बटवारे की कहानी आंकड़ों की जुबानी

बटवारे की कहानी आंकड़ों की जुबानी

न्यूज डेस्क।। 15अगस्त 1947 को भारत को 200 सालों की अंग्रेजी हुकूमत से आजादी मिली लेकिन विभाजन की दर्द के साथ। जल्दबाजी में खींची गयी सीमा की लकीरों ने स्थानांतरण का सिलसिला शुरू किया जिसकी दूसरी मिसाल दुनिया में बहुत ही कम ही देखने को मिलती है। हंगामा, अफरातफरी, हिंसा और अव्यवस्था की आंधियों के बीच पाकिस्तान का जन्म हुआ और ना जाने कितनी त्रासदियों शुरू हुई। आईए बटवारे की त्रासदियों को आंकड़ों की नजर से समझते हैं।

अंग्रेजी हुकूमत 200 साल

1612 में ईस्ट इंडिया कंपनी भारत आए, तब देश के एक बड़े हिस्से में मुगल शासन था और शासक था जहांगीर। यहां से कारोबारी रिश्ते की शुरुआत कर ईस्ट इंडिया कंपनी पूरे भारत पर हुकूमत करने लगी। 1857 के विद्रोह के बाद हुकूमत सीधे ब्रिटिश राज के हाथ में चली गई।

संग्राम के 90 साल

1857 के विद्रोह को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की पहली बड़ी घटना माना जाता है। अंग्रेज सरकार इस विद्रोह को दबाने में कामयाब रही लेकिन भारतीयों के मन में इसकी चिंगारी सुलगती रही। पूरे 90 साल तक छोटे बड़े हिंसक और अहिंसक आंदोलनों का परिणाम 1947 में भारत आजाद हुआ।

सीमा रेखा-2,897 किलोमीटर

ये उस सीमा रेखा की लंबाई है जो भारत और पाकिस्तान को विभाजित करती है। इसमें कुछ हिस्सा अब भी विवादित है। भारत और पाकिस्तान के बीच 1947 में जो रेखा खींची गयी वो धर्म की थी। बहुत सारे मुस्लिम पाकिस्तान चले गये जबकि हिंदू भारत के हो कर रह गये।

1.2 करोड़ लोगों विस्थापन

ये संख्या उन लोगों की है जो इस विभाजन के कारण जिन्हें अपना घर छोड़ना पड़ा। इतिहासकारों की माने तो इसे दुनिया में सबसे बड़ा विस्थापन कहा जा सकता है। उस समय जब लोगों सीमा पार कर रहे थे तब ये कतारें कई कई किलोमीटर लंबी थीं।

2-10 लाख लोग मारे गये।

विभाजन का एलान होने के बाद हुई हिंसा में कितने लोग मारे गये, इसे लेकर अलग-अलग आंकड़े हैं। आमतौर पर इसकी संख्या 5 लाख बतायी जाती है। हालांकि ये संख्या सही सही नहीं बतायी जा सकती। दो लाख से 10 लाख के बीच लोगों की मौत हुई। इसके अलावा 75 हजार से 1 लाख महिलाओं का बलात्कार और हत्या के लिए अपहरण हुआ।
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