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के सी शर्मा 
देश की उर्जाधानी का गौरव अर्जित करने वाले सिंगरौली परिक्षेत्र में कल सत्ता- दौलत-पद के नशे में मदमस्त को बहकते देखा और टेक्नोक्रेसी की बदमिजाजी देखने को मिली।यह नजारा एक महान पर्व पर आयोजित सांस्कृतिक संध्या कार्यक्रम के मंच पर दिखा ।

छठ व्रत भगवान सूर्यदेव को समर्पित हिंदुओ का एक विशेष पर्व हैं।यह पर्व खासकर उत्तर भारत के बिहार,झारखंड,उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में महापर्व के रूप में मनाया जाता है।हिन्दू शास्त्रों के अनुसार भगवान सूर्य एक मात्र प्रत्यक्ष देवता हैं।छठ देवी भगवान सूर्यदेव की बहन है।छठ पर्व उर्जाधानी में भी बड़े धूम - धाम और हर्सोउल्लास के साथ मनाया जाता है और कल भी मनाया जा रहा था।

इस सिंगरौली क्षेत्र में भी लाखों के तादात में बिहार,झारखंड,उ प्र के पूर्वाचल के लोग निवासरत है।इस अवसर पर इस परिक्षेत्र के एक परियोजना के पार्क,बगीचे,व प्रकृति से अच्च्छादित के बीचो बीच बहने वाली प्रकृतक झील ,कल -कल करती बाताबरण को मनोरम करने वाली के तट पर 25 हजार से ज्यादा श्रद्धालु प्रति वर्ष एकत्रित होते हैं।

इन्ही श्रद्धालुओ,व्रतियों,जो हजारो के तादात में तट पर ही रात गुजारते है और सुबह का उगते सूर्य को अर्घ दे वापस घर जाते हैं।इन्ही व्रतधारियों  व श्रद्धालुओ के लिए परियोजना के सहयोग से एक सामाजिक संस्था हर वर्ष एक सांस्कृतिक संध्या व देवी जागरण का कार्यक्रम आयोजित करती हैं।

पत्रकार भी इस कार्यक्रम को आंखों देखा कवरेज करने के उद्देश्य से कार्यक्रम में शिरकत कर रहा था।जहां  चल रहे कार्यक्रम में उक्त नजारा देखने को मिला ।

इस तरह शुरू हुआ सांस्कृतिक कार्यक्रम

इस अवसर पर होने वाला कार्यक्रम तीन चरणों मे होना था। पहला चरण आधा दर्जन स्थानीय स्कूल के बच्चों के द्वारा मंच पर सांस्कृतिक कार्यक्रमो की प्रस्तुति थी, दूसरे चरण में मुख्य अतिथि,विशिष्ठ का उदबोधन, तथा कार्यक्रम के जज रूपी निर्णायक मंडल द्वरा प्रथम,द्वितीय,तृतीय, विजेताओं की घोषणा करना और उन्हें अतिथियो द्वारा पुरष्कृत किया जाना था।ततपश्चात रात भर चलने वाला भक्ति रस से पूरी रात सराबोर रखने वाला देवी जागरण शुरू होने वाला था।पहला चरण सुचारु रूप से शांति पूर्ण सम्पन्न होगया।दूसरे चरण का आधा भाग भी जिसमे मुख्य अतिथि, विशिष्ठ अतिथि का उदबोधन था वह भी होगया।सब कुछ पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ही सुचार रूप से क्रमशः आगे बढ़ रहा था।

इस तरह कुछ पल के लिए मंच पर आई अचानक तल्खी

यह वह समय था जब निर्णायक मंडल द्वारा विजेताओं की घोषणा और उन्हें अतिथियो द्वारा पुरष्कृत करना था।कि परियोजना के एक अधिकारी द्वारा एक सामाजिक,राजनैतिक कार्यकर्ता को मंच से उपेछात्मक,ढंग से जलील करने का प्रयास कर अपनी अदूरदर्शिता का परिचय दे दिया गया।फिर क्या था कुछ पल के लिए मंच का माहौल तल्ख हो उठा।परन्तु मंच पर मौजूद स्थानीय थाने के प्रभारी निरीक्षक ने वगैर देर किए स्वयं का हस्तक्षेप करते हुए स्थिति को सम्हाल लिया। यह सब भी कुछ पल ही में घटा। कोई जाना कोई नही जाना।फिर सब सामान्य होगया और फिर कार्यक्रम चलने लगा।

थोड़े देर बाद तब फिर माहौल कुछ छड़ के लिए तल्ख हो उठा ,जब कार्यक्रम के नवधनाढ्य विशिष्ठ अतिथि ने भी उक्त नेता की सरे मंच यह व्यग बोल बेआबरू कर दिया कि मंच की गरिमा आपने ऐसा कर दिया कि अब यह मंच हमारे लायक नही रहा।अपने ही परिवार के एक अनुसांगिक संगठन का पदाधिकारी मंच पर उन्हें बिना गलती के अपमानित कर उन्हें झिड़कते हुए मंच छोड़ नीचे चला जायेगा।यह तो उनके कल्पना में भी नही रहा होगा।पर यह घटित हुआ।जिसे देख नेता जी कुछ छड़ के लिए सन्न रह गए और दांतों तले अंगुली चबाने को विबस हो गए।थोड़े पल के लिए तो नेता जी की स्थिति मानो तो साप के काटे खून न निकलने जैसी हो गयी।लेकिन सार्वजनिक कार्यक्रम को ध्यान में रख अपने को उन्होंने संभाला और अपमान का घूट पी कर भी सीने पे पत्थल रख चुप हो गए।इसके बाद दूसरे चरण का कार्यक्रम सम्पन्न होगया। फिर शुरू हुआ तीसरे चरण का कार्यक्रम जो रात भर शांति पूर्वक श्रोताओं को थिरकाते, झूमाते चला।

इस तरह दिखी टेक्नोक्रेसी की बदमिजाजी

35 वर्षो के पत्रकारिता में पहली बार इस तरह किसी अधिकारी द्वारा सार्वजनिक मंच पर विवेक हीनता देख मै स्वयं थोड़े देर के लिय हतप्रभ रह गया।इस अधिकारी ने उक्त नेता जो इस क्षेत्र में 35 वर्षो से सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में अपने जीवन का महत्वपूर्ण पल समाज को दिया है।

वे वर्तमान सत्ता पार्टी के एक महत्वपूर्ण पद पर भी है।यह जानते हुए उक्त अधिकारी ने उन्हें मंच से उपेक्षित ही नही किया बल्कि अपमानित और बुरीतरह जलील भी कर दिया।

यह सुनियोजित था या नेता जी को अपमानित करने की एक सोची समझी साजिश अभी इस रहस्य से पर्दा हटना बाकी है। जिसकी बारीकी से यह पत्रकार तह में जाकर पड़ताल करने में लगा है ।जो पाठको को अगले किस्त मे सच से रूबरू कराएगा,तब दूध का दूध,पानी का पानी अपने आप हो जाएगा।

अधिकारी के इस व्यहार से वे छुब्ध हो उठे और वे भी प्रतिक्रिया में व मंच पर एकाद अन्य वरिष्ठों ने भी अधिकारी के इस आचरण पर मंच पर ही आपत्ति दर्ज कराते हुए इस अकल्पनीय ,कृत्य पर नाराजगी व्यक्त की।
नेता जी का दोष सिर्फ यह था कि वे मंच पर बगैर आमंत्रित किये चले गए थे और उन्होंने मंच संचालक से इजाजत ले यह सुझाव दे दिया कि जो बच्चे बिजेता नही है उन्हें भी सांत्वना पुरष्कार यदि सम्भव हो तो दिया जाए तो यह एक और बच्चों का मनोबल बढ़ाने में काफी कारगर सिद्ध हो सकता है।

बेचारे नेता जी का मात्र इतना ही अपराध था।

नेता जी के इस दिए गए सुझाव को अधिकारी महोदय इसे उनकी गुस्ताखी मान लिए और परियोजना को अपनी जागीर समझने वाले उक्त अधिकारी तुरन्त मंच पर तमतमाये पहुचे और माइक पकड़ते ही 25 हजार से अधिक जनता की मौजूदगी में नेताजी का बखिया उधेड़ते हुए नेता जी के 35 वर्षो की सामाजिक,राजनैतिक सेवा का जनाजा निकाल दिया।जिसकी जबरदस्त प्रतिक्रिया भी हुई और जारी भी है।

सत्ता-दौलत-पद के नशे में मदमस्त को बहकते देखा

अधिकारी के द्वारा जलालत झेल चुके नेता जी को थोड़े ही देर में अपने ही दल के एक अनुसांगिक संगठन के पदाधिकारी से भी रु बरु होना पड़ गया ,जब उनके सामाजिक राजनैतिक जीवन के सफर से भी कम उम्र का शख्स उन्हें एक बार फिर खरी खरी व जलालत भरा उपदेश देते हुए यह कह मंच छोड़ दिया कि यह मंच उसके गरिमा के अनरूप नही है।इस के बाद उसने मंच का बहिष्कार कर अपने ही अनुसांगिक राजनैतिक दल के बर्तमान जिम्मेदार पदाधिकारी का हजारो के हुजूम में अपमानित कर नेता जी को धो डाला।उसके नजर में नेता जी का दोष यह था कि वह अधिकारी के द्वारा किये गए अपमान को घुट कर पिलेते परन्तु प्रतिक्रिया नही देते,लेकिन नेता जी भी स्वभाव से स्वाभिमानी रहे है इस लिए प्रतिक्रिया दे ही दिया।

लेकिन एक अहम प्रश्न इस घटना यह उठता है कि जब सब मंच का बातावरण सामान्य होगया था तो फिर इसकी विशिष्ठ अतिथि को अचानक क्या आवश्यकता पड़ी गयी?क्या यह विशिष्ठ अतिथि के पद के गरिमा के विपरीत नही है?

यह सर्व विदित है कि जिस गांव और जमात के लोगो द्वारा वह संस्था सन्चालित है।अपमानित होने वाले नेता जी भी उसी गांव व जमात से आते हैं?,तो क्या यह कहना अतिश्योक्ति तो नही होगा कि जिस मंच और जमानत ने उन्हें सर माथे बैठा विशिष्ठ अतिथि का सम्मान दिया वे उसी जमात के एक सदस्य जो सामाजिक राजनैतिक कार्यकर्ता है सत्ता और दौलत के नशे में उसकी सार्बजनिक तौर पर इज्जत तार-तार करने की गुस्ताखी नही कर दिया?यह यक्ष प्रश्न विचारणीय तो अब खड़ा हो ही गया है?

और इस तरह इस नव धनाढ्य, ने सत्ता-दौलत-पद के नशे में मदमस्त होकर अपनी राजनैतिक हनक दिखाने का असफल प्रयास कर ही डाला।इसको लेकर फिर माहौल तल्ख होते होते बचा।

यह शख्स यहाँ अपने ही परिवार के नेता का सार्वजनिक अपमान कर ,परियोजना प्रबंधन,स्थानीय प्रशासन का अपने को हितैषी दिखा, इस मौके पर उनकी हमदर्दी बटोरने के चक्कर मे सारे मर्यादा को ताक पर रख दिया।थोड़े देर पहले उसी मंच पर नेता जी को संस्कार की पाठ पढ़ाने वाला यह शख्स कितना संस्कसरित था अब यह पाठको को बताने की आवश्यकता नही पड़ेगी,वह सब सहज ही समझ गये होंगें।

इस तरह यह शख्स आमजन में अपने को हिजहाईनेस साबित करने का प्रयास करने में अनुभवहीनता में अपना वह स्वरूप भी दिखा दिया।जिसके लिए वह चर्चित भी रहा है।जिसे यह कह सकते हैं कि जनता सब कुछ जानती हैं।यह नव धनाढ्य,सत्ता, दौलत, पद के नशे में इतना चूर था कि वह यह भी भूल गया कि नेता जी का परिवार तो उस परियोजना का विस्थापित भी है।

जिनका उस परियोजना के निर्माण में योगदान भी है।जो समिति उन्हें विशिष्ठ अतिथि बना के बुला कर मंच पर उनको सम्मान दिया।वह उसी विस्थापित परिवार के सदस्य थे।उस नेता को उसके ही सरजमी पर जिसने देश के यहा आनेवाले लोगो को पाव रखने और सर छिपाने का छत दिया अपना परिवार,भाई माना दशको से गले लगाया।अपने हकहकूक को छीनते अपनी आँखों से देखा परन्तु उफ तक नही किया।

श्रृंगी ऋषि के इस तपो भूमि के दधीचि रूपी भूमि पुत्रो में से एक का सार्वजनिक तौर पर छण भर के लिए ही सही अपमान कर नेता जी के 35 वर्षो के सामाजिक संघर्षों को झूठा आरोप उन पर मढ़ पलीता लगाने का दुस्साहस कर बैठा । इस तरह सत्ता-दौलत- पद में मदमस्त को बहकते देखा!

इस घटना कि दिन भर इलाके में प्रतिक्रिया होती रही।जितने मुह उतनी बाते होती रही है।पर इसमें यह भी सच है कि हो रही प्रतिक्रिया में निकल रहे मन के भड़ास से तो यह सहज ही अंदाजा लगाया जासकता है कि सत्ता के नाम पर दलाली करने वाले रहनुमाओं के खिलाफ वर्षो से सीने में दफन नाराजगी का जनआक्रोश में तब्दील न होजाये और अपमानित नेता कही खार खाने वालों की ढाल न बन जाये कि सम्भावना से भी इंकार नही किया जासकता है?

  • परिजन पुलिस कप्तान के दरबार, न्याय की गुहार.
  • मोटी रकम लेकर पुलिस मामले को रफा दफा करने में जूट गई है?
अंकुर पटेल 
विशेष संवाददाता,उर्जान्चल टाइगर
चौबेपुर थाना क्षेत्र के जालूपुर चौकी के समीप शनिवार को ओवर लोड बालू लदा बिना नम्बर का टैक्टर सामने से नैनो कार UP 65 AX 1405 जोरदार धक्कामार कर ड्राईवर फरार हो गया वही क्षेत्रीय नागरिको के अनुसार चालक शराब के नशे में धूत था। 
आज तक पुलिस ड्राईवर को गिरफ्तार नही कर पाई है और ना ही ट्रैक्टर मालीक के खिलाफ कोई ठोस कार्यवाही की अभी तक ड्राईवर व वाहन स्वामी दोनो पुलिस के पकड़ से बाहर है।उल्टे पुलिस मामला की लिपा पोती करने में जूट गयी है । 
कमलेश सहानी और पत्नी अर्चना निजि अस्पताल में जीवन और मौत के बीच जूझ रहा है । पुलिस को इतनी समय नही की घायलो का मेडिकल मुआयना करा कर बयान ले सके । 
शनिवार साम को जालूपुर पुलिस चौकी के समिप ट्रैक्टर ने नैनो कार को सामने से जोर दार टक्कर मार दिया। कार में सवार कमलेश सहानी( 37 ),पत्नी अर्चना सहानी (32), चाचा छेदी सहानी (55), पुत्र सुन्र्दम् (4),पुत्री नन्दनी (3) निवासी प्रहलाद घाट को तत्काल इलाज के लिये क्षेत्रीय लोगों ने पास के निजी अस्पताल में भर्ती कराये डाक्टरो ने पति व पत्नी की हालत गम्भिर बताया है। पिता अमर नाथ सहानी व परिवार के लोग अस्पताल पहुंच कर पुलिस को बताया पुत्र अपने ससुराल बिजईपुरवा गाँव थाना बलुआ के लिये साम को घर से जाने के लिये निकला था।


सुनील कुमार
एक बड़े हिन्दी समाचार चैनल की एक वीडियो क्लिप चारों तरफ तैर रही है जिसमें भाजपा के सबसे हिंसक बात करने वाले राष्ट्रीय प्रवक्ता संदीप पात्रा एक मुस्लिम नेता को जीवंत प्रसारण के बीच धमकाते हुए कह रहे हैं- अरे सुनो, अल्लाह के भक्त हो तो बैठ जाओ, वरना किसी मस्जिद का नाम बदलकर भगवान विष्णु के नाम रख दूंगा। 
अपने पैनल पर बुलाए गए किसी प्रवक्ता की कही ऐसी बातों पर टीवी चैनल को भी कोई दिक्कत नहीं रही, दूसरी तरफ उस पैनल में बैठे हुए कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के प्रवक्ताओं ने भी इस पर कुछ नहीं कहा। यह नौबत देश में खुलकर साम्प्रदायिक हिंसा भड़काने में एक मौन सहमति का कुसूरवार इन तमाम लोगों को साबित कर रही है, और चैनल, बाकी पैनलिस्ट एक मुस्लिम नेता को ऐसे हमले के सामने अकेला छोड़कर, और चुप रहकर अपना नजरिया साफ कर दे रहे हैं। कोई हैरानी नहीं है कि देश के मुस्लिम धीरे-धीरे कांग्रेस को छोड़कर जा चुके हैं, और समाजवादी पार्टी भी मुस्लिमों के बीच अपनी बुनियाद खोती जा रही है। अब सवाल राजनीति से परे मीडिया का है जो कि पिछली चौथाई सदी में इस्तेमाल में आया शब्द है, जिसके पहले तक इसके लिए प्रेस या अखबारनवीसी का इस्तेमाल होता था। 

राजनीति में तो लोगों के गंदे और हिंसक बयान चलते ही आए हैं, लेकिन अब समाचार चैनल अपने आपको मुकाबले में दूसरे चैनलों से आगे बढ़ाने के लिए ऐसी गलाकाट स्पर्धा में लगे दिखते हैं जिसमें अक्सर यह लगता है कि उस पर होती नोंक-झोंक, उस पर चलती हिंसक और साम्प्रदायिक बातचीत के पीछे एक सोची-समझी साजिश रहती है। कमअक्ल दर्शकों को बांधे रखने के तौर-तरीकों को रोज नया-नया ढूंढना आसान नहीं होता है, और ऐसे में चैनल कहीं किसी बाबा को पकड़ लाते हैं, तो कहीं किसी बेबी को, और उनसे हिंसक, सनसनीखेज, या अश्लील बातें करवाते हैं। दर्शकों के साथ दिक्कत यह है कि वे दिमाग पर जोर डालने वाली गंभीर बातों को देखना-सुनना नहीं चाहते, और वे अपनी जिंदगी का बचाखुचा वक्त ऐसी ही बकवास की छाया में सुकून से गुजार देना चाहते हैं। नतीजा यह है कि यह सिलसिला बढ़ते चल रहा है, और लोग दूसरे को पीछे छोडऩे के लिए दूसरे से अधिक नीचे गिरने के मुकाबले में लगे रहते हैं।
अब सवाल यह है कि इस देश में संवैधानिक दर्जा प्राप्त एक प्रेस कौंसिल ऑफ इंडिया है जो कि बाकी मीडिया का कामकाज तो देखता है, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का काम उसके दायरे में नहीं आता। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के कुकर्मों पर जब उसकी निगरानी रखने वाले नेशनल ब्रॉडकॉस्टर्स एसोसिएशन की अनदेखी इस तरह हावी है, तो मीडिया का यह हिस्सा देश में आग लगाने पर उतारू दिखता है। 
एक दूसरी बात यह भी है कि देश का कानून भी भड़काऊ और उकसाऊ बातों पर समय रहते कोई कार्रवाई करने में पूरी तरह बेअसर दिख रहा है क्योंकि बरसों तक, अधिकतर मामलों में दशकों तक कोई कार्रवाई नहीं होती है। और अब भारत में धीरे-धीरे माहौल यह बन रहा है कि हिंसक बातें कहना लोकतांत्रिक है। 

जिस तरह शहरों में लोग गंदी हवा को शहरी हवा मान बैठे हैं, जिस तरह कॉमेडी शो में अश्लीलता और फूहड़ता को कॉमेडी मान लिया गया है, जिस तरह सरकारी काम को लेटलतीफी वाला और रिश्वत से ही होने वाला मान लिया गया है, उसी तरह अब सार्वजनिक बहसों में हिंसा और साम्प्रदायिकता, धमकी और गालियों को लोकतांत्रिक मान लिया गया है। यह सिलसिला थमना चाहिए। (Daily Chhattisgarh)


विनोद सिंह।।सुंदरम सिंह
सिंगरौली एनसीएल निगाही परियोजना में मगलवार कि सुबह लगभग 5:00 बजे निगाही परियोजना में कार्यरत आउटसोर्सिंग कंपनी बीपीआर का डंफर डंपिंग एरिया का बर्म कमजोर होने के कारण डंफर नंबर 144 ऊपर से नीचे जा गिरा जिसमें चालक रामनारायण सिंह गोंड़ उम्र 25 वर्ष निवासी मुहेर की मौके पर ही मौत हो गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार जिस एरिया में डंपिंग का कार्य हो रहा था वहां पर प्रकाश की व्यवस्था ठीक ढंग से नहीं थी व हॉल रोड से ओबी लोड कर जा रहे डंफर के रास्ते में किसी भी प्रकार का बर्म नहीं था चालक डंफर को संभाल नहीं पाया जिसके कारण यह हादसा हुआ। खदान में दुर्घटना की सूचना मिलने के उपरांत एनसीएल सेफ्टी बोर्ड मेंबर्स और प्रबंधक के अधिकारियों ने मौके का मुआयना किया और पुलिस को सूचित कर शव का पंचनामा तैयार कराया।

इस दौरान मुहर से मृतक के पिता लक्ष्मण सिंह और उनके भाई हीरा सिंह अंजनी शाह पार्षद ठाकुर प्रसाद पूर्व पार्षद समरजीत सिंह लालता प्रसाद व मुहेर गांव के लोग भी पहुंच गए।

पुलिस की मौजूदगी में परिजनों को राहत राशि के रूप में ₹50000 नगद व 9 लाख 50 हजार का चेक भी ओबी कंपनी के द्वारा दिया गया।साथ ही आश्वासन दिया कि मृतक को खदान दुर्घटना अधिनियम के तहत अन्य मुआवजे का भुगतान भी किया जाएगा।

मृतक अपने पीछे पत्नी और तीन छोटे बच्चे छोड़ कर दुनिया से महज़ इसलिए चला गया क्योंकि एनसीएल के लिए काम कर रही ओबी कंपनीयां अपने टारगेट पूरा करने में नियम को दरकिनार कर श्रमिकों से काम लेती है,और मिनी रत्न एनसीएल भी ऐसी घटनाओं के घटित होने पर सख्त क़दम उठाने के बजाय खानापूर्ति कर अपनी जिम्मेदारी निभाने का टोटका पूरा कर लेती है। यदि ऐसा नहीं होता तो सुरक्षा के नाम पर करोड़ रुपए खर्च होने के बाद लापरवाही से होने वाले दुर्घटना पर अंकुश जरुर लगता ।


अनपरा (सोनभद्र)।।हिंडाल्को रेणुसागर पावर डिवीजन के गेट पर ग्यारह सूत्रीय मांगों को लेकर चल रहे शांतिपूर्ण धरने नौंवे दिन पुलिस के द्वारा मजदूरों को खदेड़े जाने के बाद हुए बवाल  के मामले में शनिवार की रात 53 नामजद और डेढ़ सौ अज्ञात लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया।

यह मुकदमा पुलिस ने रेणुसागर पावर डिवीजन के प्रबंधक सुरक्षा रोहित देव की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया है। ज्ञात हो की,बीते शुक्रवार रात में 27 लोगों को हिरासत में लिया गया था,जिनमें से तीन लोगों को छोड़कर बाकी 24 लोगों का चालान कर दिया गया था। 

सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने परियोजना परिसर में फोर्स तैनात कर दी है।डीएम, एसपी समेत कई अधिकारियों ने परियोजना परिसर में फ्लैग मार्च किया। परियोजना आवासीय परिसर से सटे गरबंधा गांव के लोगों को आने-जाने के लिए खोले गये निकास द्वार को ईंट,बालू सीमेंट से बंद करा दिया गया। डीएम अमित कुमार ने बताया कि पूरे घटना क्रम की जांच की जा रही है। जांच में जो दोषी पाये जायेंगे, उन्हीं के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी। निर्दोषों को किसी भी कीमत पर नहीं फंसाया जायेगा।कंपनी में लगे सीसीटीवी फुटेज को खंगाला जा रहा है। जांच के बाद ही दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जायेगी।  

एएसपी अरूण कुमार दीक्षित ने बताया कि उपद्रव के मामले में रेणुपावर डिवीजन के प्रबंधक सुरक्षा की तहरीर पर 53 लोगों के खिलाफ नामजद और सौ से 150 अज्ञात लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
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के सी शर्मा
हिंडाल्को के पावर डिविजिन रेनुसागर के आंदोलनरत श्रमिको पर हुए लाठी चार्ज और छोड़े गए आंसू गैस को लेकर अब भाजपा नेताओं में भीअब काफी नाराजगी देखी जारही हैं।अनपरा के कई भाजपा नेता व मण्डल अध्यक्ष ने भी कल रेनुसागर के मजदूरों के साथ हुई बर्बर कार्यवाही की कड़े शब्दो में निंदा करते हुए इसे अंग्रेजी हुकूमत को मात करने वाली कार्यवाही की संज्ञा दी।   

  • वरिष्ठ भाजपा नेता एवं पूर्व जिलापंचायत सदस्य जगदीश वैस्वार ने कहा है कि बिड़ला प्रबन्धन के इसारे पर कल शांति पूर्वक आपने हक हकूक के लिए पिछले 9 दिनों से आंदोलनरत निहत्थे मजदूरों पर जो बर्बर पुलिसिया कार्यवाही जिलाधिकारी के निर्देश पर हुई है।वह अत्यंत ही निंदनीय है।
  • उन्होंने इसके लिए जिलाधिकारी सोनभद्र को पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया है।उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन को प्रबन्धन के साथ श्रमिको की बातचीत करा समेस्या का समाधान निकलना चाहिए था,परन्तु यह न कर बिड़ला प्रबन्धन के इसारे पर जिला प्रशासन व पुलिस ने श्रमिको के साथ दमनात्मक कार्यवाही कर अपने क्रूर स्वरूप को पेश किया है,जिसकी जितना भर्त्सना की जाए वह कम है।
  • उन्होंने कहा कि कम्पनी प्रवंधन गाँवो में जानेवाले परम्परागत रास्तो को भी बन्द कर दे रही हैं जो 65 वर्षो से चालू थे।जिससे ग्रामीणों में अश्न्तोष और आक्रोश होना तो स्वभाविक ही है।
  • उन्होंने आगे कहा कि यदि समय रहते बिड़ला कम्पनी का प्रबन्धन मजदूरों की समस्यायों का हल नही निकलता है तो मजदूरों व स्थानीय समेस्या को लेकर सम्पूर्ण उर्जान्चल के लोग इस आंदोलन को अपना समर्थन देने को आगे आ सकते है,जिस पर यहाँ के सामाजिक और राजनैतिक कार्यकर्ता गम्भीरता से विचार रहे हैं।
  • वैस्वार ने भाजपा नेता पूर्व मण्डल अध्यक्ष व जिलापंचायत सदस्य के पति के साथ पुलिस व पीएसी के लोगो द्वारा किया गया निर्मम पिटाई और दुर्व्यहार पर अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए इस पर कड़ी आपत्ति व्यक्त की है।

भाजपा अनपरा मण्डल अध्यक्ष प्रभाशंकर मिश्रा ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा है कि घटना की पूरी जानकारी भाजपा जिलाध्यक्ष सोनभद्र को दे दी गयी है।इस घटना की पूरी जांच कराई जाएगी। इसमें जो दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कार्यवाही सुनिश्चित कराई जाएगी।
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