मजीठिया मामले में जालसाजी कर रहा है अखबार प्रबंधन, लाचार बना श्रम संसाधन विभाग

पटना(बिहार)। मजीठिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का बिहार सरकार का श्रम संसाधन विभाग अंगूठा दिखा रहा है l सरकार इस मामले में उदासीन बनी है और श्रम संसाधन विभाग लाचार बन गया है।यह है कि अभी तक श्रम संसाधन विभाग ने समाचार पत्र प्रतिष्ठान कार्यालय की जांच नहीं की है। श्रम संसाधन विभाग को यह जानकारी भी नहीं है कि कौन सा अखबार किस ग्रेड में है । यही कारण है कि पूरे बिहार में मात्र 164 मामले दर्ज हुए हैं । किसी भी अखबार प्रबंधन द्वारा बैलेंस शीट की जांच नहीं कराई जा रही है।सर्वोच्च न्यायालय के 19 /06/ 2017 के आदेश के अनुपालन में श्रम संसाधन विभाग में अभी तक किसी भी अखबार के अभिलेखों की जांच नहीं की है। पत्रकार और गैर पत्रकार को मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन का भुगतान नहीं किया जा रहा है। एंप्लाइज के बैंक स्टेटमेंट की जांच भी श्रम संसाधन विभाग अभी तक नहीं कर पाया। सभी अखबार प्रबंधन के मालिक सही तथ्य को छुपा रहे हैं।किसी भी अखबार प्रबंधन के पास स्टैंडिंग आर्डर नहीं है। जिसे समझा जा सके कि कार्यरत कर्मियों की सेवा शर्तें क्या निर्धारित है।सारे अखबार के मालिक मजीठिया के तहत वेतन पुर्जा निर्गत नहीं कर रहे हैं।श्रम संसाधन विभाग मजीठिया मामले में सफेद हाथी बन गया है।जिन पत्रकारों गैर पत्रकारों ने फॉर्म C भर कर दिया था।लगभग 1 साल होने को है पर अभी तक कार्रवाई के नाम पर सिर्फ सुनवाई हो रही है।वह भी जिस उप-श्रमायुक्त को इस सुनवाई का अधिकार दिया गया है।उसे जानकारी भी नहीं है कि मजीठिया क्या है? उत्तर प्रदेश की तरह सरकार बिहार में भी मजीठिया लागू करने को लेकर सीधी कार्रवाई का अधिकार डीएलसी/एएलसी/ एलस जाने की आवश्यकता है।आवश्यकता इस बात की भी है कि जो अखबार प्रबंधन मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन नहीं दे रहे हैं। मजीठिया मांगने पर पत्रकारों के पत्रकारों के साथ उत्पीड़न की कार्रवाई कर रहे हैं।उनके खिलाफ आरसी की कार्रवाई होनी चाहिए या उनके विज्ञापन पर भी रोक लगा देनी चाहिए। हमारा तो कहना है कि यह अखबार प्रबंधन के पास पत्रकारों पर पत्रकारों को देने के लिए धन नहीं है वैसे अखबार प्रबंधन अखबार बंद कर दें।यह विचार आज श्रम संसाधन विभाग में मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों को लागू किए जाने के मामले में श्रम संसाधन विभाग द्वारा बुलाई गई त्रिपक्षीय कमेटी की बैठक में बिहार प्रेस मेंस यूनियन के अध्यक्ष और वरीय पत्रकार एस. एन. श्याम ने व्यक्त किया । श्री श्याम ने कमिटी को 15 सूत्री मांगों का एक ज्ञापन भी सौंपा। इस त्रिपक्षीय कमिटी में सरकार, श्रम संसाधन विभाग, अखबार प्रबंधन और पत्रकार यूनियन को आमंत्रित किया गया था । अखबार प्रबंधन की ओर से सिर्फ दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर और प्रभात खबर के अधिकारी आए थे ।
सरकार पक्ष की तरफ से श्रम संसाधन विभाग के प्रधान सचिव दीपक कुमार सिंह श्रमायुक्त गोपाल मीणा और अपर श्रमायुक्त वीरेंद्र कुमार ने भाग लिया। 
श्रम संसाधन विभाग ने इस सुनवाई में बिहार प्रेस मेंस यूनियन को भी आमंत्रित किया था।बिहार प्रेस मेंस यूनियन की ओर से यूनियन के अध्यक्ष एस. एन. श्याम और महासचिव सुधांशु कुमार सतीश ने इस सुनवाई में भाग लिया।
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