सीधी-फिर हुई इन्सानियत शर्मसार बांस बल्ली में शव को लटकाकर घर ले गए परिजन ।

पांच किलोमीटर बांस बल्ली से शव लेकर जिला चिकित्सालय पहुंचे परिजन

  • फांसी लगाने से घर में हुई युवक की मौत, शव वाहन तो दूर नहीं मिली ठेलिया
  • पीएम के बाद भी बांस बल्ली में ही शव को लटकाकर घर ले गए परिजन
  • मामला शहर से सटे ग्राम ग्राम पंचायत पडऱा का
सीधी से सुभाष तिवारी।। सीधी जिले में एक सवाल नासूर बन चुका है! आखिर शव को कंधे से ढोने से कब मुक्ती मिलेगी। आए दिन हरिजन व आदिवासियों के द्वारा गरीबी के कारण निजी शव वाहन की बुकिंग करने में अक्षम होने के कारण उन्हें बांस बल्ली के सहारे शव को ढोना पड़ रहा है। शव को ढोने के लिए चार लोगों की जगह एक बांस व पोटली में बांधकर दो लोग जिला चिकित्सालय चीर घर पहुंच रहे हैं, पोस्ट मार्टम के बाद भी शव वाहन नहीं नसीब हो जाने के कारण फिर उसी तरह बांस के सहारे ही शव को घर ले जाने के लिए परिजन मजबूर है। ऐसा ही मामला शनिवार को सीधी शहर से सटे ग्राम पंचायत पडऱा में सामने आया जहां परिजन को को पांच किमी दूर जिला चिकित्सालय बांस के सहारे शव को लाने व दोबारा उसी तरह घर ले जाने को मजबूर दिखे। 
जिले में शव वाहन की उपलब्धता न के बराबर है। जिला चिकित्सालय में पूर्व सांसद गोंविद मिश्रा के द्वारा उपलब्ध कराया गया शव वाहन कंडम हो चुका है। इसके अलावा धौहनी विधायक कुंवर सिंह टेकाम के द्वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को एक शव वाहन उपलब्ध कराया गया किंतु उसे संचालित करने के लिए अस्पताल प्रवंधन चालक की व्यवस्था नहीं सुनिश्चित कर पा रहा है। वहीं अभी बीते दिन बहरी में नीलकंठ ट्रस्ट के द्वारा अपसी चंदा कर शव वाहन उपलब्ध कराया गया किंतु हैरत की बात यह है कि जिला चिकित्सालय में ही शव वाहन की उपलब्धता नहीं है। जिसके कारण मृतको का शव परिजन कंधे पर ढोने को मजबूर हैं।

फांसी लगाने से हुई युवक की मौत

पडऱा निवासी नरेश कोल पिता छठिलाल कोल ३३ वर्ष अपने ससुराल गया था, जहां से अपनी पत्नी को वापस लेकर शुक्रवार को घर आया। पति-पत्नी के बीच आपस में क्या बात हुई इसकी परिजनों को जानकारी नहीं है। इस बीच नरेश कोल शराब का सेवन किया और गले में फांसी का फंदा लगा लिया। शनिवार की सुबह परिजनों के द्वारा युवक को फांसी पर लटकते देखा गया। जिसकी सूचना कोतवाली पुलिस को दी गई। पुलिस स्थल पर पहुंचकर पंचनामा तैयार कर शव को फंदे से उतारा गया। जिसे पीएम घर ले जाने को लिए बोला गया किंतु वाहन की व्यवस्था न हो पाने के कारण परिजन शव को पोटली में बांधकर जिला चिकित्सालय लाए, जहां पीएम के बाद भी शव वाहन नहीं नसीब हुआ तो फिर बांस के सहारे की उसे घर तक वापस ले गए।
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