एक ख़याल कर गया कमाल

शिवराज सिंह चैहान


शिवराज सिंह चैहान 

कभी-कभी हमारे दिमाग में कोई अनूठा ख़याल आता है, जिसे ठीक से अमल में लाया जायें तो कमाल हो जाता है। खण्डवा जिले में हनुवंतिया जल क्रीड़ा परिसर की स्थापना ऐसा ही एक ख़याल था। 

पिछले साल सिंगापुर यात्रा के दौरान मैंने वहाँ सेन्टोसा आइलैण्ड देखा। मेरे मन में ख़याल आया कि अपने मध्यपेदश में भी कोई ऐसी जगह आकार ले। इसे ठोस रूप देने के लिये मेरे दिमाग में तत्काल खंडवा जिले का हनुवंतिया कौंध गया। इंदिरा सागर डेम के बैकवाटर से उभरा यह आइलैण्ड सचमुच बहुत अदभुत है। यात्रा से लौटकर मैंने पर्यटन विभाग के अफसरों को अपना ख़याल बताया। नये आयडियाज की तलाश में रहने वाले पर्यटन अधिकारियों ने इसे तत्काल लपक लिया। वे इस काम में जुट गये। जितनी तेजी और कुशलता से उन्होंने इस काम को कर दिखाया,वह एक मिसाल है। 

पिछले साल हनुवंतिया में पहला जल-महोत्सव 10 दिन तक आयोजित किया गया। सैलानियों के उत्साह को देखते हुए इस साल 15 दिसंबर से होने वाला जल-महोत्सव एक माह का हो रहा है। एक साल के भीतर ही हनुवंतिया की लोकप्रियता आश्चर्यजनक रूप से बढ़ी है। इसी साल फरवरी से नवंबर तक तकरीबन एक लाख से ज्यादा सैलानियों ने हनुवंतिया में जल पर्यटन का लुत्फ उठाया। इस दौरान बड़ी संख्या में सैलानी हनुवंतिया परिसर में बनाये गये लॉग हट्स में ठहरे। इन सर्वसुविधायुक्त हट्स के अलावा हनुवंतिया में सैलानियों के लिये मीटिंग हॉल, कैफेटेरिया, फूड-प्लाजा,बोट क्लब आदि का निर्माण किया गया है। 

इस साल के जल-महोत्सव में सैलानियों का जोश और ज्यादा परवान चढ़ेगा, क्योंकि इसमें जल के साथ-साथ जमीन और आकाश में भी विभिन्न रोमांचक और साहसिक गतिविधियाँ की जायेंगी। इनमें वाटर स्पोर्ट्स, आइलेण्ड कैम्पिंग, एडवेंचर, एक्टिविज्म- हॉट एयर बैलूनिंग, पेरा सेलिंग, पेरा मोटर्स, स्टार गेजिंग, वाटर स्कीइंग, जेट स्कीइंग, वाटर जॉर्बिंग, बर्मा ब्रिज, आर्टिफिशियल क्लाइम्बिंग सहित ढेरों गतिविधियां शामिल हैं। 

इसके अलावा सजा होगा शिल्पों का अद्भुत संसार। हनुवंतिया की वादियों में घुले होंगे रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के रंग। तरह-तरह के स्वादिष्ट भोजन वाले स्टालों का तो कहना ही क्या! 

हनुवंतिया प्रयोग की अपार सफलता से उत्साहित होकर अब ओंकारेश्वर के नजदीक सैलानी टापू का विकास किया जा रहा है। इसी तरह मंदसौर जिले के गांधी सागर डेम पर भी पर्यटन सुविधाएँ विकसित की जा रही हैं। 

जाते साल की छुटि्टयाँ परिवार के साथ मनाने के लिये अलौकिक प्राकृतिक सुषमा से परिपूर्ण हनुवंतिया परिसर से बेहतर जगह भला और क्या हो सकती हैं! 

नज़ीर अकबराबादी का एक शेर याद आता है- 

''सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िन्दगानी फ़िर कहाँ 
ज़िन्दगी कुछ रह भी जाये, तो जवानी फिर कहाँ।'' 

तो आइये, सैर के साथ-साथ सतपुड़ा की वादियों और नर्मदा के व्यापक जल-विस्तार में जीवन भर न भूलने वाले आनंद के अनुभव के लिये हो जाइये तैयार- परिजन के साथ। 

(लेखक-मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं)

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