राष्ट्रीय उद्यानों में बेहतर प्रबंधन और बफर जोन में पर्यटन को प्रोत्साहित करें

भोपाल।। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने राष्ट्रीय उद्यानों का और बेहतर तरीके से प्रबंधन करने और राष्ट्रीय उद्यानों के बफर जोन में पर्यटन गतिविधि को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिये हैं। आज यहाँ प्रशासन अकादमी में 'वन्य-प्राणी एवं अकाष्ठीय वनोपज' संवाद को संबोधित करते हुए वन रक्षकों की भर्ती में वनों के परिवेश की समझ, जानकारी और रूचि रखने वाले स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके लिये भर्ती नियमों में जरूरी संशोधन करने पर भी विचार करना चाहिये।

श्री चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश के वन अत्यंत समृद्ध अवस्था में हैं। इन्हें बचाने के लिये लोगों के सहयोग से ज्यादा से ज्यादा पौधों का रोपण कर उन्हें पोषित कर वृक्ष बनाने का अभियान चलाया जायेगा। श्री चौहान ने कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति की आराधना का वर्णन है। ईश्वर द्वारा स्वयं वन्य-जीवों के रूप में अवतार लेने का उल्लेख है। उन्होंने कहा कि पृथ्वी पर रहने वाले हर जीव और वनस्पति को जीवित रहने का अधिकार है। आज यह समझने की ज्यादा जरूरत है कि वन्य-जीवों और वनों के बिना मानव जीवन संभव नहीं है। उन्होंनें कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति के शोषण की नहीं दोहन की अनुमति है। पशुओं और वनस्पति को भी आत्म-भाव से देखने का संस्कार दिया गया है। उन्होंने कहा कि यदि बाघ और जंगल जीवित है, तो वन्य-जीव पर्यटन के रूप में रोजी-रोटी भी चलती है। उन्होंने राष्ट्रीय उद्यानों का और बेहतर तरीके से प्रबंधन करने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि पन्ना टाइगर रिजर्व ने बाघों के परिवारों को नया जीवन देने का अदभुत काम किया है। इसकी पूरे विश्व में चर्चा हो रही है।

वन मंत्री डॉ. गौरीशंकर शेजवार ने कहा कि राष्ट्रीय उद्यानों में जैव-विविधता के संरक्षण को आधार में रखते हुए पर्यटन गतिविधियों का विकास किया जाना चाहिए। मध्यप्रदेश लघु वनोपज संघ के अध्यक्ष श्री महेश कोरी ने बताया कि इस वर्ष 18 लाख 57 हजार मानक बोरा तेन्दूपत्ता का संग्रहण किया गया है। तेन्दूपत्ता संग्राहकों को 232 करोड़ रूपये पारिश्रमिक के रूप में वितरित किये गये हैं।

प्रदेश के वाइल्ड लाइफ वार्डन श्री जितेन्द्र अग्रवाल ने बताया कि वन्य-जीव प्रबंधन में विशेष रूप से बाघों, बारहसिंगा, चीतल, जंगली सुअर और कृष्ण मृग के संरक्षण में प्रदेश ने विशेष उपलब्धियाँ हासिल की हैं। वन्य-जीवों के विरूद्ध होने वाले अपराधों में दोषियों को पकड़ने में इंटरपोल ने भी मध्यप्रदेश को प्रशंसा-पत्र दिया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश ने वन्य-जीव प्रबंध में विशेषज्ञता हासिल कर ली है।

लघु वनोपज संघ के प्रबंध संचालक श्री जव्‍वाद हसन ने बताया कि गैर काष्ठीय वनोपज के क्षेत्र को संगठित क्षेत्र के रूप में बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में करीब 32 लाख वनोपज संग्राहक है जिसमें से 40 प्रतिशत महिलाएँ हैं। लघु वनोपज को बिना क्षति पहुँचाये हार्वेस्टिंग करने का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वनों में रहने वालों के लिये वनोपज संग्रहण आजीविका का प्रमुख साधन है। संग्रहण से होने वाले लाभ का 15 प्रतिशत वनोपज संवर्धन में ही खर्च किया जाता है। तेंदूपत्ता का संग्रहण दर 12 सौ रूपये प्रति मानक बोरा करने से लघु वनोपज समितियों के सदस्यों में उत्साह है। सभी संग्राहकों को मजदूरी का भुगतान ई-पेमेंट के माध्यम से किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने टाइगर आइडेंटिफिकेशन बुक 2016 और टाइगर मॉनिटरिंग किताबों का विमोचन किया। इस अवसर पर मुख्य सचिव श्री अंटोनी डिसा, अपर मुख्य सचिव वन श्री दीपक खांडेकर, प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री अनिमेष शुक्ला एवं राष्ट्रीय उद्यानों के संचालक उपस्थित थे।

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