पेट्रोल पर चीन-पाक से भी ज्यादा टैक्स वसूलती है भारत सरकार!

नई दिल्ली(एजेंसी)।। टाइम्स ऑफ इंडिया ने 15 सितंबर को तेल पर ‘Lower Oil Taxes- कम करो टैक्स’ शीर्षक से करारा संपादकीय लिखा है। इसने कहा है- 'इंटरनेशनल क्रूड ऑयल के दाम भले ही मोदी सरकार के गद्दी संभालने के बाद से आधे हो गए हों, लेकिन वास्तव में उपभोक्ताओं पर इसका कोई असर व्यावहारिक तौर पर नहीं पड़ा है। यह विषम परिस्थिति उस दिशाहीन कर नीति को उजागर करती है जिसने ऑयल सेक्टर को सरकार के लिए दुधारू गाय बना रखा है। दो दिन पहले कई समाचारपत्रों ने खबर दी थी कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें तीन साल में सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है। उदाहरण के लिए बीजेपी-शिवसेना शासित राज्य की राजधानी मुंबई में मंगलवार 12 सितंबर को पेट्रोल की कीमत देश में सबसे ज्यादा थी. यह 79.48 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच गई थी।
रोज-रोज थोड़ी बढ़ोत्तरी
यह मूल्यवृद्धि रातों रात नहीं हुई। जबसे मोदी सरकार ने (इस साल जून के मध्य से) पेट्रोलियम उत्पादों के लिए प्रति दिन मूल्यांकन व्यवस्था शुरू की है ताकि कीमत में अचानक उछाल न आए, तब से इसमें बढ़ोतरी होती चली गई है। इसका खामियाजा उपभोक्ता थोड़ा ही सही, रोजाना भुगत रहे हैं। उदाहरण के लिए 1 जुलाई और 12 सितंबर के बीच आम लोगों के लिए पेट्रोल की कीमत 5.18 रुपये प्रति लीटर बढ़ गई. महाराष्ट्र में डीजल की कीमत के साथ भी ऐसा ही हुआ। इसकी कीमत मुम्बई में अब 62.37 रुपए प्रति लीटर हो गई है।
पेट्रोल पर 58 फीसदी और डीजल पर 50 फीसदी टैक्स
पेट्रोलियम की कीमतों को लें। जब नरेंद्र मोदी अप्रैल 2014 में मनमोहन सिंह सरकार पर हमला कर रहे थे कि उन्होंने लोगों का जीना मुश्किल दिया है, तब पेट्रोल पर टैक्स 34 फीसदी था और डीजल पर यह बमुश्किल 21.5 फीसदी था।लेकिन जुलाई 2017 में पेट्रोल पर टैक्स 58 फीसदी और डीजल पर 50 फीसदी के स्तर को भी पार कर चुका है। भारतीय तेल की कीमतों की तुलना किस तरह अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ की जा सकती है, जहां प्रति व्यक्ति आय (क्रयशक्ति के आधार पर) 60 हजार डॉलर के आसपास होती है।यहां पेट्रोल (जिसे वे गैसोलाइन कहते हैं) कि औसत कीमत 0.70 डॉलर प्रति लीटर (11 सितंबर की क़ीमत) है। कोई भी पता कर सकता है कि सर्वाधिक विकसित पश्चिमी देशो में भी पेट्रोलियम पदार्थों की कीमत लगभग समान है।
सबसे ज्यादा टैक्स ले रही है हमारी सरकार
भारत के मामले को लें।हमारी प्रति व्यक्ति आमदनी प्रति व्यक्ति क्रयशक्ति को आधार मानते हुए 6000 डॉलर से थोड़ा ज्यादा है।लेकिन, हमारी सरकार अपने नागरिकों को पेट्रोलियम उत्पाद 1.25 डॉलर प्रति लीटर (वर्तमान विनिमय दर के मुताबिक 80 रुपये) की दर से बेचती है।
पाकिस्तान भी हमसे बेहतर
हमारी सरकार यहां तक कि गरीब दक्षिण एशियाई देशों से भी बदतर साबित हुई है। पाकिस्तान का उदाहरण लें, जिसका हमारे कई ‘अति राष्ट्रवादी’ मजाक उड़ाते हैं। पाकिस्तान, जहां प्रतिव्यक्ति आय (क्रयशक्ति के आधार पर) लगभग 5500 डॉलर (भारत से कम) है, अपने नागरिकों को 71 पाकिस्तानी रुपए में पेट्रोल बेचता है जो महज 0.67 अमेरिकी डॉलर के बराबर है।अब पाकिस्तान की तुलना हम अपने देश से करें, जिसे विकास के मामले में चमत्कार दिखाने वाला माना जाता है।पाकिस्तान से अमीर देश होने के बावजूद हमारी सरकार अपने नागरिकों पर पाकिस्तान के मुकाबले दुगुना टैक्स लगाती है। ऐसा नहीं है कि पाकिस्तान अकेला ऐसा उदाहरण है। श्रीलंका, नेपाल या बांग्लादेश के मामलों को भी लें, हमारी लुटेरी सरकार का किसी देश से मुकाबला नहीं है।15 सितंबर के टाइम्स ऑफ इंडिया के संपादकीय में इस मसले को विस्तार से बताया गया है, 'हमारे सभी पड़ोसी, खासकर पाकिस्तान अपने उपभोक्ताओं को पेट्रोल और डीजल पर अधिक से अधिक फायदा दे रहा है। इससे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था तुलनात्मक रूप से अधिक स्पर्धी हो रही है और यह भारत के मुकाबले खड़ी है। शायद यह जिहादी मुश्किलों का भी बेहतर तरीके से सामना कर पा रही है। निष्कर्ष ये है कि दूसरे देशों के मुकाबले चाहे वे भारत के मुकाबले गरीब देश हों या अमीर, भारत सरकार अपने नागरिकों पर कर का अधिक बोझ डाल रही है।यही वे ‘अच्छे दिन’ हैं जिसका वादा नरेंद्र मोदी और बीजेपी सरकार ने 2014 में भारतीयों से किया था।
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