छत पर सोलर लगाने में पीछे हैं देश के कई प्रमुख शहर: ग्रीनपीस

सोलर उर्जा


नई दिल्ली ब्यूरो @उर्जांचल टाईगर ।।  ग्रीनपीस द्वारा जारी एक विश्लेषण में यह तथ्य सामने आया है कि बहुत सारे राज्यों में नीतियों, नेट मीटर मानदंड और नई व अक्षय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा 30 प्रतिशत सब्सिडी देने के बावजूद मुंबई और चेन्नई जैसे देश के कई प्रमुख शहर छत पर सोलर लगाने में काफी पीछे हैं। 

दिल्ली जहां पिछले साल ही सोलर नीति लायी गयी है और नेट मीटर कनेक्शन भी उपलब्ध हैं वहां भी आवासीय क्षेत्र में छत पर सोलर लगाने की संख्या में कोई बहुत बढ़ोत्तरी नहीं हुई है। दिल्ली की कुल सोलर क्षमता 2,500 मेगावाट है जिसमें 1,250 मेगावाट आवासीय क्षमता शामिल है। आधिकारिक रूप से दिल्ली की 2020 तक 1,000 मेगावाट सोलर लगाने का लक्ष्य है वहीं 2025 तक इसे बढ़ा कर 2,000 किया जाना है। दिंसबर 2016 तक सिर्फ 35.9 मेगावाट ही दिल्ली में सोलर लगाया जा सका है, इसमें भी मार्च 2016 में सिर्फ 3 मेगावाट आवासीय क्षेत्र में सोलर लगा है। मुंबई जिसकी 1,720 मेगावाट की क्षमता है वहां भी सिर्फ 5 मेगावाट ही लगाया जा सका है। पूरे तमिलनाडू राज्य में सिर्फ 2 मेगावाट लगा है जबकि उसका लक्ष्य 350 मेगावाट का है।

अक्षय ऊर्जा मंत्रालय ने 2022 तक 40 गिगावाट सोलर छत पर लगाने का लक्ष्य रखा है। दिसंबर 2016 तक, यह सिर्फ 1 गिगावाट तक पहुंच पाया है। सोलर लगाने की गति धीरे होने की एक वजह यह भी है कि लोगों को यह पूरी प्रक्रिया जटिल लग रही है और वे अफसरशाही में फंस रहे हैं। इसके अलावा नेट मीटरिंग वैसे तो बहुत सारे राज्यों में है लेकिन उसको ठीक से कम ही जगह लागू किया जा रहा है।

ग्रीनपीस इंडिया की कैंपेनर पुजारिणी सेन कहती है, “सरकार द्वारा 30 प्रतिशत सोलर लगाने के लेय दिया जाता है और इसके साथ-साथ राज्यों द्वारा भी कई तरह की योजनाएँ हैं लेकिन फिर भी छत पर सोलर लगाने की संख्या बहुत धीमे-धीमे आगे बढ़ रही है। हालांकि इसका मतलब यह कतई नहीं है कि भारत को अपने मह्त्वाकांक्षी ऊर्जा लक्ष्यों को कम कर देना चाहिए, जैसा कि कुछ लोग सलाह दे रहे हैं। बल्कि सरकार को छत पर सोलर लगाने की योजना को और ज्यादा प्राथमिकता से लागू करना चाहिए। यह कई तरह से हो सकता है जैसे कि वित्तिय सहायता देकर, राज्य सरकार और शहरों को मांग के अनुसार प्रोत्साहन देकर भी इसे हासिल किया जा सकता है। इससे बिजली खर्च में कमी और जिवाश्म ईंधनों के कम खपत की वजह से हासिल साफ हवा का फायद इतना ज्यादा है कि इसे नजरअंदाज किया ही नहीं जा सकता है। भारत पर जो अंतर्राष्ट्रीय सोलर गठबंधन का संस्थापक सदस्य और संयोजक होने की हैसियत से स्वच्छ ऊर्जा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता बहुत बढ़ जाती है।”

ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजिज के अध्ययन के अनुसार प्रत्येक साल वायु प्रदूषण से मरने वाले लोगों की संख्या 1.2 मिलियन है। ऊर्जा क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन को कम करके वायु प्रदूषण पर भी काफी हद तक लगाम लगाया जा सकता है।

ग्रीनपीस द्वारा आयोजित एक पोल में यह सामने आया कि छत पर सोलर लगाने के लिये लोगों की काफी रुचि है। 812 लोगों में 55 प्रतिशत लोगों ने सोलर लगाने में निवेश करनेके प्रति रुचि दिखायी है।

पुजारिनी कहती है, “अभी भी लोगों में यह भ्रम है कि सोलर लगाने के लिये बहुत पैसे क जरुरत होती है, जबकि ज्यादातर बार लोगों को इसमें मिलने वाले वित्तिय सहायता के बारे में पता ही नहीं होता। अगर केन्द्र और राज्य सरकार चाहे तो विभिन्न आवासीय और नागरिक समूह में गंभीरता से लोगों को सोलर लगाने के लिये जागरुक कर सकती है।”

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