CM योगी के गढ़ गोरखपुर में 30 बच्चों की तड़प-तड़पकर मौत


क्या योगी राज में बच्चों की जिन्दगी कि अहमियत नहीं?
न्यूज डेस्क ।।१९६९ में बने उत्तर प्रदेश के गोरखपुर ज़िले के बीआरडी मेडिकल कॉलेज के चाइल्ड डिपार्टमेंट में ये मौतें बीते 36 से 48 घंटे के दौरान हुईं।
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार गोरखपुर के ज़िलाधिकारी राजीव रौतेला का कहना है कि पिछले 48 घंटों में अलग-अलग कारणों की वजह से 30 बच्चे मारे गए हैं।

मृत्यु की खबर भ्रामक है 

उत्तर प्रदेश सरकार के ट्विटर हैंडल से किए गए ट्वीट में अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी के कारण मरीज़ की मौत को भ्रामक बताया गया है।
उत्तर प्रदेश सरकार के ट्विटर हैंडल के ट्वीट में कहा गया है,'' गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी से किसी रोगी की मृत्यु नहीं हुई है।"
इसके बाद किए गए एक और ट्वीट में कहा गया है, ''कुछ चैनलों पर चलाई गई ऑक्सीजन की कमी से पिछले कुछ घंटों में अस्पताल में भर्ती कई रोगियों की मृत्यु की खबर भ्रामक है।"
ये भी कहा गया है, ''जिलाधिकारी अस्पताल में मौजूद रहकर स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।''

मुख्यमंत्री महोदय खामियों को नहीं देख पाए  

9 अगस्त को योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर का दौरा किया था। वे इस अस्पताल भी आए। लेकिन उन्होंने वही देखा जो प्रशासन ने उन्हें दिखाया। अस्पताल के बत्तर हालात को मुख्यमंत्री नहीं देख पाए जिसेसे निजात दिलाने का वादा उन्होंने किया था और जनता ने उनके वादों पर भरोसा किया था। वे नहीं जान पाए कि ऑक्सीजन सप्लाई का पेमेंट महीनों से बकाया है।

बच्चों की मौत हर रोज़ होती है।

गोरखपुर मेडिकल कॉलेज के इस वॉर्ड में हर साल हज़ारों की संख्या में इंसेफ़ेलाइटिस के मरीज़ आते हैं और उनमें से कई मरीजों की मौत हो जाती है। इनमें से ज़्यादातर बच्चे होते हैं.अस्पताल सूत्र से मिली जानकारी के अनुसार नवजात शिशुओं और इंसेफ़ेलाइटिस के इन वॉर्डों में सामान्य तौर पर 8-10 बच्चों की मौत हर रोज़ होती है.सीएमओ डॉक्टर रवींद्र कुमार का कहना था कि नवजात शिशु वॉर्ड में चौदह और इंसेफ़ेलाइटिस वॉर्ड में चार बच्चों की मौत हुई है.उनके मुताबिक, "नवजात शिशु वॉर्ड में एक से चार दिन तक के बच्चे गंभीर अवस्था में भर्ती होते हैं और उनकी मृत्यु दर काफी ज़्यादा होती है, इसे ऑक्सीजन सप्लाई की वजह से नहीं जोड़ा जाना चाहिए और न ही ऐसा हुआ है."
लेकिन डीएम रौतेला ने मीडिया से बातचीत में साफ़ तौर पर बताया कि अस्पताल में ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली एजेंसी ने क़रीब सत्तर लाख रुपये बकाया होने के कारण सप्लाई रोकने की चेतावनी दी थी, बावजूद इसके अस्पताल प्रशासन ने इसकी जानकारी किसी को नहीं उपलब्ध कराई।

सीओ के पैर पकड़ बोली मां- साहब, बॉडी दिला दो

मेडिकल कॉलेज में एक के बाद एक लगातार हो रहीं मौतों के बीच हर ओर बेबसी का आलम था। यहां 9 दिन के एक बच्चे की भी मौत हुई। जब पिता ने बॉडी मांगी तो कहा गया कि अधिकारियों के जाने के बाद देंगे। इसी बीच, बच्चे की मां ने सीओ रचना मिश्रा के पैर पकड़कर कहा, 'साहब, बच्चा तो मर गया। अब उसकी बॉडी तो दिला दो।' बच्चे के पिता नंदलाल ने कहा, 'ऑक्सीजन की कमी से 9 दिन के बाद मेरा बच्चा मर गया।' करीब 4 घंटे बाद सीओ के कहने पर उन्हें बॉडी मिली।

कार में रख दोस्तों से सिलेंडर लाते रहे डॉ. कफील

ऑक्सीजन संकट के बीच कुछ डॉक्टर भी दिन-रात जूझते रहे। रात 2.00 बजे इंसेफेलाइटिस वार्ड के प्रभारी डॉ. कफील खान अस्पताल पहुंचे। सुबह 7.00 बजे तक जब किसी बड़े अधिकारी और गैस सप्लायर ने फोन नहीं उठाया तो अपनी कार लेकर निकल पड़े। प्राइवेट अस्पतालों में डॉक्टर दोस्तों से मदद मांगी। कार से 12 सिलेंडर लाए। फिर एक कर्मचारी की बाइक पर एसएसबी के डीआईजी के पास पहुंचे। वहां से 10 सिलेंडर लाए। सिलेंडर ढोने के लिए एसएसबी ने ट्रक भी भेजा।
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