ग़ाज़ीपुर से वर्षो पहले राष्ट्रीय खेल हॉकी हुआ लुप्त

ग़ाज़ीपुर से मो० शहाबुद्दीन खाँ।। उत्तर प्रदेश के जिला ग़ाज़ीपुर एक वीरो की धरती के साथ-साथ खेलो की दुनिया मे भी हमेशा से अवल माना जाता है। चाहे वो हमारी देश की राष्ट्रीय खेल हॉकी की हो या तो फ़िर अन्य खेलो की, परंतु आज मुझे बड़ी अफ़सोस के साथ ये बताना पड़ रहा है कि आज हमारे छेत्र मे और हमारे बीच हॉकी का सेकंड मुस्लिम ध्यांनचंद्र कहे जाने वाले होनहार युवा महान जोनल हॉकी खिलाड़ी शहीद बदरूद्दीन खान के मौत के बाद आज हमारे जिले के गाँव-छेत्रो से राष्ट्रीय खेल हॉकी लुप्त हो गया है। परंतु आज 29 अगस्त यानी राष्ट्रिय हॉकी खेल दिवस है, जो आज भारत को अंतराष्ट्रीय हॉकी मे तीन बार गोल्ड मैडल दिलाने वाले हॉकी के जादूगर कहे जाने वाले महान पदम् विभूसण खिलाड़ी मेजर ध्यांनचंद्र का जन्म दिवस पर पूरे भारत मे रास्ट्रीय हॉकी खेल दिवस के रूप मे धूम-धाम से मनाया जाता है। लेकिन आज मै उसी दौर की एक सच्ची हॉकी खेल असहनीय मौत घटना से रूबरू कराता हूँ..? हमारे जिला ग़ाज़ीपुर के खित्ते 'कमसार-व-बार' मे मौज़ा गोड़सरा गाँव के एक जमींदारी परिवार के रहने वाले एक होनहार युवा महान हॉकी खिलाड़ी बदरूद्दीन खान थे। जिनकी हॉकी स्टीक मे तो जादू तो नही लेकिन उनके हाथों और चालों मे फनकारी तो जरूर थी, तभी तो वह बहोत ही कम अरसे मे इस कमसारोबार खित्ते और अपने जिले से दूर-दराज तक जाकर हॉकी खेल प्रेमियो का हीरो बनता जा रहा था। परंतु उस होनहार युवा महान खिलाड़ी की हॉकी स्टीक की रफ़्तार अचानक थम जाती है। बदरूद्दीन खान का जन्म 02/07/1933 ई० को गोड़सरा के 'हाता' नामक स्थान पर एक ज़मीनदारी परिवार मे हुआ था। इनके पिता का नाम मो०मोहिउद्दीन उर्फ़ मोहा खान तहसीलदार तथा माता का नाम मरीयम बीबी था। घटना है..!! 20 जनवरी 1955 ई० की जब बदरूद्दीन अपने पुशतैनी कॉलेज गाँधी मेंमोरियाल इंटर कॉलेज दिलदारनगर मे कक्षा - 11 वी की पढ़ाई कॉमर्स स्ट्रीम से पढ़ रहे होते है। तथा उस दरमियान बनारस जोन के ज़ानिब से पहली मर्तबा ग़ाज़ीपुर के दिलदारनगर स्थित मुस्लिम राजपूत (वर्तमान मे 'एस०के०बी०एम' कॉलेज) इंटर कॉलेज ग्राउंड पर 'ज़ोनल हॉकी टूर्नामेंट' मैच का फाइनल मुकाबला 'हिंदू इंटर कॉलेज' जमानिया और बदरूद्दीन की कॉलेज हॉकी टीम 'गाँधी मेंमोरियाल इंटर कॉलेज दिलदारनगर के बीच खेला गया। मैदान दरसको से पूरा खच्चा-खच्च भरा हुआ था। खेल शुरू होने वाला ही था। सबकी नज़र गाँधी मेंमोरियाल इंटर कॉलेज दिलदानगर के होनहार युवा हॉकी फारवर्ड ख़िलाड़ी बदरूद्दीन पर टिकी पड़ी थी। खेल सुरु होते ही हाफ-टाइम तक दोनों टीमो के बीच एक भी गोल नही हुई। परंतु, जैसे ही दूसरी पारी का खेल शुरू हुआ, बदरुद्दीन के हॉकी स्टीक मे गेंद आ टकराती है ओर बदरूद्दीन ने अपने जादुई हॉकी स्टिक से हवा के माफिक गेंद को नचाते हुए विरोधी टीम के गोल पोस्ट मे सीधे गोल कर देते है। ख़ुशी के मारे पूरा मैदान बदरूद्दीन-बदरूद्दीन गूंज उठता है परंतु उसी समय जब बदरूद्दीन अपने गोल पोस्ट के ज़ानिब वापस लौट रहे होते है तो विरोधी टीम के बैक पर खड़ा उचे-लंबे कद का एक हॉकी ख़िलाड़ी ने पीछे से उनके सिर पर हॉकी स्टीक द्वारा धोखे से वार कर देता है। जो इस खेल जगत को शर्मसार करता है। जिससे वो विहोश होकर मैदान मे वही गिर पड़ते है और मैदान मे भगदड़ मच जाती है। मोके का फायदा उठा विरोधी टीम वहा से भाग निकलती है। उसके बाद फौरन बदरूद्दीन को विहोशी की हलात में डॉ० श्याम नारायण चतुर्वेदी दिलदानगर के पास लाया जाता है। जिन्होंने एक टेटनेस की सुई लगाकर बनारस किंग एडवर्ड(वर्तमान शिव प्रसाद) हॉस्पिटल बनारस कबीर चौरा को रेफर्ड कर देते है। जहां पर तीन दिनों बाद 23/01/1955 ई० को उनकी बेहोशी की ही हलात मे मौत हो जाती है। इन्ना लिल्लाहे व इन्ना अल्लीहे राजिउन्न। उसके बाद उनके सव को एस.के.बी.एम. के प्रथम मैनेजर ज़नाब हाजी शमसुद्दीन खान दिलदारनगरी और उनके तमाम खेल साथियों द्वारा सफ़ेद कार से जमानिया-दिलदारनगर गाँव के रास्ते 'एस०के०बी०एम०' कॉलेज दिलदारनगर के उसी ग्राउंड पर लाया जाता है जहाँ पर वो चोटिल हुए थे। उस ग्राउंड का चारो तरफ़ चार चक्कर लगा फूल 'मेलेट्री गार्ड ऑफ़ ऑनर्स' के साथ उनके वालदाह मरीयम बीबी से आजजी लेकर कॉलेज प्रबंधक ज़नाब हाजी शमसुद्दीन खाँ और सदर डिप्टी मो०सईद खाँ और महमूद खाँ की सदारद में उसी कॉलेज मैदान मे सय्यद बसीर मियां गोड़सरावी द्वारा जनाज़े की नमाज़ पढ़ा, हज़ारो लोगों के हुजूम के बीच तकरीबन रात 8 बजे उनके सव को उसी खेल रणभूमि में दफ़न कर दिया जाता है। उसके बाद उनके यादगार मे उनके नाम से कॉलेज प्रबंधक शमसुद्दीन खाँ और सदर डिप्टी सईद के सदारद में बदरूद्दीन मेंमोरियाल 'हॉल और लाइब्ररी' बिश्मिल्लाह खाँ बारावी के हाथो 21/12/1957 ई० को हुआ। इसके अलावा उनकी मज़ार शरीफ़ का निर्माण और फातिया-कुर्रानखानी-गोस्टिया इतियादि भी की गई। तथा, उनके नामो से उनके पैतृक गाँव गोड़सरा मे 'बी०एम०सी०' स्पोर्ट्स क्लब भी है जो आज भी सभी खेलों में अपने कमसारोबार खित्ते के अलावा जिले के दूर-दराज जगहो तक जाकर सभी खेलों मे अमली जामा पहनाया करते है। अतः उनके नाम से गांव मे प्रॉपर अनेको खेल गोष्टीया और उनके नाम से हर नये साल मे 23 जनवरी को बरसी के रूप मे उनके परिवार द्वारा आज भी मनाया जाता है। आज उनके सभी साथियों का कहना है कि वो बहोत ही नेक और एक दरियादिल इंसान थे। अपने इस कमसारोबार छेत्र मे प्यार से लोग उन्हें 'ममवा' कहते थे। गेंद के पीछे वो नही उनके पीछे गेंद दौड़ा करती थी। अक्सर वो सफ़ेद कुर्ता-पजामा पहना करते थे। अपने ग़ाज़ीपुर जिले से चार मरतबा 400 मी० की रेस मे चैंपियन भी रह चुके थे और हॉकी खेल के साथ-साथ लांग जम्प और हाई जम्प कबड्डी, फुटबाल इतियादी मे भी उन्हे महारत हाशिल थी। यदि आज वो हमारे दरमियाँन होते तो राष्ट्रीय हॉकी खेल के नेत्र्तव मे अंतरास्ट्रीय हॉकी टीम के महान ख़िलाड़ीयो में जाने जाते। लेकिन अफ़सोश की हमारे बीच वो नही रहे शायद यही वजह है जो आज हमारे जिले से देश की राष्ट्रीय खेल हॉकी का नामो निशान तक मीट चुका है। हमारे जिले मे न तो कोई खेल का स्टेडियम है न ही कोई ऐसा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स जहां चाह कर भी खिलाड़ियों को प्रेकटिस करने या आगे बढ़ने के लिए अपने जिले के साथ-साथ देश का नाम रौसन करने का कोई मौक़ा मील सके। हालांकि जोनल हॉकी ख़िलाड़ी शहीद बदरूद्दीन खाँ के मौत के बाद हमारे खित्ते 'कमसार-व-बार' के कुछ बच्चों ने हॉकी स्टीक उठाई लेकिन उस दरमियाँन बूढ़े-बुजुर्गो ने खेलने से मना कर दिया। अतः आज ये हाल है कि हमारे ग़ाज़ीपुर जिले से राष्ट्रीय हॉकी खेल हमेशा-हमेशा के लिये लुप्त हो चुकी है। परंतु, आज राष्ट्रीय खेल हॉकी को प्रतोसन देने और अपने दादा की यादगार और कारनामे को बरकरार रखने के लिये मै उनके पोते जॉर्नलिस्ट मो०शाहबूद्दीन उर्फ़ शहाब खान गोड़सरावी ने 30/12/2016 ई० को 'दीनदार म्यूजियम' दिलदारनगर के सिलनियंस के मौके पर वर्तमान 'एस०के०बी०एम' डिग्री कॉलेज प्रबंधक ज़नाब गुलाम मज़हर उसियावी द्वारा पूर्व यूपी परियटन सपा मंत्री/जमानिया छेत्र विधायक श्री ओमप्रकाश सिंह को उनकी 'बी०एम०सी०' संस्था के माध्यम से पत्रक देकर उनके नाम से एस.के.बी.एम.कॉलेज स्थित ग्राउंड पर "शहीद बदरूद्दीन मेंमोरियाल स्टेडियम" बनवाने की मांग की गई। जिसके लिये उन्होंने वादा भी किया। परंतु अभी तक सरकार द्वारा इस पर कोई जवाब नही मिला। जिसके कारण आज हमारा जिला खेल में पिछड़ा हुआ है। यूपी में वर्तमान बीजेपी सरकार को इस पर तवज्जो देने और खेल को बढावा देने के संबंध मे ज़ल्द ही उनके नाम से 'बी०एम०सी०' संस्था के ज़ानिब से ग़ाज़ीपुर के दिलदानगर मे स्थित उनके कॉलेज ग्राउंड पर 'शाहिद बदरूद्दीन मेंमोरियाल' राष्ट्रिय हॉकी खेल स्टेडियम और स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स की मांग किया जायेगा।
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