तो क्या ऐसे ही साकार होगा "नए भारत" का सपना?


अब्दुल रशीद।।आजादी की 70वीं वर्षगाँठ पूरे उत्साह के साथ देश में जोश-खरोश से मनाया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से देशवासियों को संबोधित किया।उनका भाषण पिछले भाषणों के मुकाबले छोटा और देश के आंतरिक मुद्दों पर आधारित रहा। प्रधानमन्त्री बनने के बाद जब पहली बार उन्होंने स्वाधीनता दिवस पर देश को संबोधित किया था तो उस समय उनके भाषण में एक नयापन था। राजनीतिक बातों को कम तवज्जो देकर, उन्होंने बालिका सशक्तीकरण, साफ-सफाई और कम से कम दस साल के लिए जाति व धर्म के झगड़े भुला कर विकास में सहयोग देने की अपील की थी और खुद को प्रधान सेवक के रुप में पेश किया था। लेकिन अब उनकी सरकार को तीन साल से ज्यादा हो गए हैं। इसलिए लोग अब सरकार के मुखिया की बातों को सरकार के कामों से जोड़ कर देखती हैं। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में नए भारत का सपना दिखाया, यह सपना 2022 में जाकर साकार होगा! 2014 के चुनावी वादों को जुमला करार दे दिया गया है ऐसे में देश की जनता के मन में अहम सवाल यह है कि मोदी सरकार ने इस दिशा में अभी तक क्या किया है और क्या करने वाले है। 2014 में देश की जनता ने नए भारत के लिए ही सरकार को पांच साल का जनादेश दिया था, क्या हुआ यह बताने के बजाय अब अगले आम चुनाव के बाद की बातें की जा रही हैं!

यक़ीनन सरकार द्वारा कुछ उपलब्धियां गिनाई जा सकती हैं।जैसे,महंगाई आंशिक रूप से काबू में रही है, नोटबंदी,काले धन के खिलाफ मुहिम चली, जो अब भी जारी है, जीएसटी के रूप में एक नई कर-व्यवस्था लागू हुई, वंचित परिवारों को उज्ज्वला योजना के तहत रसोई गैस कनेक्शन मिला,लाखों लोगों ने स्वेच्छा से गैस सबसिडी छोड़ दी। योग को हर साल अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मानाने के लिए संयुक्त राष्ट्र को राजी किया जा सका, आदि। लेकिन कई अहम मुद्दों पर मोदी सरकार द्वारा कोई प्रभावशाली ठोस कदम नहीं उठाया गया । उन्होंने मृदा स्वास्थ्य कार्ड पाने वाले किसानों की संख्या तो बताई, पर किसानों की खुदकुशी के तथ्य पर कुछ नहीं कहा। उन्होंने 2022 तक किसानों की आय दुगुनी हो जाने का सपना तो दिखाया, पर यह नहीं बताया कि किसानों को उनकी उपज का वाजिब दाम कब मिलेगा। उनका और उनकी पार्टी का ही वायदा था कि सत्ता में आने पर वे किसानों को उपज का लागत से डेढ़ गुना दाम दिलाएंगे। यह वादा कब पूरा होगा? प्रधानमंत्री ने स्वच्छ और स्वस्थ भारत बनाने की बात तो की लेकिन स्वास्थ्य और स्वच्छता के लिए उठाए गए कदमों की जमीनी हकीक़त क्या है नहीं बताई ।जहां स्वच्छता अभियान महज फोटोग्राफी इवेंट बनकर रहा गया वहीँ गोरखपुर में आक्सीजन की कमी से हुई बच्चों की मौतों ने स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल दी।

प्रधानमन्त्री ने अपने भाषण में गोरखपुर के हृदयविदारक घटना को प्राकृतिक आपदा के रूप में व्यक्त किया,उत्तर प्रदेश सरकार इस मामले में लीपापोती करती दिखी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कहते हैं कि इतने बड़े देश में यह सब होता रहता है, तो ‘चलता है’ नहीं चलेगा का मतलब क्या? कश्मीर समस्या का समाधान न गाली से होगा न गोली से, बल्कि हर कश्मीरी को गले लगाने से होगा। सवाल यह है कि भाजपा में अलग अलग बयान से बातचीत का माहौल तो नहीं दिख रहा तो अबतक काश्मीर मसलों को सुलझाने के लिए सरकार ने क्या पहल किया है ? आस्था के नाम पर हिंसा स्वीकार नहीं किया जा सकता है। लेकिन यह बात भी सत्य है कि उनकी सरकार बनने के बाद ही गोरक्षा के नाम पर भीड़ बना कर की जाने वाली हिंसा बढ़ी? विकास के नाम पर चुनावी जंग जीतने वाली सरकार के विकास दर पर अर्थशास्त्रीयों कि राय उत्साहित करने वाला नहीं हैं।2014 के चुनाव में बढ़ चढ़कर भाग लेने वाले युवाओं को दो करोड़ रोजगार देने का वादा था,अब मुद्रा लोन योजना के तहत स्वरोजगार की बात हो रही है। बेटी पढ़ाओ  बेटी बचाओ को महत्वपूर्ण मानने वाली सरकार को बेटियों का कितना ख्याल है बीते दिनों  पार्टी कार्यकर्ताओं के सपूतों के हरकत और उस पर दिए गए बयानों से पता चलता है । तो क्या ऐसे ही साकार होगा ‘नए भारत’ का सपना ?
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