तम्बाकू महामारी पर अंकुश लगाये बिना सतत विकास मुमकिन नहीं

तम्बाकू महामारी पर अंकुश लगाये बिना सतत विकास मुमकिन नहीं


बाबी रमाकांत, (सीएनएस)  
हालाँकि सरकार ने 2030 तक हर इंसान के लिए सतत विकास का सपना पूरा करने का वादा तो किया है पर तम्बाकू महामारी के कारणवश, अनेक विकास मानकों पर प्रगति उल्टी दिशा में जा रही है. जानलेवा गैर-संक्रामक रोग (ह्रदय रोग, पक्षाघात, कैंसर, दीर्घकालिक श्वास रोग, आदि) से मृत्यु का एक बड़ा कारण है: तम्बाकू. तम्बाकू के कारण गरीबी, भूख, पर्यावरण को नुक्सान, अर्थ-व्यवस्था को क्षति, आदि भी हमको झेलने पड़ते हैं. 

तम्बाकू से हर साल अर्थ-व्यवस्था को अमरीकी डालर 1 ट्रिलियन का नुक्सान 
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, तम्बाकू के कारण वैश्विक अर्थ व्यवस्था को अमरीकी डालर 1 ट्रिलियन का सालाना नुक्सान होता है.स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में तम्बाकू के कारण हर साल रूपये 1,04,000 करोड़ व्यय होता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन महानिदेशक द्वारा पुरुस्कृत वरिष्ठ सर्जन प्रोफेसर (डॉ) रमा कान्त ने कहा कि "विश्व में 70 लाख से अधिक लोग हर साल तम्बाकू के कारण मृत होते हैं. भारत में 12 लाख लोग हर साल तम्बाकू के कारण मृत होते हैं. तम्बाकू मृत्यु दर में गिरावट आने के बजाय, बढ़ोतरी हुई है जो अत्यंत चिंताजनक है. भारत की राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 का सपना है कि गैर संक्रामक रोगों से होने वाली असामयिक मृत्यु में 2025 तक 25% गिरावट आये. गैर-संक्रामक रोगों के जनक, तम्बाकू, पर अंकुश लगाये बिना, यह सपना कैसे पूरा होगा? तम्बाकू पर अरबों रूपये के सालाना व्यय को बचा के सतत विकास में निवेश करना चाहिए तभी तो सरकार सतत विकास लक्ष्य और राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति दोनों पर खरी उतरेगी. 

बीड़ी समेत सभी तम्बाकू उत्पाद पर अधिकतम जीएसटी और कर लगे 
इंटरनेशनल यूनियन अगेंस्ट टीबी एंड लंग डिजीज की विशेषज्ञ मिशेल रईस ने बताया कि फिलिपीन सरकार ने तम्बाकू पर 'सिन टैक्स' (पाप-कर) लगाया है जिससे कि तम्बाकू सेवन में गिरावट आई और सरकार के पास अधिक बजट आया जो स्वास्थ्य प्रणाली में निवेश किया गया. हमारी भारत सरकार से अपील है कि बीड़ी समेत सभी तम्बाकू उत्पाद पर अधिकतम (28%) जीएसटी (सामान्य वास्तु और सेवा कर) लगाये.
भारत समेत 180 देशों ने अंतर्राष्ट्रीय तम्बाकू नियंत्रण संधि (WHO FCTC) को पारित किया है. नवम्बर 2016 में भारत सरकार समेत अन्य सरकारों ने निर्णय लिया था कि तम्बाकू उद्योग को कानूनी रूप से जवाबदेह ठहराने की विशेषता में बढ़ोतरी होनी चाहिए और अधिक से अधिक 'केस स्टडीज' को संकलित करके सब देशों से साझा करना चाहिए. इस संधि के आर्टिकल 19 पर कार्य को आगे बढ़ाते हुए सरकारों ने तम्बाकू उद्योग को कानूनी रूप से जवाबदेह ठहराने के लिए एक रास्ता खोला है जिससे कि अरबों रूपये के तम्बाकू के कारण स्वास्थ्य और पर्यावरण पर हो रहे व्यय को उसूला जा सके. कॉर्पोरेट एकाउंटेबिलिटी इंटरनेशनल की विशेषज्ञ क्लोए फ्रांको ने कहा कि अब तक बहुत कम देशों ने उन सिद्धांतों से लाभ उठाया है जो इस संधि के आर्टिकल 19 में प्रतिष्ठापित हैं. उदहारण के तौर पर कनाडा के धूम्र्पानियों ने 17 साल की कानूनी लड़ाई के बाद तम्बाकू उद्योग से 15 बिलियन डालर का हर्जाना उसूला. 

तम्बाकू नियंत्रण पर कार्य गंभीर रूप से असंतोषजनक 
हर तम्बाकू जनित रोग से बचा जा सकता है. हर तम्बाकू जनित मृत्यु असामयिक है. इंडियन कौंसिल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च की निदेशिका डॉ सौम्य स्वामीनाथन ने कहा कि 30% कैंसर तम्बाकू से होते हैं जिनसे बचाव मुमकिन है. आशा परिवार के स्वास्थ्य को वोट अभियान के निदेशक राहुल द्विवेदी ने कहा कि अनेक चुनौतियों के बावजूद सरकार ने तम्बाकू नियंत्रण के लिए कदम तो उठाये हैं पर यदि तम्बाकू महामारी को देखें तो यह पर्याप्त नहीं हैं. तम्बाकू जनित कारणों से अधिक लोग मृत हो रहे हैं और तम्बाकू कंपनी ने जनवरी-मार्च 2017 में अधिक मुनाफा कमाया. भारत ने तम्बाकू नियंत्रण नीति और कानून तो सशक्त है पर अब यह भी मूल्यांकन होना चाहिए कि क्या हम हर तम्बाकू व्यसनी तक तम्बाकू नशा उन्मूलन सेवा पहुंचा पा रहे हैं? यदि तम्बाकू व्यसनी नशा नहीं छोड़ेंगे तो कैसे तम्बाकू-जनित असामयिक मृत्यु दर में गिरावट आएगी? जो बच्चे, युवा या अन्य व्यसक लोग तम्बाकू सेवन आरंभ कर रहे हैं क्या हम उनको रोक पाने में सक्षम हैं? यदि तम्बाकू सेवन आरंभ करने वाले नए लोगों के दर में गिरावट नहीं आएगी तो तम्बाकू जनित रोगों और मृत्यु दर में गिरावट कैसे आएगी? हमारी स्वास्थ्य व्यवस्था इतनी सशक्त होनी चाहिए कि तम्बाकू जनित जानलेवा रोगों के प्रारंभिक लक्षण को सही जांच द्वारा चिन्हित करे, उचित इलाज करे. यदि हम ऐसा करने में नाकाम होंगे तो तम्बाकू जनित रोग और मृत्यु दर भी कम नहीं होगा.
लोरेटो कान्वेंट की पूर्व वरिष्ठ शिक्षिका और सीएनएस की अध्यक्ष शोभा शुक्ला ने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति और सतत विकास लक्ष्य पूरे करने के लिए यह आवश्यक है कि आकास्मक रूप से सख्त और ठोस कदम उठाये जाएँ जिससे कि तम्बाकू महामारी समाप्त हो, और विकास के सभी मानकों पर हम बिना अवरोध प्रगति करें. 
समाचार संपादन - तौहीद रजा 

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