गोरखपुर-30दिन में 290 बच्चों की मौत




गोरखपुरगोरखपुर स्थित बाबा राघवदास मेडिकल कालेज में इस महीने अब तक 290 बच्चों की मौत हो चुकी है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार पिछले रविवार और सोमवार को नवजात सघन चिकित्सा कक्ष(एनआईसीयू) में 26 तथा इंसेफेलाइटिस वार्ड में 11 समेत कुल 37 बच्चों की मृत्यु हुई है। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉक्टर पी. के. सिंह ने बताया कि इस वर्ष अब तक इंसेफेलाइटिस, एनआईसीयू तथा सामान्य चिल्ड्रेन वार्ड में कुल 1250 बच्चों की मौत हो चुकी है। इस माह 28 अगस्त तक एनआईसीयू में 213 और इंसेफेलाइटिस वार्ड में 77 समेत कुल 290 बच्चे मरे हैं। सिंह का कहना है कि एनआईसीयू में ज्यादा गंभीर हालत वाले बच्चे, जिनमें समय से पहले जन्मे, कम वजन वाले, पीलिया, निमोनिया और संक्रामक बीमारियों से ग्रस्त बच्चे इलाज के लिए आते हैं, जबकि इंसेफलाइटिस से पीड़ित बच्चे भी ऐन वक्त पर इसी अस्पताल में गंभीर स्थिति में पहुचते हैं।



उन्होंने कहा कि अगर बच्चे समय से इलाज के लिए आयें तो बड़ी संख्या में नवजात बच्चों की मौत रोकी जा सकती है। अपर स्वास्थ्य निदेशक कार्यालय से प्राप्त आंकड़े बताते हैं इस वर्ष जनवरी में एनआईसीयू में 143 और इंसेफेलाइटिस वार्ड में नौ बच्चों की मृत्यु हुई। इसी प्रकार फरवरी में क्रमश: 117 तथा पांच, मार्च में 141 तथा 18, अप्रैल में 114 तथा नौ, मई में 127 तथा 12, जून में 125 तथा 12, जुलाई में 95 एवं 33 और अगस्त माह में 28 तारीख तक 213 तथा 77 बच्चों की मौत हुई है।

वहीं मेडिकल कॉलेज में हुए इस दुखद हादसे को लेकर जिम्मेदार मेडिकल कॉलेज के निलंबित प्रिंसिपल डॉ. राजीव मिश्रा और उनके कामकाज में हस्तक्षेप कर ऑक्सीजन वेंडरों से रिश्वत वसूलने वाली उनकी पत्नी पूर्णिमा शुक्ला को यूपी एसटीएफ ने मंगलवार को हिरासत में ले लिया। यह जानकारी यूपी पुलिस के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने दी। आईजी विजय सिंह मीणा ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि दोनों आरोपी कानपुर में छिपे हुए थे। दोनों को एसटीएफ ने हिरासत में लिया है। उन्हें अदालत में पेश किया जाएगा और पुलिस हिरासत में सौंपने की मांग की जाएगी। अदालत से आदेश मिलते ही दोनों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

प्रिंसिपल और उनकी पत्नी कई दिनों से कानपुर में एक अधिवक्ता के घर पर ठहरे थे, लेकिन पुलिस ने सर्विलांस की मदद से दोनों को ढूंढ़ निकाला। प्रिंसिपल की पत्नी पूर्णिमा शुक्ला गोरखपुर की सीनियर होमियोपैथिक मेडिकल ऑफिसर के पद पर थी। पति-पत्नी दोनों ऑक्सीजन कांड के बाद से फरार थे। दोनों को पकड़कर लखनऊ ले जाया गया है।
गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कलेज में अगस्त के दूसरे हफ्ते में छह दिनों में 63 लोगों की मौत हो गई थी। 10 और 11 अगस्त को 30 बच्चों की मौत ऑक्सीजन की आपूर्ति रोक दिए जाने से हो गई थी। इस हृदयविदारक घटना के बाद चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक के.के. गुप्ता ने लखनऊ के हजरतगंज थाने में 23 अगस्त को सात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी, जिनमें प्रिंसिपल और उनकी पत्नी के नाम भी शामिल हैं।



प्राथमिकी में बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की सप्लाई करने वाली फर्म पुष्पा सेल्स के संचालकों के अलावा कई कर्मचारियों व डाक्टरों को भी नामजद किया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बच्चों की मौत के मामले में मुख्य सचिव राजीव कुमार को जांच का जिम्मा सौंपा था। उन्होंने जांच के बाद अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंप दी थी। इसके बाद चिकित्सा शिक्षा की अपर मुख्य सचिव अनीता भटनागर जैन को पद से हटा दिया गया था।
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