शायर शादाब जफर इशरत जमा खॉ अवार्ड से सम्ममानित........


ठिठुर ठिठुर के मर गया सर्दी में खुददार....

नजीबाबाबद (नि0प्र0) शनिवार की रात मोहल्ला पठानपुरा में शायर फरहत जमां खॉ सागर के आवास पर एक मुशायरे व कवि सम्मेलन का आयोजन अंजुमन गुलषन ए अदब की जानिब से किया गया जिस में नगर के कवि शायरो ने सामाजिक परिवेश और देश प्रेम पर आधारित रचनाये पेश की। कार्यक्रम में इशरत जमा खॉ अवार्ड से सम्ममानित शायर शादाब जफर शादाब ने कहा कि हमारा नगर गंगा जमनी तहजीब के लिये पूरे देश में जाना जाता है यहा कि एकता भाईचारा, हिन्दी उर्दू की ये महफिले ही हमे एक दूसरे के करीब लाती है। कवि सम्मेलन मुशायरे देश में एकता भाईचारे को बढाने में सेतू का काम कर रहे है। कार्यक्रम का आगाज तैय्यब जमाल ने नात ए पाक से यू किया। 

रौनक ए बज्म ए जहॉ है सब बदौलत आप कीं 
आप ही के दम से दुनिया मै उजाला हो गया।। 

डा.रईस भारती ने उम्दा गजल पेश करते हुए कहा..... 

ऑखो ऑखो कि मुलाकात लिये बैठा हॅू। 
कितना खुशफहम हॅू क्या बात लिये बैठा हूँ । 

मेजबान फरहत जमां खां सागर ने बेहद उम्दा गजल पेश की... 

ख्वाब में उनके आना जाना है। 
मेल उन से मेरा पुराना है।। 

सलीम मुल्तानी ने गजल के माध्यम से संदेश दिया... 

सारा जमाना जब तेरे खिलाफ बोलता है। 
तो तू समझ ले के तू साफ बोलता है।। 

सम्मानित शायर शादाब जफर शादाब ने आज के हालात पर बेहद खूबसूरत अंदाज मै गजल पेश कर समां बांध दिया.... 
टेंट लगा कर शहर में मदद बटी सौ बार। 
ठिठुर ठिठुर के मर गया सर्दी में खुददार।। 

कवि कुमुद कुमार ने वीर रस की रचना पेशकर लोगो में देश भक्ति का जज्बा भ्र दिया... 

हो सवार लहरो पर, जो सागर को मथता हो। 
ऐसा ही तो, मॉ भारती का लाल हो।। 

कार्यक्रम का सफल संचालन कर रहे सुहेल शम्सी ने खूबसूरत गजल में कहा.... 

पत्थरो से भी दिल लगाना क्या। 
आजमाये को आजमाना क्यां।। 

शायर तैय्यब जमाल ने उम्दा गजल पेश कर श्रोताओ को दाद देने पर मजबूर कर दिया बानगी देखे 

रंग दुनिया के सब बे मजा हो गये। 
आप के गम से क्या आशना हो गये।। 

युवा शायर नौशाद शाद ने कहा.... 

सीने में गम छुपाने की हिम्मत नही रही। 
अब और चोट खाने कह हिम्मत नही रही।। 

शायर वहीजुददीन जिया ने खूबसूरत गजल पेश कर समा बांध दिया.... 

मसाइब है उन्ही पर ,आफते है, गम के साये है। 
जो दिवाने तुम्हारी राह में कॉटे बिछाये है।। 

शायर अख्तर मुल्तानी ने खूबसरत अन्दाज में गजल पेश करते हुए कहा...दंगा, फसाद, फिरका परस्ती है हर तरफ। 
कैसा है ताजदार उसे कुछ खबर नहीं।। 

कवि प्रमोद कुमार प्रेम ने बेहद उम्दा रचना पेश करते हुए कहा... 

जो बुजुर्ग ने कहा वो आजमाकर देखना। 
रोते बच्चे को कभी दिल से लगा कर देखना।। 

मौ0 आलम उर्फ कैफ नजीबाबादी की रचना... 

में अपने आप को मुजरिम करार दे दूंगा। 
कोई सुबूत अगर आप की जबां से मिले।। 

शायर शादाब जफर शादाब को उन की अदबी खिदमात के लिये अंजुमन गुलशन ए अदब की जानिब से कवि शायरो ने प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित इन के अतिरिक्त कार्यक्रम में मास्टर मनमोहन लाल अंजुम, फरहतजमा खां सागर, रिजवान अंसारी, मुज्जकिर नजीबाबादी आदि ने खूबसूरत कलाम पेश कर मुशायरे को कामयाबी दी। अध्यक्षता कैफ नजीबाबादी ने व संचालन सुहेल शम्सी ने किया।

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