रिलायंस विस्थापित कालोनी के बैगा बस्ती मे बिमारी से अब तक चार की मौत


ब्यूरो@उर्जांचल टाइगर (सिंगरौली)।। कहते हैं हांथी के दांत दिखाने और खाने के अलग अलग होते हैं ,ठीक उसी तर्ज पर सरकारी लफ़्फ़ाज़ी है दावा तो आदिवासियों के कल्याण का और जमीनी हक़ीक़त शून्य। कारपोरेट जगत के गोद में बैठकर आदिवासियों के कल्याण की बात का का क्या मायने है पुछिए भूख बेरोजगारी और बीमारी से अपनी जान गंवाने वाले आदिवासियों से जिन्हें विकास के नाम पर ठगा गया है। जी हां मैं बात कर रहा हूँ मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले के वासी बैगा जनजाति की जो भूखो मरने के कगार पर है।

रामदास बैगा,नंदलाल बैगा,बालक दास बैगा,रामनिवास बैगा की माने तो वह अच्छी खासी जिंदगी व्यतीत कर रहे थे जंगल मे ,आमलोरी के भुईहारी(झरिया)बस्ती मे जहाँ से हमलोगों को रिलायंस कोल माइंस द्वारा विस्थापित किया गया । लेकिन विस्थान के बाद विस्थापन की शर्तों को कंपनी द्वारा नहीं निभाया गया। आज हम आदिवासी बैगा जनजाति के सैकड़ों लोग दाने दाने को मोहताज है उक्त कम्पनी ने घर जमीन भी ले लिया हम लोगो को जीवकोपार्जन के लिये ठेका मे भी अस्थायी काम नही मिल रहा । हक़ मांगे जाने पर कम्पनी के लोग अनसुना कर बाहर का रास्ता दिखा देते हैं। हालात यह हो गई है की पैसा नही होने के वजह से दवा के अभाव मे हमलोगों के बस्ती मे लगातार चार बच्चो की मौत हो गई ।

बतादे की जिला कलेक्टर ने विगत दिवस स्वास्थ्य विभाग को एलर्ट करते हुये यह फरमान जारी किया था कि जिले मे कही भी डायरिया व मलेरिया फैलने की सूचना मिलते ही स्वास्थ्य टीम प्रभावित गाँव मे पहुँच कर उपचार करे इसके अलावा स्वास्थ्य केन्द्रों मे दवा का पर्याप्त भंडारण कराये ,यदि मलेरिया ,डायरिया से किसी की भी मौत हुई तो मैदानी कर्मचारीयो के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही की जायेगी। लेकिन ऐसे फ़रमान गरीबों की बस्तियों में आकर दम तोड़ देती है। मुख्यालय से लगभग 8किलोमीटर दूर स्थित रिलायंस विस्थापित कालोनी कृष्णविहार नौगढ़ वार्ड क्रमांक 45 के बैगा बस्ती मे बुखार से पीडित लोगो की एक , एक कर मौते होती जा रही है।

जिसकी जानकारी लगातार सोसल मीडिया व अखबार तथा लिखित दी जा रही है ।लेकिन अभी तक उक्त बस्ती मे न तो स्वास्थ्य महकमा पहुँचा नही उनकी सुधि लेने कोई जिम्मेदार अधिकारी पहुँचे यहाँ तक की उनकी खोज खबर लेने कम्पनी के लोग भी नही पहुँचे। उक्त बिमारी से बैगा बस्ती मे विगत दिवस लगातार तीन मौते हो चुकी थी, की दस्त बुखार से एक और लगभग 14 साल की बच्ची गेंदकुंवर पिता रामदास की मौत हो गई ।परिजनों के अनुसार अभी तक बैगा बस्ती मे बिमारी से ग्रसित दवा के अभाव मे लगातार चार मौते हो चुकी न जाने कब जागेगा प्रशासन।बस्ती मे बीमारियाँ बढ़ती जा रही है कोई देखने व सुनने वाला नही है। विस्थापितों की माने तो रिलायंस ने विस्थापितों के लिये एक स्वास्थ्य केन्द्र तो खुलवाया है लेकिन उसमे न तो दवा का पता है न ही डाक्टर बैठते जब लोग जाते है तो हमेशा वह बंद ही मिलता है ।उक्त मामले को लेकर विस्थापित बैगा जनजाति के लोगो ने जिला कलेक्टर का इस ओर ध्यान आकृष्ट कराते हुये उचित कदम उठाने की माँग कि है। जिससे बिमारी से हो रही मौतों को रोका जा सके ।

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