रचनाकार को समाजोन्मुख होना चाहिए-डा0 सूर्य कुमार

एम.अफसर खां "सागर"
    @ उर्जांचल टाईगर 
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चन्दौली। जनपद के मिनी महानगर मुगलसराय में सोमवार को साहित्यिक संघ एवं संस्कार भारती के संयुक्त तत्वाधान में पुस्तक पथ प्रकाशन समूह द्वारा वरिष्ठ रचनाकार रामकृष्ण विनायक सहस्त्र बुद्धे के कविता संग्रह ‘शब्द मृत्युंजय है’ और ‘पथरीली जमीन में दूब’ का लोकापर्ण समारोह अग्रवाल सेवा संस्थान में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का प्रारम्भ अतिथियों द्वारा द्वीप प्रज्ज्वलन से हुआ। 

लोकापर्ण समारोह को सम्बोधित करते हुए पुलिस महानिदेशक (अभियोजन) उत्तर प्रदेश डा0 सूर्य कुमार शुक्ल ने कहा कि रचनाकारों को समाजोन्मुख होना चाहिए तथा उन्हें समाज का नेतृत्व करता दिखयी देना चाहिए। केवल विधवा विलाप से काम नहीं चलता, उसे समाज सुधार की तरफ भी ध्यान देना चाहिए। अगर व्यापक रूप में देखा जाए तो साहित्य समाज से जुड़ नहीं पाया है। रचनाकारों को व्यक्तिगत वेदना या केवल आसपास की घटनाओं को साहित्य में न रख कर समाज के हित की बातों को अपनी रचनाओं में समाहित करने की जरूरत है। साहित्यकारों को चाहिए कि समाचार पत्रों प्रकाशित महत्वपूर्ण समस्याओं पर केन्द्रित खबरों को आधार बनाकर साहित्य का सृजन करें। इससे साहित्य और पत्रकारिता के बीच सेतु की भूमिका भी वे निभा सकते हैं मानव सभ्यता के विकास से जुड़े विषयों पर रचना करने की ओर उन्मुख होने की भी आवश्यकता है। 

विशिष्ठ अतिथि प्रसिद्ध गीतकार एवं अपर जिलाधिकारी, वाराणसी ओम धीरज ने कहा साहित्य समाज की बेहतरी के लिए होता है। कविता सदैव स्मृति धर्म होती है। साहित्य साधना मनुष्यता को बचाने का माध्यम है। उन्होने कविताओं को बाजार तक का मोर्चा बताया। डा0 उमेश सिंह ने मनुष्य के मनुष्यत्व की चर्चा करते हुए कहा कि हमारा समय साहित्य की ओर देख रहा है। कलम को अनवरत चलते रहना चाहिए ताकि विकास की यात्रा पूरी हो सके। 

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सुप्रसिद्ध रचनाकार डा0 कमलाकान्त त्रिपाठी ने कहा कि रचनाकार को पुरस्कार की लालसा न रखते हुए सृजनशील होना चाहिए। शब्द मृत्युंजय है के शीर्षक की विशद व्याख्या करते हुए उन्होने रचनाशील बने रहने की आवश्यकता बतायी। साथ ही समाज से जुड़ने और सरोकारो को समझने पर बल दिया। 

इस अवसर पर डा0 पी. एल. गुप्ता, डा0 अनिल यादव, धर्मेन्द्र गुप्त साहिल, विजय मिश्र बुद्धिहीन, अरूण कुमार आर्य, किशन प्रसाद गुप्त, डा0 राम प्रकाश साह ने विचार व्यक्त किए।

लेखक रामकृष्ण विनायक सहस्त्र बुद्धे ने कहा जो मैने समाज से सीखा, पाया उसे वापस समाज को देने का प्रयास कर रहा हूं। प्रारम्भ में अतिथियों का स्वागत पुस्तक पथ के संपादक एल. उमाशंकर सिंह ने किया। 

लोकार्पण समारोह में डा0 कुमार अंबरीश चंचल, प्रकाश चन्द गुप्त, अजय जालान, अशेक शं राव, सुधीर भस्कर पाण्डे, सुरेन्द्र, डा0 बृजेश पाण्डे, सुधीर पाण्डे, एस. एल. सिंह, रजनीश प्रेरणा सहस्त्र बुद्धे, अर्चना पाण्डे, राजीव गुप्ता, तारकेश्वर सिंह, राधेश्याम यादव, योगेश अभि आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन विनय कुमार वर्मा ने किया।
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