बिहार का "सृजन" महाघोटाला


पटना।। भारत ने आजाद होने के बाद दुर्भाग्य से इतने घोटालों, स्कैम्स और कई गलत कारणों के लिए वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना ली है जिनकी गिनती तक नहीं की जा सकती है। इन घोटालों में राजनीतिक, वित्तीय, कार्पोरेट और कई क्षेत्र शामिल हैं। अगर हाल ही में होने वाले घोटाले की बात की जाए तो बिहार में होने वाला सृजन घोटाला सबसे नया घोटाला है, इसमें करीब एक हजार करोड़ रूपये का घोटाला किया गया है। भाजपा में शामिल होने के कुछ दिनों के भीतर ही बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार अपने विपक्ष राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के आरोपों का सामना कर रहे हैं।

क्या है सृजन घोटाला

सृजन घोटाला एक गैर-सरकारी संगठन सृजन महिला विकास सहयोग समिति से संबंध रखता है। यह भागलपुर में स्थित है और महिलाओं को व्यावसायिक प्रशिक्षण देने का काम कर रहा है। 2004 से 2014 की अवधि में होने वाले इस घोटाले में सरकार द्वारा दिए गए फंड से करीब एक हजार करोड़ रूपये भागलपुर में स्थित गैर-सरकारी संगठन के खाते में अवैध तरीके से ट्रांसफर कर लिए गए थे। विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लिए प्रदान की गई धनराशि को सरकारी अधिकारियों, बैंक कर्मचारियों और सृजन के अपने विभाग के द्वारा एक साथ मिलकर हड़प लिया गया था।

कैसे हुआ इतना बड़ा घोटाला 

गैर-सरकारी संगठन ने एक नकली तीसरे पक्ष का प्रबंध किया और सरकारी धनराशि सीधे सृजन महिला विकास सहयोग समिति के बैंक खातों में जमा कर दी।
बैंक और जिला अधिकारियों की सहायता से बैंक के नकली स्टेटमेंट और बैंक पासबुक बनाई गई थीं, विभिन्न सरकारी विभागों में उपयोग की जाने वाली (पासबुकों) किताबों को मेंटेन रखने के उद्देश्य से उनमें सही मात्रा में धन का वितरण दर्शाया गया था।

संगठन के पक्ष में जाली चेक जारी करने के लिए जिला मजिस्ट्रेट के नकली हस्ताक्षर बनाए गए थे। इस प्रकार संगठन के खाते में बड़े स्तर पर धनराशि ट्रांसफर की गई।

गैर-सरकारी संगठन को तब जानकारी प्राप्त हुई, जब विभिन्न सरकारी विभागों के प्रमुख ने वापसी के लिए चेक जारी किया और कथित तौर पर कहा कि धन की भरपाई सरकार के खाते में होगी।

इस घोटाले का खुलासा फरवरी 2017 में संगठन के संस्थापक मनोरमा देवी की मृत्यु के बाद उनके परिवार में होने वाले झगड़े के कारण हुआ। जिन लोगों ने गैर-सरकारी संगठन से अवैध रूप से ऋण लिया था,वह भुगतान वापस करने में गड़बड़ी करने लगे। जिसके कारण संगठन सरकारी चेक जारी होने के समय सरकारी खातों में पैसा भरने में असमर्थ रहा। इस प्रकार, 3 अगस्त 2017 को 10.32 करोड़ रुपये का चेक बाउंस होने के फलस्वरूप, यह घोटाला सामने आया।

अबतक क्या हुआ 


  1. हालांकि शुरूआत में भागलपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) मनोज कुमार की देखरेख में विशेष जाँच दल (एसआईटी) इस मामले की छानबीन कर रहा था, लेकिन अब इस जाँच की कमान सीबीआई के हाथों में है।
  1. केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) ने गैर सरकारी संगठन के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
  1. बैंक ऑफ बड़ौदा सहरसा के निदेशक व पूर्व निदेशक और भागलपुर शाखाओं के साथ क्रमशः पूर्व कैशियर और सहरसा के भूमि अधिग्रहण कार्यालय के प्रमुख सहायक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
  1. इस मामले में 10 एफआईआर दर्ज की गई हैं, जिसमें महिला विकास समिति की निदेशक मनोराम देवी (गैर-सरकारी संगठन), संगठन के अन्य अधिकारी और बैंक के अधिकारी शामिल हैं। बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) मामले की जाँच कर रही है।
  1. ‘सृजन’ के सचिव प्रिया कुमार, मनोरमा देवी की बहू और उनके पति के खिलाफ लुकआउट (तलाश) नोटिस जारी किया गया है।
  1. इस मामले में अब तक जिला सहकारी अधिकारी और जिला कल्याण अधिकारी, जिला न्यायधीश के स्टेनोग्राफर और बैंक के दो अधिकारियों सहित 18 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

बिहार में वास्तव में बहुत अशांति है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 8 अगस्त 2017 को सार्वजनिक क्षेत्र में हुए घोटाले पर प्रकाश डाला था और वादा किया था कि अपराधियों के खिलाफ शख्त कार्यवाही की जाएगी। राज्य विधानसभा में घोटाले में एक खतरा था, जो निरंतर विरोध प्रदर्शन, वायदा और विपक्षी सदस्यों के निष्कासन से जाना जाता था। शुक्रवार को विधानसभा का सत्र स्थगित कर दिया गया था। नीतीश कुमार की अगुवाई वाली बिहार सरकार ने 18 अगस्त को घोटाले की सीबीआई जांच का आदेश दिया था, जबकि राबड़ी देवी ने अपने पति लालू प्रसाद यादव के साथ नीतीश कुमार के इस्तीफे और कारावास की माँग की थी। लालू ने आरोप लगाया था कि 2005 और 2013 के बीच सरकार की कई धनराशियों को निजी खातों में ट्रांसफर कर दिया गया था। उस समय भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी वित्त मंत्री व उपमुख्य मंत्री थे और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार थे।

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