मुसलमानों के डर से हिंदुओं का पलायन

कैराना

मोकर्रम खान@ उर्जांचल टाईगर 

कुछ दिनों पूर्व भाजपा सांसद हुकुम सिंह ने ऐसे लोगों की एक भारी भरकम लिस्‍ट जारी की जो तथाकथित रूप से कैराना से पलायन कर गये हैं. कुछ ऐसा भी बताने के प्रयास किये गये कि पलायन करने वाले सभी हिंदू थे जो मुसलमानों के आतंक के कारण कैराना से पलायन करने को विवश हुये. उत्‍तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच कराई और बताया कि सांसद ने जितने लोगों की लिस्‍ट जारी की है उतने लोगों ने पलायन नहीं किया है, मात्र 2-3 लोगों ने पलायन किया है, वह भी किसी के भय से नहीं बल्कि अपने व्‍यावसायिक हितों के लिये. सांसद को लगा कि कहीं मुद्दा टांय टांय फिस्‍स न हो जाय इसलिये वे दोबारा टीवी पर प्रगट हुये और कहा कि यदि लिस्‍ट में कोई कमी बेशी हो तो वे माफी मांगने के लिये भी तैयार हैं. यह मुद्दा लगभग सभी पार्टियों के लिये राजनीतिक लाभ हेतु उपयुक्‍त है. हिंदू हितों की रक्षा तथा भारत को हिंदू राष्‍ट्र घोषित कराने का दावा करने वाली, मुसलमानों की मसीहा बनने वाली तथा धर्मनिरपेक्षता का ढिंढोरा पीटने वाली, सभी पार्टियां तुरंत सक्रिय हो गईं. पैसे ले कर किसी भी छोटी बात को बतंगड़ में बदल देने वाले टीवी चैनल भी इस मामले में क्रियायें-प्रतिक्रियायें दिखाने लगे. पुलिस तथा प्रशासन हाशिये पर चला गया. नेताओं ने मोर्चा संभाल लिया. कुछ पार्टियों ने आन द स्‍पाट इनवेस्‍टीगेशन के लिये अपने नेताओं की जांच-टीम कैराना भेज दी. कुछ ऐसा माहौल बना दिया गया जैसे कैराना कस्‍बा न हो कर एक पूरा राष्‍ट्र हो जिस पर विदेशी आक्रमण हो गया है. इस संकट की घड़ी में धर्म गुरुओं का भी नैतिक दायित्‍व बन जाता है कि वे समाज में लग रही आग को बुझाने के प्रयास करें, तो संतों की एक टोली भी कैराना पहुंच गई. अब आग बुझाने वालों को आग लगाने वाले डरायें धमकायें नहीं तो मुद्दा एक तरफा पलट जाने का डर पैदा हो जाता है इसलिये संतों को हत्‍या की धमकी भी मिल गई. हालांकि न तो संतों ने धमकी देने वालों के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही की, न ही धमकी देने वालों ने धमकी का कार्यान्‍वयन किया. मुख्‍य उद्देश्‍य था मुद्दे को गरमा कर इसे देश व्‍यापी बनाना जिसे पूरा करने के प्रयास किये जा रहे हैं. 

इस सारी तिकड़म बाजी के सूत्रधार हैं भाजपाध्‍यक्ष अमित शाह जिनके अपने शरीर का वजन उनके राजनीतिक वजन से ज्‍यादा है. यदि शरीर स्‍थूल हो जाय तो मस्तिष्‍क भी स्‍थूल हो जाने की संभावना प्रचुर हो जाती है. बड़े बड़े आपराधिक प्रकरणों से सुरक्षित बच निकलने तथा बिना कुछ किये सत्‍ता केंद्र बन जाने के कारण अमित शाह जी को यह भ्रम हो गया है कि जनता को छोटे छोटे हथकंडों से मूर्ख बना कर वोट कबाड़ना बहुत आसान काम है. हालांकि हाल में संपन्‍न हुये विधान सभा चुनावों में जनता ने भाजपा नेताओं की तिकड़म बाजी की हवा निकाल दी है किंतु अमित शाह हार मानने को राजी नहीं हैं. बुजुर्गों ने सही कहा है कि वहम (भ्रम) का इलाज किसी डाक्‍टर, हकीम या वैद्य के पास नहीं है. 

अब आयें मुख्‍य मुद्दे हिंदुओं के पलायन पर. भाजपा का आरोप है कि कैराना से बहुत से हिंदू, मुसलमानों के डर से पलायन कर गये हैं. व्‍हीएचपी जैसे अनुषांगिक संगठनों ने भी ताल ठोकना शुरू कर दिया है कि कैराना को पाकिस्‍तान नहीं बनने दिया जायगा, हिंदुओं का पलायन बरदाश्‍त नहीं किया जायगा. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एक गैंगस्‍टर मुकीम काला जो अपने साथियों के साथ जेल में बंद है, लोगों से हफ्ता वसूली के लिये धमकी भरे फोन करता था इसीलिये कई व्‍यवसायी कैराना से पलायन कर गये. यहां उल्‍लेखनीय है कि देश के विभिन्‍न शहरों में गुंडे बदमाश लोगों से हफ्ता वसूली करते हैं. ये गुंडे विभिन्न जातियों तथा समुदायों से संबद्ध हैं. यह महज संयोग है कि मुकीम काला नाम से मुसलमान मालूम पड़ता है इसलिये इस हफ्ता वसूली को सांप्रदायिक रंग दिया जा रहा है वर्ना हफ्ता वसूली का मुसलमान गुंडों के पास कोई पेटेंट नहीं है. अपराध जगत सभी संप्रदायों के लिये खुला हुआ है. यूपी सरकार का कहना है कि भाजपा जबरदस्‍ती की राजनीति कर रही है कैराना से केवल 3 हिंदुओं ने पलायन किया है वह भी किसी के आतंक से नहीं बल्कि अपने व्‍यावसायिक हितों के संरक्षण के लिये. फिर भी अमित शाह मानने को तैयार नहीं हैं, लोगों को सलाह दिये जा रहे हैं कि कैराना जा कर वहां के हालात देखिये. व्‍हीएचपी, बजरंग दल जैसे उग्र संगठन मरने मारने को उद्यत हो रहे हैं. इतने कोलाहल के बीच सबसे दिलचस्‍प बात यह है कि न तो पेड न्‍यूज चैनल ऐसे लोगों के इंटरव्‍यू दिखा रहे हैं जो मुसलमानों के आतंक के कारण कैराना से पलायन कर गये हैं न ही भाजपा नेता ऐसे लोगों को सामने ला रहे हैं. यूपी की समाजवादी सरकार भी अप्रत्‍यक्ष रूप से इस मुद्दे पर माहौल गरम करती प्रतीत हो रही है वर्ना इस प्रकार झूठी अफवाहें फैला कर सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने वालों पर कठोर कार्यवाही हेतु पर्याप्‍त कानून उपलब्‍ध हैं. लेकिन हर व्‍यक्ति इस मुद्दे को गरमाते रहना चाहता है. समस्‍या का हल कोई नहीं चाहता. भय का वातावरण बना कर राजनेता अपना हित साधने में व्‍यस्‍त हैं. 

इस ‘पलायन कांड’ के पीछे का एक बड़ा ही रुचिकर पहलू भी है. यूपी, बिहार, राजस्‍थान, केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश आदि राज्‍यों से लोग रोजगार के अच्‍छे अवसर पाने के लिये अन्‍य राज्‍यों में चले जाते हैं. दक्षिण भारत से राजस्‍थान जाने वाली कुछ ट्रेनों में 4 माह पहले रिजर्वेशन कराना पड़ता है वर्ना यात्रा करना दुष्‍कर कार्य है क्‍योंकि राजस्‍थान के अधिकतर व्‍यक्ति दक्षिणी राज्‍यों में जा कर बस गये हैं और अच्‍छा खासा व्‍यापार कर रहे हैं. राजस्‍थान के कई गांवों में केवल एकाध आदमी ही बचे हैं जो बाहर नहीं गये हैं. केरल में अधिकतर घरों में केवल बुजुर्ग व्‍यक्ति ही बचे हुये हैं. कैराना जिसे राष्‍ट्र का अघोषित दर्जा दिया जा रहा है, यूपी में आता है. यूपी के अधिकतर व्‍यक्ति घर छोड़ कर अन्‍य राज्‍यों में कमाने चले जाते हैं, वहां जा कर खूब पैसा तथा प्रापर्टी बनाते हैं तथा राजनीति में भी घुसपैठ कर लेते हैं. यूपी के कई लोग लुंगी पहन कर आते हैं और फिर धीरे धीरे राजनीति व्‍यापार सब पर कब्‍जा कर लेते हैं. कई फिल्‍मी हस्तियां यूपी से ही हैं. मध्‍य प्रदेश तथा महाराष्‍ट्र में सब्‍जी भाजी के व्‍यापार से ले कर राजनीति के महत्‍वपूर्ण पदों तथा सरकारी सेवाओं में यूपी के लोगों का वर्चस्‍व है. सुपारी/कांट्रेक्‍ट किलर भी अधिकतर यूपी के ही हैं. इसका मुख्‍य कारण यह है कि यूपी में रोजगार, व्‍यापार, राजनीति तथा आपराधिक कमाई के अवसर बहुत कम बचे हैं क्‍योंकि सभी जगह पुराने लोगों ने इन सभी चीजों पर पुश्‍तैनी कब्‍जा जमा रखा है, नये लोगों को कुचल देते हैं इसलिये ये लोग ‘गृह त्‍यागी सदा सुखी’ का सिद्धांत अपना कर अन्‍य राज्‍यों में पलायन कर जाते हैं तथा वहां अपने जौहर दिखा कर अच्‍छा धनार्जन करते हैं फिर कभी कभी शानो शौकत के साथ अपने गृह नगर में लोगों से मिलने आते हैं. वैसे भाजपा ने कैराना में पलायन कर्ताओं की जो परिभाषा निर्धारित की है उसके हिसाब से शायद विजय माल्‍या उनके एक तथाकथित अंकल, ललित मोदी आदि जिन पर भारत सरकार को अरबों रुपये का चूना लगाने के आरोप हैं, सभी पीडि़त हैं एवं प्रदेश क्‍या देश से ही पलायन करने को विवश हुये हैं. इन सभी के पलायन के पीछे किस का हाथ है, यह भाजपा नेता ही बतायेंगे. 

लेखक - मोकर्रम खान, पत्रकार/राजनीतिक विश्‍लेषक पूर्व निजी सचिव, केंद्रीय शहरी विकास राज्‍य मंत्री मोबाइल : 08275783020, 09109912802 E-Mail : unsoldjournalism@gmail.com
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