली की मिठाई के नाम पर लिए थे। इस सवाल पर भ्रष्टाचार निवारण संगठन इकाई के प्रभारी निरीक्षक राम सागर ने कहा कि चाहे मिठाई मांगी जाएं या ली जाएं या पैसे लिए जाएं ये सभी रिश्वत है और चौकी इंचार्ज ने पैसे केस के सम्बन्ध में लिए है यह साबित है इसलिए उनके विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है


ब्दुल रशीद 
जैसे जैसे आम चुनाव करीब आ रहा है,नोटबंदी, जीएसटी,आतंकवाद और बेरोजगारी का मुद्दा प्रचार से ग़ायब होता जा रहा है. पुराने जुमले चायवाला को ढकने के लिए नया जुमला चौकीदार गढ़ दिया गया है। प्रधानमंत्री और भाजपा के नेताओं ने ही अपने नाम से पहले चौकीदार लगाया है बल्कि अब बाकायदा सोशल मिडिया पर #MainBhiChowkidar कैम्पेन चलाया जा रहा है।अब जरा ऐसे जुमलों और कैम्पेन के उद्देश्य पर गौर कीजिए,सब साफ़ हो जाएगा के नेताओं के नजर में देश का विकास और सत्ता में कौन सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।

विडंबना देखिए पांच साल सरकार चलाने के बाद सत्ता पक्ष अपने 5 साल के काम को मुद्दा बनाने की जगह चौकीदार को मुद्दा बना रही है। तीन हजार से चार हजार रूपये महीना पाने वाला चौकीदार की मूलभूत सुविधाओं की जद्दोजहद को झांकने तक की जिन्हें फुर्सत नहीं,वे भी सोशल मिडिया पर नाम के चौकीदार बनने की होड़ में दौड़ लगा रहें हैं।

न्यूनतम मजदूरी को तरसता चौकीदार

अंग्रेजों के जमाने में चौकीदार वजूद में आया,रात में पहरा देने की जिम्मेदारी निभाने के साथ गांव में होने वाली आपराधिक घटनाओं की सूचना पुलिस को देना था। अंग्रेजो के समय में यह आजादी की लड़ाई की सूचना भी देते थे। चौकीदार को एक तरह से अंग्रेजो का मुखबिर माना जाता था। आजादी के बाद चौकीदार पुलिस के मुखबिर तंत्र का हिस्सा बन गया लेकिन इनकी हालत जस के तस रही।

बीते साल इनका मानदेय तो बढ़ाया गया लेकिन बढ़ा मानदेय भी न्यूनतम मजदूरी से कम है। बढ़ती मंहगाई में 2500 मानदेय पाने वाले की जिंदगी बदहाल है,अपनी बदहाली से मुक्ति के लिए सालों से संघर्षरत इन चौकीदारों की चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी की तरह से वेतन और सुविधाएं देनें की मांग मानना तो दूर उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं।

बगैर शैक्षणिक योग्यता के चौकीदारी पद पर नियुक्ति आसान नहीं

बगैर शैक्षणिक योग्यता के इस पद पर आवेदन कलेक्टर कार्यालय में होता है। लेकिन इस पद पर आवेदन पत्र मंगाए जाने की कोई समय सीमा तय नहीं होता। चौकीदार बनने के लिए आवेदन करने वालों के नामों को पुलिस थाने को दिया जाता है,आवेदनकर्ता का चरित्र सही पाये जाने पर पुलिस अधीक्षक की रिपोर्ट पर नौकरी पर रखा जाता है,जिसकी सूची कलेक्टर कार्यालय द्वारा जारी किया जाता है।लेकिन आवेदन पत्र मंगाए जाने का अता-पता लग जाए यह बीरबल के खिचड़ी पकने से कम नहीं।

देश में चौकीदार की हालत का अंदाज़ा इस बात से लगा सकते हैं की,उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 8 सौ गांव में केवल 4 सौ चौकीदार है,यानी आधे पद खाली हैं।एक चौकीदार पर दो गांवों की सुरक्षा की जिम्मेदारी है।
2014 लोक सभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने खुद को ‘चायवाला’ कहा था। 2019 के लोकसभा चुनाव में प्रचार की शुरूआत खुद को ‘मैं भी चौकीदार’ कह कर किया है। हकीक़त तो यह है की चायवाले की मन की बात हो या चौकीदार बनने का जोश,यह बस चुनाव जीतने के लिए एक चुनावी कवच है जिसके सामने झूठ है और पीछे सच,झूठ के सहारे सत्ता पाने वालों के इन नारों के पीछे का सच यह है कि चायवाला और चौकीदार के जीवन में कोई बदलाव हुआ ही नहीं।
चायवाला बनकर सत्ता के शिखर पर नेता तो पहुंच गए,लेकिन आज भी सत्ता के तंत्र पुलिस, नगर पालिका और छुटभैये नेताओं ने सड़क पर तपती धूप में अपने परिवार का भरण पोषण करने वाले चाय वालों से लालच का सिक्का लूटते हैं और और फिर इन्हीं को ताक़त दिखा कर चाय में पड़ी मक्खी की तरह रोजी रोटी के साधन के साथ फेंक देतें हैं,और वसूली की रक़म बढ़ा कर निर्लज्ज तंत्र ढिठाई से दोबारा ठेला लगाने देता है।
सोशल मीडिया का क्या है,एडिट कीजिए बन जाईए बादशाह,तानाशाह,चायवाला या चौकीदार जो मन करे ऐसा करने में कुछ लगता थोड़े ही है।सोशल मीडिया पर आभासी,ख्याली पुलाव पकाने वालों द्वारा किया जाने वाला इसतरह का मसखरापन, असल में दो वक़्त की रोजी रोटी के लिए जद्दोजहद करने वाले चायवाले और चौकीदार को चुभता है,क्योंकि आभासी ख्याली पुलाव पकाने वाले मसखरा कर मज़ा ले सकते हैं,लेकिन असल में एक दिन का भी मसखरापन पूरे परिवार को भूखे पेट की तपिश से झुलसा जाता है।
सोशल मीडिया पर चौकीदार बनने की होड़ में बेरोजगारी,नोटबंदी,जीएसटी और आतंकवाद के मुद्दे सब ग़ायब है और देश मे चौकीदार के पद खाली है,इन खाली पदों पर भर्ती के लिए न तो कोई चर्चा है न कोई योजना! बस "मैं भी चौकीदार" के शोर में सब कुछ गुम कर सत्ता हथियाने का खेल खेला जा रहा है,कोई पूछने वाला नहीं की चायवाला बनकर अच्छे दिन जैसे लोकलुभावन वायदों का क्या हुआ?


सिंगरौली।। कोतवाली पुलिस ने अवैध शराब विक्रेताओं के खिलाफ चल रही शख्त कार्यवाही के दौरान पुलिस अधीक्षक दीपक शुक्ला एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रदीप सेन्डे की सतत निगरानी मे कोतवाली प्रभारी मनीष त्रिपाठी द्वारा अलग-अलग स्थानों से तीन शराब बनाने वालों को गिरफ्तार किया गया है।साथ में132 पाव प्लेन लाल व सफेद शराब सहित 10 लीटर महुआ शराब बनाने की भठ्ठी व सामग्री बरामद किया गया है।
गनियारी चौराहे से बबलू गोस्वामी के कब्जे से 2 पेटी कुल 100 पांव प्लेन,गया प्रसाद साहू निवासी टुसाखाड़ की दुकान से 32 पाव, रामजी बैगा निवासी बरहपान के कब्जे से 10 लीटर महुआ शराब सहित हाथ भट्टी की जप्त किया गया है तीनों अवैध शराब विक्रेताओं के खिलाफ 34(1) के तहत कार्यवाही की गई है।
उक्त कार्रवाई में प्रधान आरक्षक संतोष सिंह पिंटू राय आरक्षक संजय परिहार महेश पटेल प्रवीण सिंह सुनील जितेंद्र शामिल रहे।
रिपोटर-अर्जुन शाह


राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने न्यायमूर्ति पिनाकी चंद्र घोष को शनिवार को लोकपाल प्रमुख के रूप में शपथ दिलाई। आधिकारिक बयान में कहा गया,'राष्ट्रपति भवन में एक समारोह में शपथ दिलाई गई।'उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति घोष को 19 मार्च को देश के पहले लोकपाल के रूप में नियुक्त किया गया था। 

जानिए कौन है पीसी घोष 

पूर्व जस्टिस पीसी घोष का पूरा नाम पिनाकी चंद्र घोष है। उनका जन्म 1952 में हुआ था। इनके पिता शंभू चंद्र घोष भी जस्टिस थे। पीसी घोष 1997 में कलकत्ता हाईकोर्ट में जज बने। दिसंबर 2012 में वह आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने। इसके बाद वो 8 मार्च 2013 में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त हुए। वह 27 मई 2017 में सुप्रीम कोर्ट से रिटायर हुए थे। बता दें कि जस्टिस पीसी घोष अपने कार्यकाल के दौरान कई बड़े फैसले लिए। उन्होंने शशिकला और अन्य को भ्रष्टाचार के मामले में दोषी ठहराया था। 

पूर्व जस्टिस पीसी घोष 29 जून 2017 से राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के सदस्य हैं। इन नियुक्तियों की सिफारिश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नीत चयन समिति ने की थी और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उसे मंजूरी दी। चयन समिति में पीएम मोदी के अलावा लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन और भारत के मुख्य न्यायधीश जस्टिस रंजन गोगोई और प्रख्यात कानूनविद् मुकुल रोहतगी भी शामिल हैं। 

लोकपाल और लोकायुक्त कानून के तहत कुछ श्रेणियों के सरकारी सेवकों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिये केंद्र में लोकपाल और राज्यों में लोकायुक्त की नियुक्ति का प्रावधान है। यह कानून (2013)यूपीए सरकार के कार्यकाल में पारित किया गया था। 
ये नियुक्तियां सात मार्च को उच्चतम न्यायालय के अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल से 10 दिन के भीतर लोकपाल चयन समिति की बैठक की संभावित तारीख के बारे में सूचित करने को कहने के एक पखवाड़े बाद हुईं। न्यायालय के इस आदेश के बाद 15 मार्च को चयन समिति की बैठक हुई थी। 
नियमों के अनुसार लोकपाल समिति में एक अध्यक्ष और अधिकतम आठ सदस्य हो सकते हैं। इनमें से चार न्यायिक सदस्य होने चाहिये। इनमें से कम से कम 50 फीसदी सदस्य अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक और महिलाएं होनी चाहिये।


ई  दिल्ली।।पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर गौतम गंभीर शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री अरूण जेटली और रविशंकर प्रसाद की मौजूदगी में भाजपा में शामिल हुए। गौतम राजधानी की एक लोकसभा सीट से आगामी लोकसभा चुनाव में उम्मीदवार हो सकते हैं। गंभीर 2011 विश्व कप और 2007 टी20 विश्व कप में भारत की जीत के सूत्रधारों में रहे थे। उन्हें हाल ही में पद्मश्री से नवाजा गया है। 

‘‘मैं हमारे प्रधानमंत्री और उनके विज़न से प्रभावित हो कर पार्टी में शामिल हो रहा हूं। मैं क्रिकेट में जो कर सकता था, वह मैंने किया और अब देश के लिए वास्तव में कुछ बेहतर करने, देश को रहने के लिए बेहतर स्थान बनाने के लिए यह (भाजपा) मेरे लिए बेहतरीन प्लेटफार्म है।

गौतम गंभीर

पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर
जेटली ने गंभीर के भाजपा में शामिल होने को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि गंभीर दिल्ली में पले बढे़ हैं और पार्टी उनकी प्रतिभा का अधिकतम इस्तेमाल करेगी। उन्हें लोकसभा चुनाव में उतारने को लेकर पार्टी सही समय पर फैसला लेगी। 

भाजपा सूत्रों के अनुसार, गंभीर को नयी दिल्ली सीट से उतारा जा सकता है जहां से फिलहाल मीनाक्षी लेखी भाजपा की सांसद है। उन्होंने हालांकि कहा कि अभी अंतिम फैसला नहीं लिया गया है । 
‘‘गंभीर दिल्ली में पले बढ़े हैं और हमें लगता है कि पार्टी में उनका शामिल होना महत्वपूर्ण है। उनकी मौजूदगी से पार्टी को फायदा होगा।’’ 

अरुण जेटली 

केन्द्रीय मंत्री,भारत सरकार 

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