सोशल और पोर्टल मीडिया की आड़ में पुलिस की दलाली और जालसाजी का धंधा - एस.एन.श्याम

मुकेश कुमार (स्टेट हेड बिहार) पटना(बिहार)। सूबे बिहार में इन दिनो सोशल,पोर्टल,वेव मीडिया की आड़ में जालसाजी का धंधा खूब फल फूल रहा है।राजधानी पटना सहित सूबे के विभिन्न जिलों में यह धंधा चरम पर है।इस हालत में यह जालसाज पत्रकार और पत्रकारिता को बदनाम तो कर ही रहे है साथ ही इस पेशे की गरिमा को कलंकित रहे है।यह उपर्युक्त बातें बिहार प्रेस मेंस यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष एस. एन. श्याम ने पत्रकारों के विषय पर चर्चा करते हुए कही।उन्होंने कहां की गौरतलब है की ऐसे मीडिया के तथाकथित पत्रकारो को न तो कोई वेतन मिलता है और न कोई सुविधा।इसके बावजूद इलेक्ट्रोनिक मीडिया की तरह इनके हाथो में लोगो भी होता है।ऐसे छदम एजेंसी को ना तो भारत सरकार के यहां से उपर्युक्त महकमें से किसी तरह की अनुमति मिली है और ना ही बिहार सरकार के पास इनके संस्थान से संबंधित कोई भी वैध कागजात उपलब्ध है।ऐसे फर्जी संस्थान के लोगो द्वारा न्यूज़ का लिंक भेजकर खुद को एजेंसी व कंपनी के रूप में स्थापित करने का निरंतर प्रयास किया जाता रहा है।ये लोग अपने को न्यूज़ एजेंसी भी बताते है।नेताओ की दलाली व पुलिस की मुखबिरी,समाचार के नाम पर अवैध वसूली यही इनका धंधा बन चुका है।ऐसे जालसाज मीडियाकर्मियों के कारण ही पत्रकारिता में भीड़ बढ़ गई है।

बिहार प्रेस मेंस यूनियन के अध्यक्ष एस.एन.श्याम ने बिहार पुलिस के डीजीपी और सूबे के सभी एसपी से शराब माफिया और बालू माफियाओ की तरह इन जालसाज मीडिया माफियाओ के खिलाफ भी अभियान चलाने की मांग की है।
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