उर्जांचल टाईगर


भारतीय मूल की भाषा मुखर्जी पिछले साल 2019मिस इंग्‍लैंड बनी थीं। मिस इंग्‍लैंड का ताज जीतने से पहले भाषा मुखर्जी बोस्‍टन के एक अस्पताल में जूनियर डॉक्टर का काम करती थीं। वक्त की नजाकत और कोरोनावायरस के बढ़ते मामलों को देख उन्होंने अपने क्राउन को साइड में रख वापस डॉक्टर की जिम्मेदारी निभाने का फैसला किया और वह अपने पुराने साथियों के साथ स्थिति सुधारने के लिए काम कर रही हैं।भाषा मुखर्जी (Bhasha Mukherjee) कोरोनावायरस पीड़ितो का इलाज कर रही हैं। भाषा कहती हैं कि किस काम का ताज अगर आम जनता के काम न आ सकूं।


बैढ़न कार्यालय 

जिला मुख्यालय से 40 किलोमीटर दूर थाना माड़ा की टीआई अर्चना शर्मा पूरी लगन से अपने क्षेत्र के सब्जी बाजार किराना दुकान शासकीय गल्ले की दुकान पर पहुंचकर लॉक डाउन और सोशल डिस्टेन्सिंग नियमों का पालन करने की न केवल सख्त हिदायत दे रही बल्कि उसका सख़्ती के साथ पालन भी करवा रही है। 

हिदायत देती टी आई अर्चना शर्मा 

उनके क्षेत्र में बाइक पर एक व्यक्ति को ही चलने दिया जा रहा है और अनावश्यक किसी को भी घर से बाहर नहीं निकलने दिया जा रहा है। उनकी टीम भी अपने थाना प्रभारी का कदम से कदम मिलाकर साथ दे रही है।

टीम मे यह रहें शामिल

एएसआई आई बघेल भारत मीणा प्रधान आरक्षक भदोरिया।



अब्दुल रशीद
कोरोना वायरस को लेकर दुनिया भर में चिंता जारी है और लोगों में इसे लेकर काफ़ी डर पैदा हो गया है। डरना सही भी है क्योंकि ये वायरस है ही इतना ख़तरनाक। हम लोग सामूहिक रूप से ताली बजाकर या मोमबत्ती जलाने जैसा टोटका करके मन को बहलाने का टिटहरी प्रयास तो कर सकते हैं लेकिन इस कड़वी सच्चाई से मुंह ज्यादा देर तक चुराया नहीं जा सकता।  
कोरोना वायरस के फैलते संक्रमण से लड़ने वाले चिकित्सा जगत जिनकी सुरक्षा प्रथम प्राथमिकता होनी चाहिए उनके विषय पर चर्चा ताली थाली की गूंज में गुम हो गई,और लगभग पूरे देश में डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के लिए सुरक्षा किट की कमी है। जगह-जगह बिना सुरक्षा किट के मरीजों को देखते रहने की वजह से खुद डॉक्टरों के कोविड-19 की चपेट में आने की खबरें आ रही हैं।उन्हें वायरस का संवाहक होने के डर से किराये के घरों से निकाला जाने लगा है। कुछ जगहों से डॉक्टरों पर हमले और उनके साथ मारपीट की खबरें आई हैं। उनकी समस्या जिसका अंत होने का नाम ही नहीं ले रहा। लेकिन यह एक कड़वी सच्चाई है के मोमबत्ती जला कर अंधकार से प्रकाश में आने के दावों को विस्तार से प्रस्तुत करने वाले मेनस्ट्रीम के बहसबाज़ मीडिया में डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की समस्या सब दिखाई ही नहीं देती।

कोरोना वायरस के खिलाफ ताली और थालियां बज गई, लाइटें ऑफ कर  बालकॉनियों में मोमबत्ती, दीया, टॉर्च या मोबाइल की फ्लैश लाइटों से रोशनी की गई,पटाखे फोड़े गए और अतिउत्साह में हवाई फायरिंग का टोटका किया गया।इस विषम परिस्थिति में तर्क-वितर्क करने का कोई मतलब ही नहीं क्योंकि खुशफहमी पाले लोग को तर्क से फर्क नहीं पड़ता।

मगर जो लोग अब भी वास्तविकता की दुनिया में जी रहे हैं, उन्हें इससे परेशानी जरूर होगी क्योंकि मेडिकल विज्ञान से जुड़ी इस  समस्या के समाधान को ढूंढने के बजाय हम टोटकों के सहारे इस महामारी से जंग जीत नहीं सकते।

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