ओबरा - खनन हादसा में तीन की मौत, दर्जनों घायल

 सोनभद्र (ओबरा) से मनमोहन शुक्ला/नौशाद अन्सारी
हजारों कुर्सियां इस मुल्क में लाशों पे रखी है
ये वो सच है जिसे झूठे से झूठा बोल सकता है


आखिर वैध की आड़ में अवैध खनन का खेल कितनी जाने लेगा। पैसे की भूख के आगे सब कुछ बौना हो गया है।ओबरा में हुए खनन हादसे में तीन श्रमिक की मौत हो गयी जबकि दर्जनों श्रमिक घायल बताये जा रहे हैं।
ओबरा में हुए खनन हादसा में तीन की मौत दर्जनों घायल।ओबरा खनन क्षेत्र बिल्ली मारकुंडी में आज सुबह लगभग 11 बजे आकाशीय बिजली गिरने से एक बड़ा हादसा हो गया।हादसा उस वक्त हुआ जब उसमे काम करने वाले मज़दूर ब्लास्टिंग हेतु होल भर रहे थे तभी अचानक जोरदार कड़क के साथ आकाशीय बिजली गिरी जिसकी वजह से सारे के सारे भरे हुए होल एक साथ ब्लास्ट कर गए और उस ब्लास्ट की चपेट में वहाँ कार्य कर रहे सभी मज़दूर भी आ गए ।तीन श्रमिक की मौत हो गयी है वहीँ दर्जनों घायल बताये जा रहे हैं।

अचानक हुए इस घटना से खनन क्षेत्र में अफरातफरी फ़ैल गई । और देखते ही देखते लोगो का जमावड़ा लग गया जिसके बाद मौके पर पहुचे लोगो ने सभी घायलो को इलाज़ हेतु सामुदायिक स्वास्थ केन्द्र चोपन भेज दिया जिसके बाद डॉक्टरों ने गंभीर रूप से घायलो में संतलाल पुत्र रामसरन उम्र 45 वर्ष , मोहरलाल पुत्र रामसरण उम्र 25 वर्ष , समयलाल पुत्र रामधनी उम्र 40 वर्ष , अमरावती पत्नी जयमंगल उम्र 18 वर्ष , हरीप्रसाद पुत्र बाबूलाल उम्र 30 वर्ष को प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल रेफ़र कर दिया एवं 
कौशल्या पत्नी हरिदास उम्र 30 वर्ष , रामदुलारे पुत्र जयसिंह उम्र 25 वर्ष ,समरजीत पुत्र धर्मसिंह उम्र 22 वर्ष ,दसमतिया पत्नी प्रेमनाथ उम्र 40 वर्ष , विरजिया पत्नी गंगाप्रसाद उम्र 45 वर्ष , को प्राथमिक उपचार के बाद छोड़ दिया ।
एवम् मृतक में हंसलाल पुत्र रामबदन उम्र 45 वर्ष ,देवनाथ पुत्र अमरशाह उम्र 35 वर्ष को प्रसाशन ने अपने कब्जे में लेकर जिला अस्पताल भेज दिया । सारे मृतक और घायल एक ही ग्रामपंचायत के जुगैल गांव के बताये गए ।
घटना के बाद जिले के आलाकमान में पुलिस कप्तान रामलाल वर्मा , एसडीएम कैलाश सिंह , एडिशनल एसपी शम्भुशरण यादव व अन्य अधिकारी तत्काल सामुदायिक स्वास्थ केन्द्र चोपन पहुच कर घायलो का जायज़ लेते हुए उनके बेहतर इलाज़ के लिए अपने हमराहियों को आदेशित करते हुए घटना स्थल के लिए रवाना हो गए ।

*एडीएम महोदय ने कहा के 40फ़ीट तक की खदान वैध मानी जाती है अगर 40फ़ीट से गहरी खदान है तो वह अवैध है जहाँ पे हादसा हुआ है वहां पे 150 फ़ीट की खदान है उस हिसाब से ये खदान अवैध हुआ।और इसमें लिप्त लोगों पे जल्द ही करवाई होगी।
और अंत में कुछ सवालात के पीछे आपको छोड़े जाते हैं के
  • क्या पत्थरों की कीमत ईन्सानी जिन्दगीयों से भी ज्यादा हो गयी है?
  • क्या नोटों की बरसात में इंसान की जान की कोई कीमत नहीं?
  • क्या वहां इंसानियत का वजूद नही है?
  • क्या मशीनों ने भावना पर जीत हासिल कर ली है?
  • जहाँ भावनाओं का आभाव हो वहां हादसा होते रहते हैं।

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