आन्दोलन और प्रदर्शन के नाम अरबों की संपत्ति स्वाहा

किसान आन्दोलन (मध्य प्रदेश)
उर्जांचल टाइगर डेस्क II देश में आन्दोलन और विरोध प्रदर्शन के दौरान सरकारी संपत्तियों,बसों, ट्रकों और कारों को आग लगायी जाती है, आम जनता के दुकानों की लूट,बंद करवाना और आवागमन बाधित करना आम बात होती जा रही है.इसतरह के आन्दोलन और प्रदर्शनसे न केवाल आम आदमी को नुकसान होता है बल्कि राष्ट्र की सम्पति का ज्यादा नुकसान होता है.आइए डालते हैं एक नजर नुकसान पर. 

किसान आंदोलन-1,500 करोड़ 

2017 में मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में किसान आंदोलन हुआ. मध्य प्रदेश किसान पुलिस की गोली से पांच किसान मारे गए.उसके बाद आंदोलन बेकाबू हो गया और भारी हिंसा हुई.200 ट्रक और बसें, 28 सरकारी वाहन फूंक दिए गए. उपद्रवियों ने दर्जन भर से ज्यादा सरकारी इमारतों में आगजनी व तोड़ फोड़ की. 

गोरखा आंदोलन-400 करोड़ से ज्यादा 

जून 2017 में शुरू हुआ आंदोलन अब भी जारी है. चाय और पर्यटन पर दार्जिलिंग की स्थानीय अर्थव्यवस्था चरमरा चुकी है. अब तक चाय उद्योग को 400 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हो चुका है. 

कश्मीर 16,000-करोड़ से ज्यादा 

जुलाई 2016 में शुरू हुए उग्र प्रदर्शनों के चलते जम्मू कश्मीर राज्य को 16,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ. पांच महीनों के अंदर हुए इस नुकसान का जिक्र खुद राज्य सरकार ने अपने इकोनॉमिक सर्वे में किया. 

जाट आंदोलन-34,000 करोड़ 

2016 में हरियाणा में आरक्षण की मांग कर रहे जाटों ने आंदोलन किया. आंदोलन में भारी हिंसा हुई. पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स के मुताबिक इस आंदोलन की वजह से 34,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. हिंसा में 30 लोग मारे गए. 

कावेरी विवाद-25,000 करोड़ 

2016 में कावेरी जल विवाद पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कर्नाटक में उग्र प्रदर्शन हुए. एसोचैम के मुताबिक इन प्रदर्शनों के चलते 22,000 से 25,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. बेंगलुरु की छवि को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दाग लगा. 

पाटीदार आंदोलन-3,500 करोड़ से ज्यादा 

2015 में पाटीदार आंदोलन ने गुजरात के कई जिलों में आम जनजीवन को अस्त व्यस्त कर दिया. इस दौरान सिर्फ अहमदाबाद शहर में ही 3,500 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ. 

गुर्जर आंदोलन-7,000 करोड़ से ज्यादा 

सरकारी नौकरी में आरक्षण की मांग कर रहे गुर्जर समुदाय ने 2008, 2010 और 2015 में आंदोलन किया. एसोचैम के मुताबिक 2008 में आंदोलन के चलते 70 अरब रुपये का नुकसान हुआ. 2015 में आंदोलन में हिंसा नहीं हुई, लेकिन इसके चलते भारतीय रेलवे को 100 करो़ड़ से ज्यादा नुकसान हुआ. 

आजाद मैदान दंगे-2.74 करोड़ 

2012 में म्यांमार में रोहिंग्या मुस्लमानों के खिलाफ हो रही हिंसा का विरोध करने के लिए मुंबई के आजाद मैदान में प्रदर्शन हुआ. सिर्फ एक दिन की रैली में 40,000 लोग जमा हुए. कुछ ही देर बाद भीड़ हिंसा पर उतर आई और दंगा भड़क उठा. सिर्फ एक दिन में ही पौने तीन करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. 

तेलंगाना आंदोलन-10,000 करोड़ से ज्यादा 

2011 में अलग तेलंगाना राज्य की मांग के लिए जारी आंदोलन उग्र हो गया. एसोचैम के मुताबिक 15 दिन के भीतर आंदोलन और बंद के चलते 10,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ.

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18:06
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