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वाराणसी।।आज नवागत मुख्य अभियंता श्री शैलेन्द्र कुमार ने मुख्य अभियंता वितरण वाराणसी का पदभार ग्रहण किया। पदभार ग्रहण के उपरांत उर्जान्चल टाईगर समाचार को अपने प्राथमिकता को बताते हुए कहा कि उपभोक्ताओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध किया जायेगा साथ ही विद्युत कटौती मुक्त के सम्बंध मे 24 घंटे निर्विन विधुत आपूर्ति प्रदान किया जायेगा, शासन द्वारा संचालित सौभाग्य योजना एवं पं0 दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण विद्युतीकरण योजनाओ पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
शैलेन्द्र कुमार पूर्व मे वर्ष 2010 से 2012 तक नागरीय विधुत वितरण खण्ड भेलूपुर वाराणसी मे अधिशासी अभियंता के पद पर कार्यरत थे।

मुख्य अभियंता का स्वागत करने वालो मे लेखा संघ के उप मुख्य लेखाधिकारी दीपक कुमार भारती, फरेंदर कुमार राय,शशिकिरण मौर्य जूनियर इंजीनियर संघ के अवधेश मिश्रा, रतनेश सेठ, ए.के.सिंह कार्यालय सहायक संघ के रमा शंकर पाल ने स्वागत किया।

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राहुल लाल
केरल इस समय बहुत बड़े जलप्रलय से जूझ रहा है।इस जल प्रलय में अब तक 400 से ज्यादा लोग मारे गए हैं तथा लाखों के संख्या में लोग बेघर हो चुके हैं।इस आलेख में केरल बाढ़ के कारणों एवं उसके निदान को सूक्ष्मता से विश्लेषित किया गया है।

केरल बाढ़ के कारणों को देखा जाए तो जहाँ आपदा के प्राकृतिक कारण है,वहीं इसके कारण में प्रकृति से छेड़छाड़ जैसी मानवीय घटनाएँ भी प्रमुख है।पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील स्थानों पर अवैध निर्माणों ने स्थिति को और भी गंभीर बनाया है।
पश्चिमी घाट के पर्यावरणीय संवेदनशीलता को बनाएँ रखने के लिए सरकार ने 2010 में गाडगिल कमेटी का गठन किया था।परंतु इस कमेटी के सिफारिश को केरल के किसी भी सरकार ने गंभीरता से नहीं लिया।इसके अतिरिक्त केरल में बाँधों का भी समुचित प्रबंधन नहीं किया गया।बाँध के पानी को पहले से ही धीरे-धीरे छोड़ा जाता तो स्थिति इतनी विनाशकारी नहीं होती।इस आलेख में भविष्य में इस तरह की घटना नहीं हो,उसके लिए महत्वपूर्ण सुझावों को भी प्रस्तुत किया गया है।

केरल को ईश्वर का घर कहा जाता है,लेकिन अब इसी केरल में बाढ़ और इससे हुई तबाही के कारण हाहाकार मचा हुआ है।केरल में अब तक 400 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।पिछले 10 दिन में ही केवल 210 लोगों की मौत हुई है।मृतकों के संख्या में और भी वृद्धि की संभावना है।केवल गुरुवार को ही केरल में सरकारी आकड़ों के अनुसार 106 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं।फिलहाल केंद्र और राज्य सरकारों का जोर यहाँ पर मदद पहुँचाने का है।केरल को जब भी याद करते हैं,तो हरियाली और पानी अवश्य याद आती है।बैकवाटर्स में तैरती हाउसबोर्ड कितनी सुंदर लगती है।ऐसा लगता है कि केरल में जिंदगी पानी के साथ कदम ताल मिलाकर चलती है।पानी और केरल के इस अनोखे संगम में आखिर इतनी भीषण बाढ़ कैसे आ गई है?

पिछले कुछ दशकों में केरल में कभी बाढ़ की बात सुनी भी नहीं गई।केरल में इससे पहले 1924 में बाढ़ आई थी,जिसमें 1 हजार से अधिक लोगों की मौत हुई थी।राज्य में दक्षिण पश्चिम मानसून सामान्य बारिश करके आगे बढ़ जाता था,लेकिन इस बार ऐसा क्या हो गया कि मानसूनी बादल जरूरत से ज्यादा बारिश कर रहे हैं।फिर राज्य के 80% इलाकों में जल प्लावन की स्थिति आ गई।केरल के इतिहास में पहली बार सूबे के सबसे बड़े बाँध इदुक्की हाइड्रोलॉजिकल प्रोजेक्ट के पाँचों गेट खोलने पड़े।यहाँ से हर सेकेंड 5 लाख लीटर पानी छोड़ा जा रहा है,जिससे राज्य की सबसे बड़ी पेरियार नदी के आस-पास के इलाकों में भारी बाढ़ आ गई है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस भयावह बाढ़ का हवाई सर्वेक्षण भी किया है तथा कोच्चि में उच्चस्तरीय बैठक कर राहत कार्यों का समीक्षा भी किया।प्रधानमंत्री मोदी ने हालात से निपटने के लिए केरल को 500 करोड़ की वित्तीय सहायता की घोषणा की है।वहीं राज्य सरकार ने 2000 करोड़ रूपये की सहायता मांगी है।राज्य में एनडीआरएफ,जल थल और वायु सेना व्यापक राहत कार्य में लगी हुई है।

केरल के प्रभावित हिस्से

राज्य के 14 में से 13 जिले बारिश से प्रभावित हैं।इस तरह पूरे राज्य में भारी वर्षा हुई है,लेकिन कुछ जिले हैं,जहाँ बाढ़ की समस्या गंभीर है।ये हैं-इदुक्की,कोझीकोड, मलाप्पुरम,कन्नूर और वायनाड।ये जिले उत्तर और मध्य केरल के हैं,ज्यादातर पश्चिमी घाट से लगे हुए हैं।कोझीकोड में आईआईएम है,तो इदुक्की और वायनाड में कई मशहूर टूरिस्ट रिजॉर्ट हैं।हालत ज्यादातर खराब इदुक्की और वायनाड के पहाड़ी इलाकों में है।इदुक्की जिले में इदुक्की डैम का पानी ठहरा हुआ है।बाँध को जिन इलाकों से पानी मिलता है,वहाँ काफी वर्षा होने से बाँध पानी से पूरी तरह भर गया है और बाँध से पानी छोड़ने के अलावा कोई चारा नहीं है।वायनाड में बसे मथनवडी और विथिरी से संपर्क पूर्णतः कट गया है,क्योंकि सड़कें बह गई है और कई जगह लैंड स्लाइड हुआ है।

इदुक्की में 44%,कोट्टायम में 47% और एर्नाकुलम में 44% ज्यादा वर्षा हुई है।केरल में इस आपदा से 10 लाख से ज्यादा लोग बेघर हुए हैं तथा अब तक 6.5 लाख से ज्यादा लोगों को 3500 रिलीफ कैंपों में शिफ्ट किया जा चुका है।

नुकसान कितने का?

केरल बाढ़ की भयावहता इससे ही समझी जा सकती है कि अब तक 400से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है ,साथ ही इस आँकड़े के आगे जाने की भी संभावना है।राज्य के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के अनुसार प्रारंभिक आकलन के अनुसार लगभग 20,000 करोड़ का नुकसान हुआ है।

बाँध और जलाशयों की स्थिति

37 में से 34 बाँधों को खोलना पड़ा है,जो केरल में इससे पहले कभी नहीं हुआ।39 में 35 रिजर्ववायर्स के गेट खोलने पड़े हैं।इसमें कई रिजर्ववायर्स ऐसे हैं,जो पिछले कई सालों से भर नहीं पाते थे।

केरल में बाढ़ का कारण

भारत के मौसम विभाग के अनुसार केरल में इस वर्ष का मानसून काफी तगड़ा था।पिछले वर्ष 1 जून से 30 सितंबर के बीच 1855.9 मिमी वर्षा हुई थी,लेकिन इस बार 1 जून से 10 अगस्त के बीच 1840.52 मिमी वर्षा हो गई अर्थात कम वक्त में ज्यादा वर्षा।पूरे देश की तरह केरल में भी दक्षिण पश्चिम मानसून ही मुख्य तौर पर बारिश लाता है।अरब सागर में बनने वाली मानसूनी हवाएँ जून के मध्य या आखिर तक केरल के तटीय इलाकों को छूती हैं।आमतौर पर केरल के उत्तरी और दक्षिणी इलाकों में दक्षिणी पश्चिमी मानसून ही बारिश करता है।हर बार केरल में प्रवेश करने वाली ये मानसूनी हवाएँ केवल सामान्य वर्षा करती थी।

इस बार भारी वर्षा क्यों हुई?

दरअसल केरल में इस बार काफी बड़े एरिया में चक्रवर्ती सर्कुलेशन की स्थिति बनी हुई थी।फिर बंगाल और आसपास के क्षेत्रों में कम दबाव का क्षेत्र होने से मानसूनी हवाएँ बजाए आगे बढ़ने के केरल में रुकी रही और वहाँ बारिश कर रही थी।साथ ही कर्नाटक और केरल में समुद्रीय ज्वार भाटे की स्थिति ने इसमें इजाफे का काम किया।लिहाजा केरल में इतनी बारिश हुई,जो हाल के वर्षों में नहीं देखी गई थी।चूँकि अब कम दबाव का क्षेत्र बदलकर गुजरात की ओर पहुँच चुका है,लिहाजा केरल की स्थिति में बदलाव शुरू हो चुका है और वहाँ एक दो दिनों में वर्षा कम हो जाएगी।

प्रकृति से छेड़छाड़ जैसे मानवीय हस्तक्षेप भी है जिम्मेदार

बाढ़ से सबसे ज्यादा नुकसान उन जगहों पर हुआ है जो इकोलॉजिकली संवेदनशील जोन में थे।उन क्षेत्रों में लोगों ने धड़ल्ले से नियमों को ताक पर रखकर निर्माण किया गया है।इन जगहों पर ही सबसे ज्यादा भूस्खलन भी हुआ है।इसके अतिरिक्त अनेक पर्यावरणविदों ने चैकडैम को भी इसका कारण माना है।इस बार काफी वर्षा हुई है,लेकिन यदि संवेदनशील क्षेत्रों में जमकर निर्माण नहीं होता,तो यह नौबत नहीं आती।उदाहरण के लिए कोच्चि एयरपोर्ट भी बाढ़ से जलमग्न हो गया था।कोच्चि एयरपोर्ट भी पेरियार नदी के ट्रिब्यूटरी पर ही बना है।आपको बता दें कि इकोलॉजिकल सेंसेटिव जोन में निर्माण करने की इजाजत नहीं है।अवैध निर्माण की वजह से पानी के निकलने के मार्ग लगातार बाधित होते चले गए,जिसकी वजह से बाढ़ आई और तबाही देखने को मिली।लेकिन यदि उन क्षेत्रों पर नजर डालेंगे जहाँ भूस्खलन ज्यादा हुआ है तो पता चलता है कि यह वही जगह है,जहाँ पर निर्माण की इजाजत नहीं है,फिर भी चेकडैम बनाए गए हैं या फिर इमारतें खड़ी की गई हैं।

गाडगिल कमेटी की रिपोर्ट में यह साफतौर पर कहा गया है कि इन क्षेत्रों में निर्माण नहीं किया जाना चाहिए।लेकिन सरकारें रिपोर्ट से इतर काम करती रही।यह कमेटी 2010 में बनी थी।2010 में व्यापक स्तर पर यह चिंता फैली कि भारतीय उपमहाद्वीप के ऊपर वर्षा के बादलों को तोड़ने में अहम भूमिका निभाने वाला पश्चिमी घाट मानवीय हस्तक्षेप के कारण सिकुड़ रहा है।इसके मद्देनजर केंद्र सरकार ने गाडगिल कमेटी का गठन किया था।चेन्नई में पिछली बार हम लोग इसी तरह के मानव निर्मित बाढ़ को देख चुके हैं।

केरल की नदियों के साथ छेड़छाड़ एवं सिकुड़ते जंगल

जहाँ तक केरल की भौगोलिक स्थिति का सवाल है,तो आपको बता दें कि केरल से 41 नदियाँ निकलती हैं।कई पर्यावरणविदों ने तो केरल के बाढ़ को वहाँ के 41 नदियों के आँसू भी कहा है।पर्यावरणविदों का कहना है कि केरल के इन सभी नदियों के प्रवाह रोकने वाले सभी सड़कों और अतिक्रमण को हटाना आवश्यक है।शुरुआत उन आवासों और कारखानों को हटाकर करनी चाहिए जो नदियों को दूषित या प्रभावित करते हैं।एक तरह से मानवीय हस्तक्षेप के कारण सुख समृद्धि लाने वाली नदियाँ बाढ़ की तबाही लाने वाली नदियों में बदल गई है।अगरयही हालत रही तो केरल कभी बाढ़ और कभी सूखे के चपेट में रहेगा।केरल में हो रहे बदलाव को इस तरह से भी देखा जा सकता है कि कृषि के विकास के लिए यहाँ वनों का दोहन दोगुना हो गया है।इसका सीधा असर यहाँ के वनक्षेत्रों पर पड़ रहा है।वन क्षेत्रों का कम होना स्वयं ही भूस्खलन को आमंत्रित करना है।

बाँधों के समुचित प्रबंधन के अभाव से स्थिति और भी भयावह हुई

केरल में बाँधों से पानी छोड़ने में भी दूरदर्शिता का ध्यान नहीं रखा गया।यदि प्रशासन कम से कम 30 बाँधों से समयबद्ध तरीके से धीरे-धीरे पानी छोड़ता तो केरल में बाढ़ इतनी विनाशकारी नहीं होती।जब राज्य में बाढ़ चरम पर था,तब 80 से अधिक बाँधों से पानी छोड़ा गया।केरल के प्रमुख बांधों इडुक्की और इडामाल्यार से पानी छोड़ जाने से पहले से भारी बारिश में घिरे केरल में बाढ़ की स्थिति और भी खराब हो गई।यदि बाँध के संचालक समय से पहले पानी छोड़ते रहते ना कि उस वक्त का इंतजार करते कि बाँध पानी से लबालब हो जाए और उसे बाहर छोड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं हो।भीषण बाढ़ और उस पर बाँध से पानी छोड़ा जाना स्पष्ट करता है कि हमारी आपदा प्रबंधन की तैयारी कितनी कमजोर है।

इससे बचाव का सीधा सा उपाय यह है कि हम बदलते समय के लिहाज से खुद को कैसे तैयार करें।इसके लिए इकोलॉजिकल सेंसेटिव जोन में निर्माण कार्य पर तुरंत रोक लगे।विकास को एक नए दृष्टि प्रकृति से तादात्म्य से जोड़कर देखना पड़ेगा।साथ ही केंद्र और राज्य सरकारों को लघु अवधि एवं दीर्घावधि नीतियों के निर्माण की भी आवश्यकता है।पूर्व में 2013 में केदारनाथ और 2014 में जम्मू कश्मीर में बाढ़ से तबाही को राष्ट्रीय आपदा का दर्जा दिया गया था।अभी वर्तमान में आवश्यक है कि केंद्र सरकार केरल आपदा को भी शीघ्र ही राष्ट्रीय आपदा घोषित करे।


नई दिल्ली।।  वर्ष 2007 में योगी आदित्यनाथ द्वारा दिये भाषण के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि 2007 में घृणास्पद भाषण देने के लिए योगी आदित्यनाथ पर मुकदमा क्यों नहीं किया जाना चाहिए?

सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस में सरकार को चार हफ्ते का समय दिया है। 

ज्ञात हो कि वर्ष 2007 में गोरखपुर में योगी आदित्यनाथ द्वारा दिये गये भाषण के बाद वहां दंगा हो गया था. दंगा में एक व्यक्ति की मौत भी हुई थी। 2008 में मोहम्मद असद हयात और परवेज ने दंगों में हुई मौत के बाद सीबीआई जांच को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। जिसमें योगी द्वारा दिए गए भड़काऊ भाषण को दंगे की वजह बताया गया था।

इसके बाद योगी आदित्यनाथ की गिरफ्तारी भी हुई थी। इस दौरान उन्हें 11 दिनों की पुलिस कस्टडी में भी रखा गया था। इस केस को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया था। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने यूपी सरकार से कहा है कि वह चार सप्ताह के अंदर जवाब दाखिल करे।

इससे पहले ये मामला हाईकोर्ट में चल रहा था। हाईकोर्ट में सरकार की तरफ से दलील दी गयी थी कि मुख्य आरोपी राज्य का सीएम बन चुका है इसलिए अब उस पर केस नहीं चलाया जा सकता।

हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से पूछा था कि जब सरकार ने मुख्यमंत्री के खिलाफ मुकदमा चलाने की इजाजत देने से इनकार कर दिया है तो याचिककर्ता के पास और क्या विकल्प रह जाता है। अप्रैल में राज्य सरकार के एडवोकेट जनरल नियुक्ति किए गए वकील राघवेंद्र सिंह ने सोमवार को कहा कि मजिस्ट्रेट के पास इस बात का अधिकार नहीं है कि वो केंद्र या राज्य सरकार के मना करने के बावजूद मुकदमा चला सके।

याचिकाकर्ता परवेज परवाज और असद हयात ने हाईकोर्ट में दाखिल अपनी मूल याचिका में मांग की थी कि इस मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए क्योंकि यूपी पुलिस जानबूझकर मामले को लटका रही है। परवेज ने सोमवार को कहा कि वो राज्य सरकार से अपने और अपने परिवार के लिए सुरक्षा की मांग करेंगे।

याचिकाकर्ता परवेज ने कहा कि वो गोरखपुर जिला प्रशासन से भी सुरक्षा मांगेंगे। परवेज के अनुसार चूंकि अब राज्य सरकार के पास कोई रास्ता नहीं बचा है तो उनकी जान को खतरा हो सकता है। हालांकि उन्होंने किसी तरह की धमकी मिलने से इनकार किया।


नौशाद अन्सारी
सोनभद्र ब्यूरो, उर्जान्चल टाइगर

शक्तिनगर।।डीजल आजकल कोयला पे भारी पड़ता नजर आ रहा है।डीजल चोरी कर अब तक कई लोग करोड़ों के वारे न्यारे किये हैं।

आज शक्तिनगर के बीना एनसीएल बीना परियोजना में एनसीएल में कार्य कर रही प्राइवेट सिक्योरिटी ने परियोजना में चोरी कर रहे डीजल चोर को पकड़ा है।बोलेरो के साथ 7डिब्बा डीजल पकड़ा गया है।प्राप्त जानकारी के अनुसार जानकारी के अनुसार बीना एनसीएल खदान में आज दोपहर 3से 4 बजे के बीच बोलेरो से 7डब्बे चोरी का डीजल लेकर डीजल चोर भागने की फिराक में थे तभी प्राइवेट सिक्यूरिटी के लोगों के द्वारा पीछा कर बोलेरो को पकड़ लिया गया।उक्त बोलेरो से एक युवक पकड़ा गया है।वहीँ सिक्यूरिटी के लोगों ने बोलेरो सहित गैलन से भरे डीजल को शक्तिनगर थाना को सुपुर्द कर दिया है।


शक्तिनगर एसएसआई संतोष यादव ने बताया के एक बोलेरो गाड़ी पकड़ा गया है।एक युवक को भी बोलेरो के साथ पकड़ा गया है।संतोष यादव ने बताया के पूछताछ में युवक ने अपना नाम उमाकांत गुप्ता निवासी रेहटा बताया है।उन्होंने बताया के उक्त युवक से पूछताछ के आधार पे आगे की कारवाई की जायेगी।

आइये आपको बताते हैं कैसे खेला जाता है खेल

लाख टके का सवाल अब भी अपनी जगह कायम है,कि परदे के पीछे के असली प्यादे अभी भी पकड़ से क्यों दूर है? सूत्रों की माने तो इस डीजल चोरी के खेल का असल कहानी ये है कि इस खेल का मास्टर माइंड एक सेना से रिटायर्ड मेजर है, इस मेजर को एनसीएल परियोजना में सिक्यूरिटी का काम दिया जाता है। मेजर यह काम किसी दूसरे पार्टी को दे देता है।उसके बाद सारा खेल शुरू होता है।डीजल माफिया सिक्यूरिटी का काम कर रहे लोगों से मिलाकर डीजल चोरी करता है।इसमें सिक्यूरिटी का काम कर रहे लोगों को प्रति गैलन डीजल के हिसाब से पैसा मिलता है।इसमें वही पकड़ा जाता है जिसकी सेटिंग नहीं होती है।

कार्यवाही महज़ दिखावा ही लगता है

इस डीजल के खेल में उर्जांचल के दो डीजल माफिया जो पहले खाकपति था आज करोड़पति बना बैठा है,का चर्चा होता रहा है लेकिन हर स्तर पर सेटिंग में माहिर इन दोनों तक कानून के हांथ पहुंच ही नहीं पाते।सरकार किसी की हो ,कोई फर्क नहीं पड़ता यह इनके सेटिंग की दक्षता को दर्शता है। कहते हैं न, गुलाबी नोटों का असर ही कुछ ऐसा होता है की सभी असरदार जिम्मेदार इनके दर पे जाकर बेअसर हो जाते हैं।ऐसे में प्यादों पर होने वाली कार्यवाही महज़ दिखावा ही लगता है।

बकरीद से पहले भारत में अपने भाइयों के लिए मदद का हाथ बढ़ाना न भूलें।-प्रधानमंत्री संयुक्त अरब अमीरात

दुबई ।  त्रासदी की इस घड़ी में केरल की तरफ़ मदद की हाथ बढ़ाते हुए संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के प्रधानमंत्री और दुबई के शाह शेख़ मोहम्मद बिन राशिद अल मक्तुम ने राज्य में बारिश और बाढ़ की आपदा से जूझ रहे लोगों की मदद के लिए आपात समिति बनाने का आदेश दिया है। 

अंग्रेज़ी और मलयाली भाषाओं में किए गए कई ट्वीट में उन्होंने कहा, ‘केरल के लोग हमेशा और अब भी यूएई की सफलता के साझीदार रहे हैं प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने और उनकी मदद करने की हमारी ख़ास ज़िम्मेदारी बनती है. ख़ास तौर से इस पाक महीने में

आपको बता दें कि सालान हज 19 अगस्त से शुरू हो रहा है। इसका समापन 22 अगस्त को ईद-उल-अजहा के साथ होगा

अल मक्तुम ने ट्वीट संदेश में कहा, ‘हमने एक समिति गठित की है जो तत्काल प्रभाव से काम करेगी. हम सभी लोगों से इस काम में दिल खोलकर मदद करने की अपील करते हैं


एक अन्य ट्वीट में अमीरात के प्रधानमंत्री ने कहा, ‘भारत का केरल राज्य अभी भीषण बाढ़ का सामना कर रहा है सैकड़ों लोग मारे गए हैं, लाखों लोग बेघर हो गए हैं। बकरीद से पहले भारत में अपने भाइयों के लिए मदद का हाथ बढ़ाना न भूलें

इस बीच, अमीरात में भारत के राजदूत नवदीप सिंह सूरी ने कहा कि वह यूएई में बाढ़ पीड़ितों के लिए समर्थन और धन जुटाने के मक़सद से सामुदायिक संगठनों, कार्यकताओं और उद्योगतियों तथा व्यावसायियों के साथ बैठक करेंगे


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तिरुवनंतपुरम।।  केरल के बाढ़ प्रभावित इलाकों में हजारों लोग अब भी सुरक्षित निकाले जाने की उम्मीद में हैं। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक इडुक्की जिले में सबसे ज्यादा लोगों के मरने की खबरें आईं हैं जहां अब तक 43 लोग अपनी जान गंवा चुके है। मलप्पुरम में 28 और त्रिशूर में 27 लोगों की मौत की खबर आई है। राजस्व अधिकारियों के मुताबिक अलप्पुझा जिले के चेंगानुर में कम से कम 5,000 लोग फंसे हुए हैं। राज्य भर के राहत शिविरों में करीब छह लाख लोग मौजूद हैं। 

अलप्पुझा, त्रिशूर और एर्णाकुलम जिलों के कई इलाकों में अब भी कई लोग अपने घरों में फंसे हुए हैं जहां उनके पास भोजन और पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते 18 अगस्त को बाढ़ प्रभावित केरल का हवाई सर्वेक्षण करने के बाद राज्य को तत्काल 500 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता देने की घोषणा की 

केरल सरकार ने 2000 करोड़ रुपये की तत्काल सहायता मांगी थी और प्रधानमंत्री को सूचित किया कि इस आपदा में राज्य को 19 हज़ार 512 करोड़ रुपये की क्षति पहुंची है

एर्णाकुलम के परावुर में छह लोगों के मारे जाने की खबर आई जहां बुधवार रात चर्च का एक हिस्सा गिर गया था। जीवित बचाए गए एक व्यक्ति ने गुस्सा जाहिर करते हुए एक टीवी चैनल को बताया कि कम से कम 600 लोग चर्च में फंसे हुए हैं और अब तक कोई भी उनकी मदद को नहीं पहुंचा है। लेकिन चर्च में छह लोगों के मारे जाने की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। 

एनडीआरएफ ने केरल में 58 टीमें लगाई गईं

राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) ने बारिश और बाढ़ से जूझ रहे केरल के विभिन्न इलाकों से 10 हज़ार से ज़्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला है और कहा है कि उसने अब तक का देश का सबसे बड़ा राहत और बचाव अभियान छेड़ा है। 


एनडीआरएफ के एक प्रवक्ता के अनुसार एनडीआरएफ  कुल 58 टीम राहत एवं बचाव काम के लिए केरल में तैनात की गई हैं. उनमें से 55 टीम वहां काम कर रही हैं जबकि तीन टीम रास्ते में है।

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