सिंगरौली – चकवड़ चमत्कार और दाल का कालाबाज़ार

सिंगरौली

राजेन्द्र अग्रहरी (ब्यूरो) @उर्जांचल टाईगर।। कहते है सभी का एक न एक दिन आता है जब उसकी अहमियत बढ़ जाती है,जिस चकवड़ को लोग कभी नजरअंदाज कर दिया करते थे। आज वही चकवड़ बाजार के लिए अहम हो गया है कारण दाल की क़ीमत आसमान छू रहा है और मिलावट के लिए मुफीद और आसानी से मुहईया हो जाने वाला चकवड़ खुले आसमान के निचे मुफ़्त मिल रहा है। जो चकवड़ अपनी पहचान तक खो दिया था आज आचानक उसी चकवड़ को बटोरते लोग देख कर ऐसा लगता है के दाल ने चकवड़ के दिन भी लौट आया है.

मिलावटखोरों का करतब और चकवड़ 

बाजार में दालों की कीमत आसमान को छु रही है वही मिलावट खोर अपना करतब दिखाने से बाज नहीं आ रहे है। मिलावट खोर दालों में अब चक्वड के बीज को दाल की तरह दर कर दाल में मिला कर दाल के मूल्य में बाजार में बे धड़क बेच रहे है। दरअसल ये खेल मिलावट खोर व्यापारी द्वारा गरीब तबके के लोगो को प्रलोभन दे कर चक्वड के बीज लाने को कहते है और फिर व्यापारी चकवड़ के बीज को दाल में मिलाकर दाल के भाव में बेचकर मुनाफ़ा कमाते हैं ।

क्या है खेल 

चकवड़ एक जंगली घास है और यह खुले जमींन में तमाम देखने को मिलता है, उसमे लंबा-लंबा बीज का फर होता है, जिसको तोड़ कर रोड पर फेक दिया जाता है। रोड पर आते जाते गाडियो के नीचें रौंदते - रौंदते बिज अलग हो जाता है। जिसको मिलावटखोर 30 से 40 रूपये पति किलो के हिसाब से ग़रीब लोगों से खरीदकर दाल में मिला कर बेच देते है। चूँकि चकवड़ के बीज में औषधिय गुण होता है अतः इस्तेमाल करने वाले लोगों को नुकसान नहीं हो रहा और कालाबाजारी का यह नायाब खेल सिंगरौली में खुलेआम धरल्ले से चल रहा है।

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