पुरुष की गैरजिम्मेदारी और असंवेदनशीलता का नतीजा है अनचाहा गर्भ और असुरक्षित गर्भपात

पुरुष की गैरजिम्मेदारी और असंवेदनशीलता का नतीजा है अनचाहा गर्भ और असुरक्षित गर्भपात

बाबी रमाकांत(सीएनएस)
गर्भपात और अनचाहे गर्भ पर नेपाल के पहले राष्ट्रीय शोध ने गंभीर सवाल उठाये हैं. नेपाल में गर्भपात पर 2002 से कोई कानूनी रोक नहीं है और पिछले सालों में प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता भी बहुत बढ़ी है. पर इसके बावजूद अनेक महिलाएं (58%) असुरक्षित गर्भपात करवा रही हैं. नेपाल और अन्य 190 देशों ने संयुक्त राष्ट्र 2015 महासभा में सतत विकास लक्ष्य (Sustainable Development Goals/ SDGs) हासिल करने का वादा किया है जिनमें लिंग-जनित असमानता समाप्त करने और सभी लड़कियों/ महिलाओं तक प्रजनन स्वास्थ्य सेवाएँ पहुचाने के लक्ष्य शामिल हैं.

जाहिर है कि यदि सरकारें सही मायने में सतत विकास लक्ष्यों पर खरा उतरने के लिए वचनबद्ध हैं तो स्थिति पुरजोर रूप से बदलनी होगी. न केवल स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध हों बल्कि सभी लोग उन सेवाओं का उपभोग भी कर रहे हों.

यदि पुरुष जिम्मेदार हैं तो अनचाहा गर्भ या गर्भपात क्यों?

यदि पुरुष जिम्मेदारी से परिवार नियोजन करें और सरकार द्वारा मुफ्त वितरित हो रहे कंडोम का सही इस्तेमाल भी करें (या पुरुष नसबंदी करवाएं) तो अनचाहे गर्भ या गर्भपात करवाने जैसी स्थिति ही क्यों बने? आखिर क्या कारण है कि भारत में संभवत: हर शहर में पुरुष नसबंदी करवाने की अनेक स्वास्थ्य केन्द्रों पर सेवा उपलब्ध है और सरकार पुरुष नसबंदी को बढ़ावा देने के लिए सालों से निरंतर प्रचार-प्रसार भी कर रही है पर आंकड़े बताते हैं कि बहुत कम और नगण्य संख्या में पुरुष नसबंदी करवाते हैं और अधिकाँश महिलाओं को ही महिला नसबंदी आपरेशन करवाना पड़ता है. क्या कारण है कि सालों से पुरुष कंडोम का प्रचार हो रहा है और सरकार मुफ्त बाँट रही है पर इनका उपयोग होता नहीं दिखता वर्ना अनचाहे गर्भ या गर्भपात की जरुरत ही नहीं पड़ती. क्या कारण है कि महिला कंडोम का वैसा प्रचार नहीं होता जैसा कि पुरुष कंडोम का प्रचार (या मुफ्त वितरण) होता है?

नेपाल में प्रजनन स्वास्थ्य: प्रगति हुई पर बहुत काम है बाकी

नेपाल में प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं और उनकी उपलब्धता में प्रशंसाजनक विस्तार तो हुआ है पर बहुत ऐसी महिलाएं हैं जो इन सेवाओं से वंचित हैं और अप्रशिक्षित लोगों द्वारा असुरक्षित गर्भपात करवाने पर विवश हैं. नेपाल के सेण्टर फॉर रिसर्च ऑन एनवायरनमेंट हेल्थ एंड पापुलेशन एक्टिविटीज (Center for Research on Environment Health and Population Activities - CREHPA) और अमरीका के गुटमाकर इंस्टिट्यूट (Guttmacher Institute) द्वारा किये हुए इस राष्ट्रीय शोध ने उजागर किया है कि 2014 में नेपाल में 323,000 प्रेरित गर्भपात (induced abortion) हुए. इन प्रेरित गर्भपात (induced abortion) में से मात्र 42% गर्भपात सरकारी मान्यता प्राप्त स्वास्थ्य केंद्र पर हुए. 58% गर्भपात असुरक्षित होना महिला स्वास्थ्य और जन स्वास्थ्य के लिए बेहद निराशाजनक है.

शोध में यह तथ्य भी सामने आया कि नेपाल में सभी प्रसूतियों में से अनचाहे गर्भ धारण के मामले आधे हैं.

भारत हो या नेपाल, यदि सरकारें सही मायनों में प्रजनन स्वास्थ्य सेवाएँ सभी जरूरतमंद महिलाओं तक पहुचाना चाहती हैं तो यह मौजूदा स्थिति बदलनी होगी. पुरुष नसबंदी का दर महिला नसबंदी से अधिक सुनिश्चित करना होगा. पुरुषों की गैर जिम्मेदारी और असंवेदनशीलता का ही नतीजा है कि महिलाओं को अनचाहे गर्भ और असुरक्षित गर्भपात से गुज़ारना पड़ता है.
(बाबी रमाकांत, विश्व स्वास्थ्य संगठन महानिदेशक द्वारा 2008 में पुरुस्कृत (सीएनएस) के नीति निदेशक हैं)

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