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ग़ीर ए खाकसार
नयी दिल्ली। लोककला एवं संस्कृति में महत्वपूर्ण योगदान के लिए 'दुनिया इन दिनों' पत्रिका द्वारा दिया जाने वाला प्रसिद्ध 'वारियर एल्विन सम्मान' वर्ष 2018 के लिए पश्चिम बंगाल की लोक-संस्कृति का अभिन्न अंग 'नचनिया' की प्रमुख हस्ताक्षर पोस्तोबाला को दिये जाने की घोषणा की गयी है। उन्हें इस सम्मान से 24 नवंबर को पुरुलिया स्थित अयोध्या पहाड़, बाघमुंडी में आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम में नवाजा जाएगा। 

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल की लोक-संस्कृति में 'नचनिया' की एक खास जगह है। नचनी कलाकारों में पोस्तोबाला अपनी अद्वितीय प्रतिभा के कारण जानी जाती हैं। उनकी मां विमला देवी भी इस विधा की ख्यात कलाकार रही हैं। इस कला के संरक्षण की दिशा में भी पोस्तोबाला ने काफी काम किया है। साथ ही नचनी कलाकारों की बेहतरी के लिए भी उनका प्रयास सराहनीय रहा है। 'मानभूम संस्कृति एवं नचनी उन्नयन समिति' की संपादक, मुख्य कार्यकर्ता पोस्तोबाला को पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा लोक-संस्कृति के लिए दिया जाने वाला सर्वोच्च 'लालन पुरस्कार' भी प्राप्त हो चुका है। 

'दुनिया इन दिनों' पत्रिका द्वारा पोस्तोबाला को 'वारियर एल्विन सम्मान' ज्यूरी सदस्य व्र प्रधान संपादक डॉ. सुधीर सक्सेना, कवि-चित्रकार शुभाशीष भादुड़ी, पत्रकार-कवि अभिमन्यु महतो एवं अनुवादक-कवयित्री अमृता बेरा के अनुमोदन पर देने का निर्णय लिया गया।
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सोमवार को उच्चतम न्यायालय ने सीबीआई के निदेशक आलोक कुमार वर्मा से कहा कि उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों के बारे में सीवीसी की जांच रिपोर्ट पर जल्द से जल्द आज ही अपना जवाब दाखिल करें। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि इस मामले के लिये मंगलवार को निर्धारित सुनवाई नहीं टाली जायेगी।

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ को वर्मा के वकील गोपाल शंकरनारायणन ने सूचित किया कि सीबीआई निदेशक रजिस्ट्री में अपना जवाब दाखिल नहीं कर सके हैं।
पीठ ने कहा, ‘‘हम तारीख आगे नहीं बढ़ायेंगे। आप जल्द से जल्द अपना जवाब दाखिल करें। हमें भी जवाब पढ़ना होगा।’’ 
इस पर गोपाल ने कहा कि आज दिन में ही जवाब दाखिल कर दिया जयेगा।

सिंगरौली- मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए धुआंधार प्रचार और प्रसार में राजनैतिक पार्टियां कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह रविवार को विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रतियाशियों को जीत दिलाने के लिए देश के100 अतिपिछड़े गांव में तीसरे स्थान पर पहुंच चुके और प्रदूषण के शिकार सिंगरौली की जनता को संबोधित करने बैढ़न के रामलीला मैदान में आयोजित सभा में पहुंचे। उन्होंने अपने आधे घन्टे के भाषण में लगभग 16 मिनट तक कांग्रेस को कोसा जबकि सिंगरौली की विकास गाथा महज़ डेढ़ में ही सिमट गई।

भाषण के दौरान प्रत्याशी खड़े रहें

भाजपा अध्यक्ष द्वारा दिए जा रहे भाषण के दौरान जिले के तीनों प्रत्याशी निवर्तमान विधायक रामलल्लू वैश्य, देवसर प्रत्याशी सुभाष वर्मा और चितरंगी प्रत्याशी अमर सिंह मंच पर खड़े रहें। इस दौरान प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ,सीधी-सिंगरोली सांसद पाठक, नगर पालिक निगम सिंगरौली की महापौर प्रेमवती खैरवार,प्रदेश कार्यसमिति सदस्य गिरीश द्विवेदी,पूर्व विधायक राजेन्द्र मेश्राम, पूर्व सीडा उपाध्यक्ष नरेश शाह, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष राधा सिंह,सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहें।

कांग्रेस झूठ का एटीएम है और भारतीय जनता पार्टी विकास का। 

कांग्रेस झूठ का एटीएम है और भारतीय जनता पार्टी विकास का। कांग्रेस को आप अपनी समस्या बताइए उसमें से झूठे वादे बाहर आने लगेंगे और भाजपा को आप अपनी समस्या बताइए तो विकास शुरू हो जाएगा।कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल बाबा प्रदेश में इधर -उधर घूम रहे हैं लेकिन किसी को दिखाई नहीं दे रहे हैं, उन्हें देखने के लिए दूरबीन लगाना पड़ेगा। पार्टी का अभी तक नेता तय नहीं है पर राहुल गांधी ,कमलनाथ व दिग्विजय सिंह प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनाने की बात कर रहे हैं। कांग्रेसी अपना कार्यकाल भूल गए जब मध्यप्रदेश को बीमारू राज्य बनाने के साथ संसाधन विहीन कर दिए थे।

सिंगरौली की समस्याओं  पर रहे मौन

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने महज़ डेढ़ मिनट में सिंगरौली की विकास गाथा समेटते हुए कहा की सिंगरौली को जिला बनाया,विकास के लिए उद्द्योग की स्थापना कराया,किसान के लिए सिंचाई सुविधा बढ़ाया,24 घंटे जिले को बिजली उपलब्ध कराया, जिले को रेलवे लाइन से जोड़ने का कार्य किया,लेकिन सिंगरौली के युवाओं में बढती बेरोजगारी,सीधी सिंगरौली के जिले को जोड़ने वाली जर्जर सड़क और बढ़ते प्रदूषण पर आधे घंटे के संबोधन में एक शब्द  भी नहीं बोले।

मध्यप्रदेश को समृद्ध बनाने बीजेपी प्रत्यासी को दें वोट- प्रदेश अध्यक्ष

इससे पूर्व साथ मे आये प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि 28 नवम्बर पूर्णाहुति का दिन है और लोकतंत्र के इस यज्ञ में अपनी आहुति देते वक्त क्षेत्र, जिला ,प्रदेश व देश के बारे में जरूर सोचें। बकौल सिंह कांग्रेस के जमाने मे मध्यप्रदेश को गड्ढो का प्रदेश कहते थे। श्री सिंह ने भी बिजली, सड़क व अन्य संसाधनों का विवरण दिया और जनता से अपील की कि मध्यप्रदेश को समृद्ध प्रदेश बनाने 28 नवम्बर को बीजेपी के सभी प्रत्यासियों को वोट करें।
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  • शक्तिनगर में चल रहे संगीतमयी श्री राम कथा के दूसरे दिन कथा स्थल परपहुचे,राज्य सभा सदस्य रामशकल 
  • नदारत रहे इलाके के भाजपाई,
  • भाजपाईयों का दूरी बनाए रखना बना चर्चा का विषय 

शक्तिनगर(सोनभद्र)।।जनपद सोनभद्र के ओद्योगिक क्षेत्र उर्जान्चल के शक्तिनगर में कल से संगीतमयी श्री राम कथा शुरू हुई है।कथा का आज दूसरा दिन था।

आज दूसरे दिन सोनभद्र जिले के वरिष्ठ भाजपा नेता एवं महामहिम राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत इस क्षेत्र के पूर्व सांसद और भाजपा कार्यकर्ताओं के चहेते राज्य सभा के सदस्य राम शकल जी कुछ पल के लिए आज कथा स्थल पर पहुचे।जहा आयोजको द्वारा उनकी अगुवानी की गई और उनका स्वागत किया गया।

राज्य सभा सदस्य सीमावर्ती राज्य म प्र के पड़ोसी जिले के सिंगरौली जिले में विधान सभा चुनाव में प्रचार के लिए जारहे थे।शक्तिनगर के उनके अल्प समय के प्रवास में अगुवानी वाले जगह से श्री राम कथा स्थल तक स्थानीय भाजपाईयों का नदारत रहना आज श्री राम कथा से ज्यादा रामशकल के कार्यक्रम से भाजपाईयो का दूरी बनाए रखना चर्चा का विषय बन गया।

जितने लोग उतनी अटकलें अपने अपने तरीके से आकी जानेलगी और व्यक्त होने लगी।जो देर रात तक लोगो मे जारी था।मध्य प्रदेश में चुनाव प्रचार के लिए सड़क मार्ग से जाते समय सांसद रामशकल जी की आगवानी खड़िया बाजार के मोड़ पर कुछ आयोजक मण्डल के लोगो द्वारा की गई।

इसके बाद वे कुछ देर के लिए खड़िया बाजार में आयोजक मण्डल के मुख्यकर्ताधर्ता के आवास पर रुके।यहाँ कुछ देर रुकने के बाद संसद रामशकल कथा स्थल पर पहुचे और लगभग आधा घण्टा कथा स्थल पर रुकने के बाद वे मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले के लिए प्रस्थान कर गए।इस दौरान अगुवानी से लेकर कथा स्थल तक किसी भी भाजपाई का दिखाई न पड़ना सब को हैरत में डाल दिया।क्योकि सांसद राम शकल सभी भाजपाईयो के दिल अजीज है।फिर भी भाजपाईयो का नदारत रहना ही नही बल्कि कार्यक्रम से दूरी बनाए रखना सब को हैरत में डाल दिया।जबकि देखने को मिला कि शक्तिनगर परिक्षेत्र के अधिकांश प्रमुख भाजपा नेता इलाके में मौजूद दिखे।

सबसे बड़े आश्चर्य की बात यह रही कि जब शक्तिनगर के पी डव्लू डी मोड़ के मैदान में चल रहे श्री राम कथा स्थल पर सांसद पहुचे तो कथा स्थल से मात्र थोड़े ही दूरी पर इसी मोड़ के एक दुकान पर इस क्षेत्र के भाजपा के दर्जनों प्रमुख नेता कार्यकर्ता आपस मे गुफ्तगू करते हुए बैठे दिखे। कथा स्थल से थोड़ी ही दूरी पर बैठे भाजपाईयो का सांसद से मिलने भी न जाना कथा से ज्यादा भाजपाईयो की यह दूरी बनाए रखना स्थानीय लोगों में चर्चा का विषय बन गया।

जब हमारे संवाददाता ने इस सम्बंध में भाजपा के एक जिम्मेदार पदाधिकारी से इसके बारे में कारणों की जानकारी चाही तो वे बहुत देर तक कुरेदने के बाद अपना नाम न छापने के शर्त पर जो कारण बताया वह आश्यचर्जनक और चौकाने वाला था।उन्होंने कहा कि भाजपाईयो को न तो जिले के संगठन और नही संसद द्वारा सूचना आज यहा आने की भेजी गई थी।न ही आयोजको द्वाराही किसी भाजपाई को कोईं सूचना उनके आने की दी गयी थी।जिसके चलते भाजपाई नही पहुच सके।

यह कारण सुनते ही इस संवाददाता का वह उल्लेख सच होता दिखा जो इस तरह के कार्यक्रमो के आड़ में राजनैतिक हनक दिखाने की मची है होड़,के शीर्षक से चार दिन पहले ही एक स्टोरी प्रसारित और प्रकाषित हुई थी। जिस पर जबरजस्त प्रतिक्रिया भी हुई थी।

इसके साथ ही गत दिनों शक्तिनगर में एक पावन पर्व के अवसर पर आयोजित सांस्कृतिक संध्या के मंच पर भाजपा नेता के साथ एक घटित घटना का भी आयोजक मण्डल के किसी खास शख्स से जुड़ा होना भी कई लोग दबी जुबान से कहते भी सुने गए। इस तरह यह श्री राम कथा भाजपाईयो को जोड़ने के बजाय तोड़ कर रख दिया है,जिसका चुनाव व संगठन के कार्यो पर भी प्रभाव भविष्य में इस क्षेत्र में पड़ने की संभावना से इनकार नही किया जासकता है।

इसके साथ ही इसका दूसरा रोचक और गौर करने वाला पहलू यह था कि जब सांसद कथा स्थल पर पहुच गए,तब आयोजको द्वारा सोसल मीडिया पर यह अपील की जारही थी कि राज्य सभा सदस्य राम शकल जी कथा स्थल पर पहुच गए हैं आप सभी भारी संख्या में कथा स्थल पर पहुच कथा श्रवण करे।पर सांसद के प्रस्थान तक तो जस की तस ही स्थित बनी रही।हा उनके प्रस्थान के बाद थोड़े लोग अवश्य पंडाल में कथा श्रवण करने पहुचे। लेकिन लाखो खर्च कर श्रोताओं और श्रद्धालुओ को बनाया गया भव्य पंडाल का अधिकांश हिस्सा खाली ही पड़ा रहा।हा यह सच है कि प्रथम दिन से आज दूसरे दिन भीड़ जो कल शतक नही छू सकी थी उसे आज अवश्य छूते हुए किसी तरह पार जरूर करती दिखी।

आज सांसद राम शकल जी के यहाँ पहुचने पर आयोजक मंडल के मुख्य पदाधिकारी सन्नी शरण जी के नेतृत्व में आयोजको ने सांसद रामशकल जी का खड़िया मोड़ पर अगुवानी की और उनका स्वागत किया।इसके बाद थोड़े देर खड़िया बाजार में आयोजक महोदय के आवास पर उनके चहेतों के बीच गुजारते हुए सांसद कथा स्थल पर पहुचे।इस तरह सांसद का बड़े ही चालाकी से पूर्व से ही सुनियोजित कार्यक्रम को बनाया गया था।इसी के तहत राजनैतिक हनक बनाने के खेल की बड़ी ही सही स्क्रिप्ट पहले ही लिखी गयी थी।पर अनुभवहीन और अति महत्वाकांक्षा पर भाजपाईयो का सांसद से दूरी बनाए रखना इस पर पानी फेरते हुए कई विचारणीय सवाल खड़ा कर दिया है।जिसकी झलक आनेवाले दिनों में आम जन को देखने को अवश्य मिलेगा।

आज आयोजन समिति के सन्नी शरण जी,श्रवण कुमार जी, अजित तिवारी जी,आर के उपाध्या,प्रशांत श्रीवास्तव, आदि के साथ दर्जनों आयोजन समिति के सदस्य पूरे कार्यक्रम में प्रमुख तौर पर व्यवस्था का देख रेख करते देखे गए।

आज की कथा भी कल की तरह पूरी तरह पूजा अर्चना के साथ शुरू होकर देर रात 8 बजे तक चलती रही, जो इसके बाद आरती और प्रसाद वितरण के बाद समाप्त हुई।कल कथा फिर 3 बजे से शुरू होकर शाम 7 बजे तक चलेगी।यह अलग बात है कि श्रोता तो जितने अपेक्षित थे उतने नही पहुच पा रहे हैं ,फिर भी आयोजक पूरे जोश खरोश और उत्साह के साथ कार्यक्रम सम्पन्न कराने में तन्मयता से लगे हुए है।

इस खबर पर ऋषभ राय कि प्रतिक्रिया बेदम और बेजान

आपकी जानकारी के लिये माननीय सांसद  राम शकल शक्तिनगर में आयोजित श्री राम कथा के सरंक्षक है। कथा स्थल पर आने के लिये किसी के निमंत्रण की आवश्यकता नही है । आज कथा के दूसरे दिन माननीय सांसद जी लगभग दो घंटे और लगभग सारे भाजपाई एवम संगठन के लोग कथा समाप्ती तक मौजूद रहे।श्री राम कथा के दौरान लगभग सारा पंडाल श्रोताओं से खचाखच भरा हुवा था । यदि भाजपा के लोग नदारत थे तो ये लोग किस संगठन के हैं अनिल सिंघ गौतम, प्रशांत श्रीवास्तव,वेद प्रकाश मिश्रा,पुनीत कपूर,वीरेन्द्र पाठक, लालचंद  गुप्ता, अशोक अग्रहरि , जयदीप कश्यप, देवेंद्र कुमार, गुप्तेश्वर सोनी,देवी प्रसन्न , अमरजीत, भारत भूषण,रवि चंद्र दूबे,गणेश सिंघ,आशीष चौबे,चंदन सिंघ,श्रवण,अनुराग,सन्नी शरण,हेमन्त मिश्रा,प्रधानाचार्य राजेंद्र सिंघ ,बबलू जायसवाल,पवन उपाध्याय,छोटू कुशवाहा,रवि कुशवाहा,अनिल चतुर्वेदी,संजय पांडेय,उदय पांडेय,संजीव जायसवाल,लल्लन तिवारी,विजय गुप्ता,श्रवन पटेल,कौशल पटेल इत्यादि।

के.सी. शर्मा(पत्रकार)

प्रतिक्रिया पर के.सी. शर्मा ने कहा,राम के नाम पर रोटी सेकते रहिये और राजनैतिक हनक बनाते रहिये!

ऋषभ राय आँखों देखी लिखी स्टोरी में आपके सफाई की कोईं आवश्यकता नही है।वैसे आप पहले अपना परिचय तो दीजिये। नाम लिखने से उपस्थिति नही होती उसके लिए फ़ोटो और वीडयो की आवश्यकता होती है।जो सब सच दिखाती हैं। जो मेरे पास मौजूद हैं। जहां तक लिखे गए नमो की बात है।उनमें आधे से अधिक भाजपाई है ही नही।अब रही बात भाजपा और शक्तिनगर का तो आपको मैं बता दूं कि हमारे और आपके जानकारी में बहुत फर्क रहेगा।क्योकी आप भाजपा को जन्म होने के बाद से जानते होंगे,परन्तु हम तो तब से जानते हैं जब कमल खिलने से पहले दीपक जला करता था।अब रही बात शक्तिनगर की तो इसके जन्म से पहले से हम जानते हैं शक्तिनगर को,पर शक्तिनगर के जन्म के पहले यहां क्या था आपको पता तक नही होगा। जहां तक बात राम शकल जी की है तो हम वे राजनीति में सक्रिय नही थे प्रचारक थे, तब से संगठन में काम करते रहे हैं। यह उन्ही से पता कर लीजिएगा।

आपको यह भी बता दू, तब सोनभद्र का जन्म नही हुआ था।आपका जन्म तब तक होचुका था या नही हमे पता नही।पर अब आपको बता दूं मैं शक्तिनगर में भाजपा से उस वक्त जुड़ा जब इसका जन्म हुआ था।तब तीन लोग ही शुरू में पार्टी का काम खड़ा करने का संकल्प लिए थे ।उनमें से एक मैं हूँ।एक दुनिया मे नही है, एक अब आपके पार्टी में नही है।

भाजपा के प्रथम राष्ट्रीय सम्मेलन जो बॉम्बे में हुआ था उसको भी हम ही यहा से शिरकत करने गए थे।और आपको यह भी बता दू शक्तिनगर के जन्म के बाद हमारे द्वारा चलाये जा रहे आन्दोलम में इसी शक्तिनगर से दो दो बार देश के बर्तमान गृह मंत्री माननीय राजनाथ सिंह धारा 144 तोड़ गिरफ्तारी भी दे चुके हैं, जिसका शक्तिनगर थाने में लिखित रिकार्ड है जा के पहले देख लीजिए, इसके बाद हमे दिया दिखाईयेगा।

आज पेड़ में फल लग चुका है और पक चुका है उसे तोड़िये और खाइए।लेकिन पेड़ लगा के उसे खाद पानी देते और सींचते हुए उसकी सुरक्षा कर फल देने लायक बना के जो खुद फल खाता होगा तो उसे उस फल देने वाले वृक्ष के महत्ता का भी पता होता है।
हमको आईना दिखाने की आवश्यकता नही है, नही जनता को दोनो सब जानते हैं।राम के नाम पर रोटी सेकते रहिये और राजनैतिक हनक बनाते रहिये,जनता सब जानती है और संगठन भी सब जनता है।इतना सफाई देने से भी काम नही चलेगा।ध्यान रहे फल खाने के चक्कर मे पेड़ की डाली ही मत तोड़ दीजिएगा कि कही पेड़ ही न मुर्झा के सुख जाए।इसीलिए मेरा यह लेख सब को आईना दिखा रहा है और आगे भी दिखता रहेगा। हम बहुत जल्द फिर नए सवालों के साथ नई ताजी स्टोरी के साथ मिलेंगे। तब और मिर्ची लग सकती है।
इसी लिए हमे कौरव पांडव से कुछ भी लेना देना नही है, हम तो सिर्फ यह देख रहे हैं कि कैसे हस्तिनापुर और उसकी सीमाएं सुरक्षित रहे! मेरी प्रतिवद्धता सिर्फ हस्तिनापुर के प्रति है, न कि कौरव पांडवो के प्रति।जिस पर मेरी पैनी नजर रहती है और जब तक जीवित है रहेगी।

यह सफाई देना और नाम गिनाना यह आप के बेचैनी का प्रतीक है,और राजनैतिक हनक का दरकती हुई जमीन पर लड़खड़ाते हुए पैर के हिलने का पहला यहसास है।हम तो अपनी सरजमी पर है।पर अपने पैरों को पहले लखड़ाने से रोकिए।अभी तो यह पिक्चर का टेलर है, पूरी पिक्चर तो देखना अभी बाकी हैं।देखते रहिये आगे क्या क्या होता है?
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सिंगरौली।। जिला कलेक्टर अनुराग चौधरी ने कोयला परिवहन करने वाले वाहनों को दोपहर 3:00 बजे से रात्रि 9:00 बजे तक रोड पर नहीं चलने का आदेश दिया है।

ज्ञात हो की "उर्जांचल टाइगर" ने 2 दिन पूर्व वीडियो न्यूज का प्रकाशन कर इस समस्या को प्रशासन तक पहुंचाया था, जिसमें जयंत खदान के पास घंटों तक कोयला वाहनों के द्वारा जाम लगने से आम जनता के हलकान के साथ प्रशासन की परेशानियों को भी ख़बर के माध्यम से प्रकाश में लाया था। 
ख़बर चलने के बाद कलेक्टर सिंगरौली के द्वारा दिए गए आदेश से जनता को राहत मिली है,इस जनहित निर्णय के लिए आम जनता के साथ उर्जांचल टाइगर ने भी जिला कलेक्टर के प्रति आभार व्यक्त किया है।


लित गर्ग
‘दुर्घटना’ एक ऐसा शब्द है जिसे पढ़ते ही कुछ दृश्य आँखों के सामने आ जाते हैं, जो भयावह होते हैं, त्रासद होते हैं, डरावने होते हैं। किस तरह लापरवाही एवं महंगी गाड़ियों को सड़कों पर तेज रफ्तार में चलाना एक फैशन बनता जा रहा है, उसकी ताजी एवं भयावह निष्पत्ति की दुर्घटना दिल्ली के मीराबाग इलाके में बुधवार को देखने को मिली, जब एक बेलगाम एसयूवी कार ने कई वाहनों को टक्कर मारी और नौ लोगों को कुचल दिया। इसमें एक लड़की की जान चली गई। यह घटना राजधानी में आए दिन होने वाले सड़क हादसों की एक कड़ी भर है। सच यह है कि ऐसे बेलगाम वाहनों की वजह से सड़कें अब पूरी तरह असुरक्षित हो चुकी हैं। सड़क पर तेज गति से चलते वाहन एक तरह से हत्या के हथियार होते जा रहे हैं। 

यह विडम्बनापूर्ण है कि हर रोज ऐसी दुर्घटनाओं और उनके भयावह नतीजों की खबरें आम होने के बावजूद बाकी वाहनों के मालिक या चालक कोई सबक नहीं लेते। सड़क पर दौड़ती गाड़ी मामूली गलती से भी न केवल दूसरों की जान ले सकती है, बल्कि खुद चालक और उसमें बैठे लोगों की जिंदगी भी खत्म हो सकती है। पर लगता है कि सड़कों पर बेलगाम गाड़ी चलाना कुछ लोगों के लिए मौज-मस्ती एवं शौक का मामला होता है लेकिन यह कैसी मौज-मस्ती है जो कई जिन्दगियां तबाह कर देती है। ऐसी दुर्घटनाओं को लेकर आम आदमी में संवेदनहीनता की काली छाया का पसरना त्रासद है और इससे भी बड़ी त्रासदी सरकार की आंखों पर काली पट्टी का बंधना है। हर स्थिति में मनुष्य जीवन ही दांव पर लग रहा है। इन बढ़ती दुर्घटनाओं की नृशंस चुनौतियों का क्या अंत है? बहुत कठिन है दुर्घटनाओं की उफनती नदी में जीवनरूपी नौका को सही दिशा में ले चलना और मुकाम तक पहुंचाना, यह चुनौती सरकार के सम्मुख तो है ही, आम जनता भी इससे बच नहीं सकती। 

लोगों की समृद्धि एवं सम्पन्नता ने जीवन को एक मजाक बना दिया है, मगर ऐसा लगता है कि यातायात नियमों का पालन करना तथाकथित धनाढ्य लोगों के लिये दोयम दर्जे का काम हैं। इस मानसिकता वाले लोग दुर्घटनाएं करना अपनी शान समझते हैं। तभी सुप्रीम कोर्ट भी तल्ख टिप्पणी कर चुका है कि ड्राइविंग लाइसेंस किसी को मार डालने के लिए नहीं दिए जाते। सचाई यह भी हैं कि नियमों के उल्लंघन की एवज में पुलिस की पकड़ में आने वाले लोग बिना झिझक जुर्माना चुकाकर अपनी गलती के असर को खत्म हुआ मान लेते हैं। बेलगाम वाहन चलाने के पीछे एक बड़ी वजह यह भी है कि हादसों से संबंधित कानूनी प्रावधान अभी इस कदर कमजोर हैं कि किसी की लापरवाही की वजह से दो-चार या ज्यादा लोगों की जान चली जाती है और आरोपी को कई बार थाने से ही छोड़ दिया जाता है। जाहिर है, जब तक सड़क पर वाहन चलाने को लेकर नियम-कायदों पर अमल के मामले में सख्त और असर डालने वाले कानूनी प्रावधान तय नहीं किए जायेंगे, तब तक सड़क पर बेलगाम होकर गाड़ी चलाने वाले लोगों के भीतर जिम्मेदारी नहीं पैदा की जा सकेगी।

सड़क दुर्घटनाओं ने कहर बरपा रखा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने 2009 में सड़क सुरक्षा पर अपनी पहली वैश्विक स्थिति रिपोर्ट में सड़क दुर्घटनाओं की दुनिया भर में ‘सबसे बड़े कातिल’ के रूप में पहचान की थी। भारत में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में 78.7 प्रतिशत हादसे चालकों की लापरवाही के कारण होते हैं। जिनमें इन नव धनाढ्य लोगों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं की संख्या भी खतरनाक स्तर तक बढ़ रही है। वैसे एक प्रमुख वजह शराब व अन्य मादक पदार्थों का सेवन कर वाहन चलाना है। ‘कम्यूनिटी अगेन्स्ट ड्रंकन ड्राइव’ (कैड) द्वारा सितंबर से दिसंबर 2017 के बीच कराए गए ताजा सर्वे में यह बात सामने आई है कि दिल्ली-एनसीआर के लगभग 55.6 प्रतिशत ड्राइवर शराब पीकर गाड़ी चलाते हैं। राजमार्गों को तेज रफ्तार वाले वाहनों के अनुकूल बनाने पर जितना जोर दिया जाता है उतना जोर फौरन आपातकालीन सेवाएं उपलब्ध कराने पर दिया जाता तो स्थिति कुछ और होती।

विडंबना यह है कि जहां हमें पश्चिमी देशों से कुछ सीखना चाहिए वहां हम आंखें मूंद लेते हैं और पश्चिम की जिन चीजों की हमें जरूरत नहीं है उन्हें सिर्फ इसलिए अपना रहे हैं कि हम भी आधुनिक कहला सकें। एक आकलन के मुताबिक आपराधिक घटनाओं की तुलना में पांच गुना अधिक लोगों की मौत सड़क हादसों में होती है। कहीं बदहाल सड़कों के कारण तो कहीं अधिक सुविधापूर्ण अत्याधुनिक चिकनी सड़कों पर तेज रफ्तार अनियंत्रित वाहनों के कारण ये हादसे होते हैं। दुनिया भर में सड़क हादसों में बारह लाख लोगों की प्रतिवर्ष मौत हो जाती है। इन हादसों से करीब पांच करोड़ लोग प्रभावित होते हैं। बात केवल राजमार्गों की ही नहीं है, गांवों, शहरों एवं महानगरों में सड़क हादसों पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिये हैं। सरकार की नाकामी इसमें प्रमुख है। हाल ही में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल देश भर में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में रोजाना चार सौ से ज्यादा लोगों की जान चली गई। इन हादसों में मारे जाने वाले लोग आमतौर पर गाड़ियों में बैठे चालकों की बेहद मामूली लापरवाही के शिकार हो जाते हैं।। सड़क पर वाहन चलाने से संबंधित नियम कायदों का सख्ती और सावधानी से पालन करके गाड़ी चलाने वाला न केवल दूसरे बहुत सारे लोगों का सफर सुरक्षित बना सकता है, बल्कि अपने जिंदा रहने को लेकर भी निश्चिंत रह सकता है। 

ट्रैफिक व्यवस्था कुछ अंशों मंे महानगरों को छोड़कर कहीं पर भी पर्याप्त व प्रभावी नहीं है। पुलिस ”व्यक्ति“ की सुरक्षा में तैनात रहती है ”जनता“ की सुरक्षा में नहीं। हजारों वाहन प्रतिमास सड़कों पर नए आ रहे हैं, भीड़ बढ़ रही है, रोज किसी न किसी को निगलनेवाली ”रेड लाइनें“ बढ़ रही हंै। दुर्घटना में मरने वालांे की तो गिनती हो जाती है पर वाहनों से निकलने वाले जहरीले धुएँ से प्रतिदिन मौत की ओर बढ़ने वालों की गिनती असंख्य है। वाहनों में सुधार हो रहा है पर सड़कों और चालकों में कोई सुधार नहीं। सन् 2020 तक वाहनों का उत्पादन और मांग दोगुने हो जाएंगे। सड़कें दुगुनी नहीं होंगी। रेलों की पटरियां दुगुनी नहीं होंगी। अतः यातायात-अनुशासन बहुत जरूरी है।

नया भारत निर्मित करने, औद्योगिक विकास और पूंजी निवेश के लिए सरकार सभी प्रकार के गति-अवरोधक हटा रही है। लगता है सड़कों पर भी गति अवरोध हटा रही है। कोई चाहिए जो नियमों की सख्ती से पालना करवा के निर्दोषों को मौत के मुंह से बचा सके। सड़क दुर्घटनाओं पर नियंत्रण के लिये जरूरी है कि सड़क सुरक्षा के लिये व्यापक कानूनी ढांचे को बनाना। 1988 में बने मोटर वाहन अधिनियम का व्यावहारिकता से परे होना भी दुर्घटनाओं का बड़ा कारण है। पिछले तीन दशकों में सड़क परिवहन में आए बदलाव के अनुरूप मोटर अधिनियम में व्यापक बदलाव की दरकार है। न मौजूदा न पूर्ववर्ती सरकारें सड़क दुर्घटनाओं को नियंत्रित करने की दिशा में गंभीर नजर्र आइं। इसी का नतीजा है कि कोई सुस्पष्ट प्रणाली हमारे सामने नहीं है। अगर सरकार नए वाहनों को लाइसेंस देना बंद नहीं कर सकती तो कम से कम राजमार्गों पर हर चालीस-पचास किलोमीटर की दूरी पर एक ट्रॉमा सेंटर तो खोल ही सकती है ताकि इन हादसों के शिकार लोगों को समय पर प्राथमिक उपचार मिल सके। 

सड़क हादसों में मरने वालों की बढ़ती संख्या ने आज मानो एक महामारी का रूप ले लिया है। इस बारे में राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकडे दिल दहलाने वाले हैं। पिछले साल सड़क दुर्घटनाओं में औसतन हर घंटे सोलह लोग मारे गए। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनिया के अट्ठाईस देशों में ही सड़क हादसों पर नियंत्रण की दृष्टि से बनाए गए कानूनों का कड़ाई से पालन होता है। बात चाहे पब की हो या रेल की, प्रदूषण की हो या खाद्य पदार्थों में मिलावट की-हमें हादसों की स्थितियों पर नियंत्रण के ठोस उपाय करने ही होंगे। तेजी से बढ़ता हादसों एवं लापरवाही का हिंसक एवं डरावना दौर किसी एक प्रान्त या व्यक्ति का दर्द नहीं रहा। इसने हर भारतीय दिल को जख्मी किया है। इंसानों के जीवन पर मंडरा रहे मौत के तरह-तरह की डरावने हादसों एवं दुर्घटनाओं पर काबू पाने के लिये प्रतीक्षा नहीं, प्रक्रिया आवश्यक है। तेज रफ्तार से वाहन दौड़ाते वाले लोग सड़क के किनारे लगे बोर्ड़ पर लिखे वाक्य ‘दुर्घटना से देर भली’ पढ़ते जरूर हैं, किन्तु देर उन्हें मान्य नहीं है, दुर्घटना भले ही हो जाए।

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