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जिला कलेक्टर  अनुराग चौधरी के निर्देशन व जिला आबकारी अधिकारी अनिल जैन के मार्गदर्शन में जिले में महुआ शराब बनाने बेचने वाले लोगों पर लगातार हो रही है,कार्रवाई।

सिंगरौली से  विनोद सिंह।। मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव निर्वाचन वर्ष 2018 को दृष्टिगत रखते हुए आबकारी विभाग द्वारा जिला कलेक्टर  अनुराग चौधरी जी के निर्देशन एवं जिला आबकारी अधिकारी  अनिल जैन व सहायक कलेक्टर  रोहित सिसोनिया के मार्गदर्शन में सहायक जिला आबकारी अधिकारी आर एल साहू के नेतृत्व में छापा मारकर रवि कुमार केवट के यहाँ से 10 लीटर हाथ भट्ठी शराब एवं 20 किलो ग्राम महुआ लाहन ,शिव शंकर केवट के यहाँ से 10लीटर हाथ भट्ठी शराब एवं 15किलो ग्राम महुआ लाहन, ललन केवट के यहाँ से 10 लीटर हाथ भट्ठी शराब एवं 10 किलो ग्राम महुआ लाहन तीनों  निवासी ग्राम मझौली डाड़, शान्ती देवी जायसवाल के यहाँ से 20किलो ग्राम महुआ लाहन, सुकबरिया जायसवाल निवासी ग्राम उज्जैनी के यहाँ से 20किलो ग्राम महुआ लाहन सभी थाना बरगवा से जप्त कर आबकारी अधिनियम की धारा 34(1)(क)(च) के तहत प्रकरण बनाया गया।

इस कार्रवाई में शिवेन्द्र सिंह मुख्य आब आरक्षक एवं आर एन साहू ,बहादुर सिंह गोंड आबकारी आरक्षक, थाना बरगवां के महिला आरक्षको ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

किसी भी व्यक्ति को जिले  के अंदर अवैध शराब की बिक्री नहीं करने दिया जाएगा चाहे वह अंग्रेजी शराब हो या देशी शराब या फिर चाहे हाथ भट्ठी महुआ शराब ही क्यों न हो जो भी व्यक्ति इस तरह के अवैध कार्यों में पाया जाएगा उसके उपर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

अनिल जैन 
DO जिला आबकारी अधिकारी सिंगरौली


अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय से पूर्व राष्ट्रपति ज़ाकिर हुसैन,पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री लियाकत अली खान,भाजपा के पूर्व मुख्यंमत्री दिल्ली साहिब सिंह वर्मा,उप राष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी,हाकी खिलाडी ध्यान चंद्र जैसे नामचीन हस्तियों ने शिक्षा हासिल की है।

सगीर ए खाकसार

सर सयैद अहमद खां के जन्म दिवस 17 अक्टूबर पर विशेष। 

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के संस्थापक,प्रगतिशील विचार धारा के पोषक और समाज सुधारक सर सयैद अहमद खान मुसलमानों में शिक्षा खास तौर पर आधुनिक शिक्षा के ज़रिये ब्यापक बदलाव के हिमायती थे।वो इस्लाम धर्म के अनुयायियों में बौद्धिक चेतना प्रदान कर उन्हें नई दिशा देना चाहते थे। उनका मानना था कि तकनीकी, वैज्ञानिक,और आधुनिक शिक्षा हासिल करके ही मुसलमान अपनी ग़ुरबत,और बदहाली को दूर कर सकता है।उन्होंने कहा था जब एक कौम तालीम हासिल करने से दूरी अख्तियार करती है,तो ग़ुरबत पैदा होती है,और जब ग़ुरबत आती है तो हजारों जरायम भी अपने साथ लाती है। 

सर सयैद अहमद खां के शिक्षा के प्रति समर्पण,त्याग और निष्ठा से राष्ट्र पिता महात्मा गांधी भी बहुत प्रभावित थे।शिक्षा जगत के इस महान पुरोधा को शांति के अग्रदूत महा मानव महात्मा गांधी ने प्रॉफेट ऑफ़ एडुकेशन तक कह डाला।प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने कहा था कि सर सयैद अहमद ने मुसलमानों को नए दौर की तालीम देने पर अपनी पूरी ताकत लगा दी।
बिना तालीम के मुस्लमान नए तरह की राष्ट्रीयता में हिस्सा नहीं ले सकते थे। दर असल ,सर सयैद अहमद इल्म की ताकत से बखूबी वाकिफ हो चुके थे।उन्हें मालूम था कि आने वाला दौर ज्ञान ,विज्ञानं और तकनीक का होगा।जिस कौम के पास इल्म की ताकत होगी वही मजबूत और ताकतवर होगा। हालाँकि उन्हें इस सामाजिक बदलाव के लिये बड़ा संघर्ष भी करना पड़ा।तब लोग आसानी से पारंपरिक शिक्षा छोड़कर आधुनिक शिक्षा की ओर आने को तैयार नहीं थे।
मुस्लिम समाज के भीतर भी इनका जोरदार विरोध हुआ। लोगों ने इस्लाम मुखालिफ आरोप भी लगाये।लेकिन उन्होंने इन सब की परवाह कभी नहीं की।प्रगति शील और आधुनिक तालीम के लिए संघर्ष करते रहे।बौद्धिक चेतना का संचार करने के ही मकसद से इन्होंने कई शैक्षणिक संस्थाओं की भी स्थापना की।जिसमे मुरादाबाद का एक फ़ारसी मदरसा,सइंस्टिफिक सोसाइटी अलीगढ प्रमुख है।1875 में अलीगढ में मोहम्मडन एंग्लो ओरिएण्टल कॉलेज की स्थापना की।बाद में यही कॉलेज अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय के रूप में स्थापित हुआ।आज यही विश्वविद्यालय पूरी दुनिया में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है।

इस विश्वविद्यालय ने मुसलमानों के शैक्षणिक,आर्थिक,सामाजिक और राजनैतिक बदलाव लाने में अग्रणी भूमिका निभायी है।

इस विश्वविद्यालय से पूर्व राष्ट्रपति ज़ाकिर हुसैन,पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री लियाकत अली खान,भाजपा के पूर्व मुख्यंमत्री दिल्ली साहिब सिंह वर्मा,उप राष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी,हाकी खिलाडी ध्यान चंद्र जैसे नामचीन हस्तियों ने शिक्षा हासिल की है।

17 अक्टूबर 1817 को दिल्ली में जन्मे शिक्षा जगत के इस महान पुरोधा ने कई किताबें भी लिखी थीं।जिसमे अतहर अस्नादीद,1857 की क्रांति पर आधारित पुस्तक अस्बाबे बगावते हिन्द,तहज़ीबुल अख़लाक़ प्रमुख हैं।अंग्रेजों ने ही नाईट कमांडर ऑफ़ स्टार ऑफ़ इंडिया और सर की उपाधि से नवाजा था।यही नहीं एडिनबरा यूनिवर्सिटी ने डॉक्टर ऑफ़ लॉ की उपाधि दी थी।सर सयैद अहमद खान को ज्योतिष,तैराकी और निशाने बाज़ी में बहुत रूचि थी।

इसके अलावा तालीम के मैदान में भी उन्होंने नए नए कीर्तिमान स्थापित किये।उन्हें अरबी,फ़ारसी,हिंदी और अंग्रेजी भाषाओँ में महारत हासिल थी। पहले उन्होंने मुग़लों की नौकरी की ।फिर अंग्रेजों की।विभिन्न पदों पर होते हुए 1876 में बनारस के स्माल काज कोर्ट के जज पद से रिटायर्ड हुए। नौकरियां तो उन्होंने अपनी ज़िन्दगी में की लेकिन खुद को दफ्तर और घर तक महदूद नहीं किया।

वो चिंतन करते रहे क़ि मुसलमानों को कैसे देश ,समाज और राष्ट्र की मुख्यधारा से जोड़ा जाए।अपने निरन्तर प्रयासों ,संघर्षों से उन्होंने एक ऐसे पौधे का बीजारोपण किया जो आज अलीगढ विश्विद्यालय के रूप में एक महान और विशालकाय बृक्ष की तरह हमारे पास मौजूद है। 25 मार्च 1898 को इल्म की शमा जलाने वाला यह महानायक और समाज सुधारक इस दुनिया ए फानी से कूच कर गया।लेकिन उसकी जलाई शमा आज पूरी दुनिया में अशिक्षा,जहालत,और ग़ुरबत के अंधेरे को दूर कर रही है।। 

शाम दर शाम जलेंगे,तेरे यादों के चिराग। नस्ल दर नस्ल तेरा दर्द नुमाया होगा।


नयी दिल्ली।।यौन शोषण के आरोपों में घिरे विदेश राज्य मंत्री एम जे अकबर ने बुधवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

एक बयान में अकबर ने कहा है ‘‘चूंकि मैंने निजी तौर पर कानून की अदालत में न्याय पाने का फैसला किया है, इसलिए मुझे यह उचित लगा कि मैं अपने पद से इस्तीफा दे दूं।’’ 

बयान में उन्होंने आगे कहा है ‘‘मैं, अपने खिलाफ लगाए गए झूठे आरोपों को निजी तौर पर चुनौती दूंगा। अत: मैं विदेश राज्य मंत्री पद से त्यागपत्र देता हूं।’’ 

उन्होंने कहा ‘‘मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का बेहद आभारी हूं कि उन्होंने मुझे देश की सेवा करने का अवसर दिया।’’

अकबर का इस्तीफा ‘सच की जीत’ - कांग्रेस

कांग्रेस पार्टी प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, ‘‘अकबर के खिलाफ कई वरिष्ठ महिला पत्रकारों ने गंभीर आरोप लगाए थे जो उनके साथ काम कर चुकी हैं। उनका इस्तीफा सच की ताकत की अभिपुष्टि और जीत है।’’ 

उन्होंने कहा, ‘‘मैं उन महिलाओं को सलाम करती हूं जो सत्ता के अहंकार के सामने डट कर खड़ी रहीं। ’’ 

प्रियंका ने आरोप लगाया कि धमकाना और डराना मोदी सरकार में आवाज दबाने का जरिया बन चुका है।


यू टू का आतंक इतना भयंकर है की लोग मुँह छिपाये घूम  रहे हैं। कब किसके उजले मुखड़े पर यू टू के छींटे पड़ जाएं। दशकों पहले के पाप उघड़ने से बन्दा दशकों बाद हलकान है।वो अपना चालान कटने से डर रिया है।
 
ललित शौर्य
चारों ओर मी टू का हाहाकार मचा हुवा है। किसी से भी पूछ लो, बच्चा तक बता डालेगा मी टू चल रिया है। फोक-वोग दूर-दूर तक नहीँ दिखाई दे रिया। पुरुष जाति दशहत में है। कब किधर से किसके पुराने पाप उघड़ जाएं कोई नहीँ जानता। कब मी टू का राफेल बम बरसा दे , कब धज्जियां उड़ा दे, कब स्टेट्स लेबल को उखाड़ फेंके किसको पता। हॉलीवुड से आई इस हवा ने बॉलीवुड को पूरी तरह अपने आगोश में ले लिया है। मी टू का धाँसू सीन देखा जा रहा है। बड़ी-बड़ी हस्तियों की कस्तीयां डूब रही हैं। मी टू बॉलीवुड, राजनीति और पत्रकारिता से जुड़े कई लोगों की लुटिया गोल कर चुका है। आगे किसका नम्बर आएगा देखना दिलचस्प होगा। संस्कार बांटने वाले, भजन गाने वाले, खबरें छापने वाले सभी मी टू के लपेटे में हैं। 
अपने यहाँ तो यू टू का चलन रहा है। मी टू इधर के लिए नया है। यहां हर बात पर यू टू का बुखार सब पर छाया रहता है। किसी को किसी गलतियां बता दो तो बिदग पड़ता है। वो बोलता है यू टू मतलब तुम भी क्या कम हो। पहले अपने गिरेबाँ में झाकों फिर बात करना। बड़ा आया मेरी गलतियां बताने वाला। राजनीति में अपने यहां यू टू बड़ा फल फूल रहा है। 

यहां दशकों से यू टू का खूब खेल खेला जा रा है।राजनीतिक पार्टियां एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते हुए तू-तू, यू टू करते रहती हैं। एक कहता है तुम भ्रष्टाचार में लिप्त हो अगला बोलता है यू टू, एक बोलता है तुम निकम्मे हो अगला उगलता है यू टू, एक बोलता है तुम्हारी सरकार सोई हुयी है अगला बोलता सेम तुम्हारी तरह। जब तुम सरकार में थे सेम ऐसे ही सोते थे। यू टू का खेल हर क्षेत्र में खेला जाता है। 

साहित्य में यू टू का खेल बड़ी चतुराई से खेला जाता है। कोई भी साहित्यकार अगले साहित्यकार की रचना को तभी उम्दा बोलता है जब अगला उसकी रचना को शानदार शब्द से नवाजता है। ये साहित्य का यू टू है। ऐसे ही आजकल शोसल मीडिया में यू टू का ही दौर है।किसी के भी उंगलियों से तारीफ का फूल तभी हिलोरे खाता है,जब अगले के द्वारा उसके पोस्ट पर प्रसंसा का बांध बाधा गया हो। 

इंडियां में मी टू वर्सेज यू टू देखा जा सकता है। मी टू सनसनी खेज खुलासे कर रिया है तो, यू टू सभी को एक ही कटघरे में खींच रिया है। और वो हमाम में सब... वाले मुहावरे को सच साबित कर रहा है। 

मी टू की भयंकर सुनामी ने बड़े-बड़े महलों को जर्जर कर डाला है। बॉलीवुड की चूलें हिल रही हैं। चूल हिलने से बड़े-बड़े औहधों पर चढ़े औधें मुँह लुढ़क रहे हैं। यू टू का आतंक इतना भयंकर है की लोग मुँह छिपाये घूम  रहे हैं। कब किसके उजले मुखड़े पर यू टू के छींटे पड़ जाएं। दशकों पहले के पाप उघड़ने से बन्दा दशकों बाद हलकान है।वो अपना चालान कटने से डर रिया है। कई बंदे तो ये सोच रहे हैं उन्होंने जो तब किया था वो अब यू टू की श्रेणी में आता है या नहीँ। यू टू की स्टैंडर्ड परिभाषा के लिए लोग गूगल बाबा की दाड़ी नोंच रहे हैं। 

खैर मी टू के आरोपों से बचने के लिए बन्दा यू टू का शिगुफा छोड़ रहा है। कई बार तब की सहमति का गुलाब, अबका बबूल बनकर निकल रिया है। खैर यू टू वाले इस देश में मी टू का जलवा लाजवाब देखने को मिल रिया है। मी टू वर्सेज यू टू जारी है। आगे-आगे देखते हैं,होता है क्या।

अब तक चुप रहने से यह महिलाएं खुद ही स्वयं को आरोपी से जायदा अपने को स्वयं ही सवालों के कटघरे में खड़ी नही कर दी है?

के सी शर्मा 
भारतीय इतिहास इस बात का गवाह है कि जब जब इस धरती पर नारी को भोग्या बनाने का प्रयास हुआ है तब तब महाभारत जैसा महायुद्ध एवं महाविनाश हुआ है। जैसे श्री राम के समय सीताजी को लेकर जो राम रावण के बीच युध्य हुआ था! ,

वहीं श्री कृष्ण के काल में द्रोपदी को लेकर कौरवों एवं पाण्डवों के बीच भी युध्य हुवा था! अथवा जगतजननी नवदुर्गा एवं राक्षसों के मध्य युध्य हुआ हो। भारत मे नारी को आदिकाल से शक्तिस्वरूपा देवी समान माना गया है और कन्याओं को साक्षात दुर्गा का स्वरूप मानकर कन्या पूजन और उनको उनका पॉव धूल कर उन्हें भोज कराया जाता है। परन्तु वर्तमान में स्त्री  को "देवी शक्तिस्वरूपा" नहीं बल्कि कामवासना तृप्ति का लोगो द्वारा माध्यम मान लिया गया है। यह हमको पतन की ओर क्या नही ले जारहा हैं?

औरतो की दुनिया भर में उनकी मजबूरियों का फायदा उठाकर यौन प्रताड़ना की जा रही हो, सिर्फ यही बात नही है,बल्कि आज औरते भी अक्सर देखने,पढ़ने को मिलता रहता है कि वह भी सार्टकट का रास्ता अपनाने लगी है ।

अब देखा जारहा है कि राजनीति,पत्रकारिता,नौकरी,आदि,क्षेत्रो में सफलता पाने या दिलाने के नाम पर महिलाओं के यौन प्रताड़ना करने का जैसे रिवाज होता जा रहा है ।

महिलाओं को अक्सर इन क्षेत्रों में जगह बनाने के चककर में यौन उत्पीड़न का दंश झेलना पड़ता है।इस क्षेत्र में उनका शोषण करने का दौर लम्बे अरसे से चला आ रहा है।

विदेशों के बाद अब शायद यह पहला मौका है जब #Me_Tooके माध्यम से अपने साथ हुए अतीत के घटना क्रम को सामने लाने का जो प्रयास किया जा रहा है। इसमें कितनी सच्चाई हैं यह कह पाना आसान बात नही है और नही इसको सीरे से खारीज भी नही किया जा सकता है । 

लेकिन यह तो कहना अतिश्योक्ति नही होगा कि दशकों बाद यह सवाल खड़ा करने वाली महिलाएं घटना क्रम के समय इसका प्रतिरोध क्यो नही की और इतने दिनों तक चुप क्यो रही? जबकि ये महिलाएं अभिजात्य वर्ग से ज्यादातर आती है और उस समय भी हर तरह से सक्षम थी।

अब तक चुप रहने से यह महिलाएं खुद ही स्वयं को आरोपी से जायदा अपने को स्वयं ही सवालों के कटघरे में खड़ी नही कर दी है?
हां यह बात अलग है कि यौन प्रताड़ना की शिकार महिलाओं को आमजनता के सामने सोशल मीडिया के माध्यम से इस समय अपना दर्द व्यक्त करने का एक मंच #Me_Too मिला है। 

इस अवसर का इस्तेमाल यह महिलाएं अपना दर्द बयां करने के लिए कर रही है?या यह ब्लैक मेल करने का एक मंच बन के तो भारत मे नही उभर रहा है?

यह एक विचारणीय सवाल इस समय जरूर देश के सामने अवश्य ही खड़ा हो गया है ।जिस पर राष्ट्रीय बहस की आवश्यकता है ।

पर तब तक इसका परिणाम आने वाले समय मे न जाने कितने घरों को तोड़ देगा और कईयों की जिंदगी भी निश्चित ही तबाह कर के रख देगा। इस समय जबकि भारत का पूरा जनमानस नवरात्रि में नारी शक्ति के रूप नवदुर्गा के विभिन्न स्वरूपों में पूजा अर्चना करने में लगा हुआ है और उनके चरणों मे नतमस्तक है।

ऐसे समय मे  #Me_Too का अभियान चलाया जा रहा है ।अब तक इसके माध्यम से तमाम मामले सामने आचुके हैं।इसको लेकर देश मे खलबली मची हुई है।

हर बड़ी सख्शियत अंदर ही अंदर ख़ौफ में है कि कोई खड़यंत्र का शिकार न होजाये ।कहने वाले तो दबी जुबान यह भी कह रहे है यह विदेशी कल्चर भारतीय संस्कृति और मर्यादा को तहस नहस करने के लिए एक सोची समझी साजिश  भी हो सकती है।

इस नवरात्रि के शुरू होते ही केन्द्र सरकार के एक मंत्री भी इस  #Me_Too अभियान के शिकार हो उससे घिर गये हैं, और बचाव में सुप्रीम कोर्ट की उन्हें शरण लेनी पड़ी हैं। जहां इस मामले की शीघ्र सुनवाई होने वाली हैं।जिस पर सब की नजरें टिकी हुई है ।

आरोपित केन्द्रीय मंत्री एम जे अकबर पर  #Me_Too के तहत यौन प्रताड़ना करने का लगाया गया आरोप उस समय का है जबकि वह देश के जाने माने वरिष्ठ पत्रकार थे और पत्रकारों की नियुक्ति करने का अधिकार उनके पास था। उन पर एक नहीं करीब एक दर्जन पत्रकार महिलाओं ने नौकरी के नाम पर यौन प्रताड़ना करने का आरोप लगाया है।

इसके बाद राजनैतिक गलियारों में एक तूफान सा आ गया है और केन्द्रीय मंत्री के खिलाफ आंदोलन प्रदर्शन के साथ इस्तीफा देने कीमांग होने लगी है।

विशेष बात यह है कि इस *"मीट टू"* अभियान में देश और दुनिया के जितने भी लोग आरोपित किये गये हैं सभी शिक्षित व विभिन्न क्षेत्रों में उच्च पदों पर आसीन हैं।

इस  #Me_Too अभियान से बहुतों के चेहरे से बेनकाब।उतरने लगे हैं और इसीलिए  #Me_Too का यहअभियान इस समय दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गया है।

केन्द्रीय मंत्री पर अभी हाल में आरोप लगाने वाली महिला पत्रकार प्रियंका रमानी का कहना है कि यह घटना बीस साल पहले उस समय हुयी थी जब वह उनके साथ पत्रकारिता करती थी। आरोपी मंत्री इसे सरासर झूठा शरारतपूर्ण श्रंखलाबद्ध प्रेरित पूर्व नियोजित कुचक्र मान रहे हैं और उन्होंने गवाहों सबूतों के साथ सर्वोच्च न्यायालय से न्याय की गुहार लगाई है।दूसरी तरफ आरोप लगाने वाली महिला पत्रकार ने कहा कि वह सच के सहारे मानहानि के मुकदमें का सामना करूंगी 

महिलाओं के इन आरोपो से पत्रकारिता, राजनीति, विभिन्न क्षेत्रों में उच्च पदों पर बैठे लोगों पर लग रहे आरोपों के बाद यह बात तो अब जगजाहिर हो ही गयी है कि इन क्षेत्रों में उच्च पदों पर बैठे लोगो मे किस कदर गिरावट आगयी है।

देखिए आगे यह  #Me_Too और क्या?गुल खिलता है और कितने महानुभाओं के चेहरे पर से नकाब हटाता हैं?

इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में सपा का पक्ष रखने की होगी इन पर जिम्मेदारी।
लखनऊ।। मीडिया के माध्यम से पार्टी की आवाज़ बुलन्द करने के लिए समाजवादी पार्टी ने प्रवक्ताओं की फेहरिस्त लम्बी कर दिया। छोटे बड़े सभी चैनल कवर हो जाएं तथा पार्टी का पक्ष मजबूत रहे इस वास्ते अब तक 38 प्रवक्ता नियुक्त किया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा समाजवादी पार्टी की तरफ से मीडिया में पक्ष रखने के लिए चार नए प्रवक्ताओं के नाम पर मुहर लगाया, जिसकी जानकारी बुधवार को सपा के मुख्य प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दिया। प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि विगत 27 अगस्त को 24 लोगों को, 28 अगस्त को 4 लोगों को तथा 12 सितंबर को 6 पैनलिस्टों के नाम की घोषणा की गई थी, उसी क्रम में इन चार लोगों रमेन्द्र त्रिपाठी (पूर्व आईएएस) देवरिया, जफर अमीन (डक्कू) गोरखपुर, आशुतोष वर्मा, लखनऊ तथा रत्नेश सिंह, जौनपुर को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में समाजवादी पार्टी का पक्ष प्रस्तुत करने हेतु अधिकृत किया है। प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि मीडिया चैनल पर परिचर्चा हेतु समाजवादी पार्टी का पक्ष प्रस्तुत करने की आवश्यकता हो तब केवल इस अधिकृत पैनल से ही संपर्क करें, इसके अतिरिक्त कोई अन्य पार्टी का पक्ष रखने के लिए अधिकृत नहीं है। 

नवनियुक्त सपा प्रवक्ता व पूर्व आईएएस अधिकारी रमेन्द्र त्रिपाठी ने टेलीफोनिक वार्तालाप में बताया कि सपा मुखिया अखिलेश यादव ने मुझे जो जिम्मेदारी दी है उसका पूरी निष्ठा से निर्वहन करूँगा। मीडिया के माध्यम से समाजवादी विचारधारा को आगे बढ़ाने के साथ ही समाज के वंचित, शोषित लोगों की आवाज़ की बुलंद करने का काम करूंगा।

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