सलमान हीरो अच्छा है इंसान नहीं!

सलमान

इक़बाल हिन्दुस्तानी @ उर्जांचल टाईगर 
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आज के दौर के चर्चित हीरो सलमान खान ने बलात्कार वाले विवादित बयान पर महिला आयोग के नोटिस का जवाब तो दे दिया। लेकिन माफी अभी भी नहीं मांगी है। सलमान का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी वे कई विवादों में उलझते रहे हैं। सलमान बेशक एक अच्छे हीरो हैं। लेकिन वे एक अच्छे इंसान नहीं हैं। यह ज़रूरी भी नहीं है कि जो आदमी एक अच्छा कलाकार हो। वह एक अच्छा इंसान भी हो। चाहे शराब के नशे में फुटपाथ पर सो रहे गरीब लोगों पर अपनी कार चढ़ाने का मामला हो, ऐष्वर्या के साथ अभद्र व्यवहार या हिरन के शिकार का आरोप। सलमान ने हर बार अपनी हरकतों से 

यही साबित किया है कि वे अभिनय चाहे जितना अच्छा कर लेते हों। 

लेकिन एक इंसान की समझ का उनसे कोई लेना देना नहीं है। यह बात सलमान के बचाव या उनका पक्ष लेने के लिये नहीं कही जा रही है। मुझे लगता है कि यह जनता की समझ की कमी है कि हम जिस आदमी को पर्दे पर हीरो का रोल करते देखते हैं। उसको वास्तविक जिंदगी में भी हीरो की तरह हर काम आइडियल ही करता देखना चाहते हैं। 

यह एक नामुमकिन सी अपेक्षा है। मिसाल के तौर पर मोदी अपनी भाषण कला, संघ परिवार के अथक प्रयास और कारपोरेट की पूंजी के बल पर चुनाव जीतकर पीएम भले ही बन गये। लेकिन यह ज़रूरी नहीं कि वे सफल सरकार चला सकें। यह भी ज़रूरी नहीं कि मोदी जितनी भागदौड़ कर रहे हैं। उससे देश का भला हो ही जाये। 

आज के दौर में राजनीति कितनी गंदी झूठी और धोखे की हो गयी है। सबको पता है। जाहिर सी बात है कि जो आज की सियासत के घटिया तौर तरीकों को अपनायेगा वह सियासत में आगे जायेगा। इसके बावजूद अगर जनता इस खुशफहमी में रहे कि जो वादे मोदी ने किये थे। वे ज़रूर पूरे होंगे तो जनता की समझ पर हंसा ही जा सकता है। 

ऐसे ही मैंने कई कवि और लेखक देखें जो मानवता संवेदनशीलता और सामाजिक मूल्यों पर ज़बरदस्त कलम चलाते हैं। लेकिन वास्तविक जिंदगी में वे अपने लिखे के बिल्कुल उल्टा काम करते हैं। इसकी वजह चाहे जो हो लेकिन यह ज़रूरी नहीं कोई आदमी आपको बाहर से जैसा नज़र आ रहा है। वह अंदर से भी यानी अपने अमल और पर्सनल जीवन में भी वैसा ही हो। 

सच तो यह है कि ज्यादातर लोगों ने भले इंसान काबिल आदमी और अच्छे व्यक्तित्व के मुखौटे ही लगा रखे हैं। कई लोग बहुत लोकप्रिय होते हैं। वे अपने चाहने वालों को यह शो करते हैं कि वे बहुत बढ़िया और नेक इंसान हैं। लेकिन कभी कभी उनकी हरकतों से कुछ ही पल में यह पता लग जाता है कि वे दिखावा ही करते हैं। 

हाल ही में जाने माने अभिनेता अमिताभ बच्चन का नाम जब पनामा पेपर्स में आया तो उनके समर्थकों को धक्का लगा। हालांकि अमिताभ ने मीडिया के ज़रिये यह दावा भी किया कि उन्होंने कोई गैर कानूनी काम नहीं किया है। फिर भी जनता में एक संदेश चला गया कि अमित जी ने टैक्स बचाने के लिये किसी चोर दरवाजे़ का सहारा लिया है। 

हम अगर यह मान भी लें कि आपने कोई गैर कानूनी काम नहीं किया है। तब भी अगर चोर दरवाज़े से कर बचाया है तो आपने नैतिक अपराध तो किया ही है। यह अपने आप एक मिसाल है। अगर आप याद करें तो अज़हरूद्दीन कभी भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान हुआ करते थे। उनको नाम और दाम थोक में मिल रहा था। एक दिन उन पर मैच फिक्सिंग का आरोप लगा और उनका कैरियर ख़त्म हो गया। मेरी ग़ज़ल का एक शेर है- 

मेरी ग़ल्ती में छिपा है मेरा इंसां होना,वो जो ग़ल्ती ना करे कोई फ़रिश्ता होगा।
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