मानव तस्करी ‘‘आधुनिक युग की दासता"

उर्जान्चल टाइगर (जो दिखेगा,वो छपेगा)


संयुक्त राष्ट्र की परिभाषा के अनुसार ‘किसी व्यक्ति को डराकर, बलप्रयोग कर या दोषपूर्ण तरीके से भर्ती, परिवहन या शरण में रखने की गतिविधि तस्करी की श्रेणी में आती है’।

नई दिल्ली।।भारत को एशिया में मानव तस्करी का गढ़ माना जाता है।नशीली दवाओं और हथियारों के कारोबार के बाद मानव तस्करी विश्व भर में तीसरा सबसे बड़ा संगठित अपराध है।दुनिया भर में 80 प्रतिशत से ज्यादा मानव तस्करी यौन शोषण के लिए की जाती है, और बाकी बंधुआ मजदूरी के लिए।भारत ने मानव तस्करी के खिलाफ वैश्विक स्तर पर लड़ाई के लिए बहुकोणीय रणनीति अपनाने की मांग की है।

सर्वाधिक प्राथमिकता के बावजूद मानव तस्करी रुक नहीं रहा।

अतिरिक्त सचिव जयदीप गोविंद ने ‘ग्लोबल प्लान ऑफ एक्शन टू कॉम्बैट ट्रैफिकिंग इन पर्सन्स’ के मूल्यांकन पर कल संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र में इस बात पर जोर दिया कि फोकस मूल देशों के विकास पर होना चाहिए।
गृह मंत्रालय के उच्च अधिकारी ने कहा कि भारत सरकार ने तस्करी के खिलाफ लड़ाई को ‘‘सर्वाधिक प्राथमिकता’’ दी है। उन्होंने साथ ही कहा कि राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामूहिक प्रयासों के बावजूद मानव तस्करी के खिलाफ लड़ाई अंजाम तक पहुंचने से बहुत दूर है।
गोविंद ने कहा, ‘‘हमें अपने प्रयासों को दोगुना करने और बहुकोणीय रणनीति अपनाने की आवश्यकता है। भारत इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ काम करने के लिए दृढ़ता से प्रतिबद्ध है।’’ 

मानव तस्करी ‘‘आधुनिक युग की दासता’’

अनेक देशों के प्रतिनिधियों ने अपने संबोधन में मानव तस्करी को ‘‘आधुनिक युग की दासता’’ करार दिया। इस दौरान अनेक पीडितों ने अपहरण, हिंसा और बलात्कार की दर्दनाक व्यथा बयान की।
संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष मिरोस्लाव लाजकाक ने अपने संबोधन में कहा कि मानव तस्करी के खिलाफ लड़ाई की इच्छा कार्यों में दिखाई देनी चाहिए और पीड़ितों की आवाज बनना संयुक्त राष्ट्र का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि लोगों के स्वतंत्रतापूर्वक और शांतिपूर्वक रहने के लिए यह जरूरी है कि वे तस्करी के भय से मुक्त रहें।

भारत में मानव तस्करी बढ़ने के क्या कारण है।

भारत मे पशिचम बंगाल,झारखंड, कर्नाटक, बिहार,तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश,और दिल्ली मानव तस्करी का गढ़ माना जाता है।तस्करी करने वाले ज्यादातर बच्चों,छोटी लड़कियों और युवा महिलाओं को अपना शिकार बनाते हैं।उन्हें उनके घरों से लाकर दूरदराज के राज्यों में यौन शोषण और बंधुआ मजदूरी के लिए बेच दिया जाता है। ऐजेंट इनके माता पिता को पढ़ाई, बेहतर जिंदगी और पैसों का लालच देकर बहला फुसलाकर घर से साथ ले आते हैं। और स्कूल भेजने के बजाय ईंट के भट्टों पर, कारपेंटर, घरेलू नौकर या भीख मांगने का काम करने के लिए बेच देते हैं। जबकि लड़कियों को यौन शोषण के लिए बेच दिया जाता है।
मानव तस्करी सबसे ज्यादा व्यापारिक सेक्स के लिए होता है। बेरोजगारी के कारण बड़ी संख्या में पुरुष काम की तलाश में शहर की ओर पलायन करते हैं ,जिससे व्यापारिक सेक्स की मंच बढ़ जाता है । मांग और आपूर्ति का सिद्धांत के अनुसार मांग को पूरा करने के लिए सप्लायर हर तरह की कोशिश करता है जिसका शिकार गरीब आदिवासी लोग ज्यादातर बनते हैं।
सामाजिक असमानता, क्षेत्रीय लिंग वरीयता, असंतुलन और भ्रष्टाचार मानव तस्करी के प्रमुख कारण हैं।

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