कव्वाली - दरबार-ए-निजामुद्दीन से पहुंच रही है अंतरराष्ट्रीय मंच पर

दरबार-ए-निजामुद्दीन


नई दिल्ली ।। दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय कव्वाली महोत्सव का आयोजन होने जा रहा है जिसमें दुनिया भर से नामी गिरामी कव्वाल हिस्सा लेंगे। आयोजकों का दावा है कि कव्वाली को लेकर यह पहला वैश्विक आयोजन होगा। इस कार्यक्रम में देश-विदेश के गायक इस सूफी परंपरा को नये आयाम देते नजर आएंगे। अभी हाल ही में भारत और पाकिस्तान के कव्वाल यहां इंडिया इस्लामिक सेंटर में इस सूफी परंपरा को जीवंत बनाकर इस होने वाले विशाल आयोजन की झलक पेश की है।

‘ताली हो’ नामक यह महोत्सव अगले साल 12-14 फरवरी को आयोजित होगा। दिल्ली के निजामी बंधुओं में से एक गुलाम सबीर निजामी ने कहा, ‘‘संगीत की दुनिया पूरी तरह से अलग है। हमारे लिए हिंदू, मुस्लिम, जैन या ईसाई होने को कोई मतलब नहीं। जब भी हम साथ होते हैं बस भाईयों की तरह गले मिलते हैं बिल्कुल ऐसे जैसे कि एक ही परिवार का हिस्सा हों।’’ निजामी बंधु सिंकदराबाद घराने से ताल्लुक रखते हैं और आधुनिक कव्वाली परंपरा के साथ ही आस्ताना गायकी का भी जाना-माना नाम हैं।

इसी तरह फरीद अय्याज, अबू मुहम्मद कव्वाल बंधुओं का कहना है कि भारत वह भूमि है जहां प्रेम ने कई बार हिंसा पर विजय दर्ज की है। अय्याज ने कहा, ‘‘पिछले 10-15 दिनों से भारत में जो (असहिष्णुता का मामला) चल रहा है उसके बावजूद फरीद अय्याज मौजूद है। मैं जानता हूं कि यहां दिल्ली और भारत में ऐसे कई हैं जो मुझे प्रेम करते हैं। जब हजारों लोग मुझे प्रेम करते हैं तो मैं क्यों उन चंद लोगों से डरूं जो कि समाज के हिंसक तत्व हैं। बल्कि मैं उनमें से भी कुछ को प्रेम की भाषा पढ़ना सिखाना चाहता हूं।’’ उन्होंने संगीत को प्रेम की भाषा बताया। वहीं निजामी ने कव्वाली को खुदा की खिदमत करने की आध्यात्मिक विधि बताया।

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