गोरक्षा के नाम पर गुंडागर्दी- सुप्रीम कोर्ट ने कहा, दोषियों पर हो कार्रवाई, पीड़ितों को मिले मुआवजा


नई दिल्ली।।सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्य सरकारों को गौरक्षकों के आतंक से निपटने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि सभी राज्य सरकारें 13 अक्टूबर तक हरेक जिले में एक सीनियर पुलिस अफसर की तैनाती करे जो गौ हत्या के नाम पर होने वाली हिंसा की रोकथाम के लिए काम करे और उससे जुड़े सभी मामलों की देखरेख करे। कोर्ट ने राज्य सरकारों से गौहत्या के आरोप में मारे गए या मॉब लिंचिंग के शिकार हुए पीड़ितों के लिए मुआवजे की भी व्यवस्था करने को कहा है।
कोर्ट ने तथाकथित गौरक्षक समूहों द्वारा हिंसा करने और अपने हाथ में कानून लेने की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताते हुए इस महीने की शुरुआत में ही इस पर रोकथाम के उपाय करने को कहा था। साथ ही नोडल अफसरों को यह सुनिश्चित करने को कहा था कि ऐसे समूह प्रशासन के लिए चुनौती न बन सके, इसकी ठोस व्यवस्था की जाय। इसके लिए राज्य सरकारों को अदालत ने एक हफ्ते का वक्त दिया था।
कोर्ट ने राज्य सरकारों से गौरक्षकों से निपटने के प्रभावी रोकथाम के उपायों और नेशनल हाई वे पर सुरक्षा के इंतजामों के बारे में भी बताने को कहा है, जहां गौरक्षकों ने अक्सर पशुओं को ले जा रही गाड़ियां रोककर लोगों के साथ मारपीट की है। बता दें कि पिछले तीन सालों में जब से केंद्र में भाजपा की नरेंद्र मोदी सरकार बनी है, तब से गौरक्षकों द्वारा मारपीट की घटनाओं में इजाफा हुआ है। कई राज्यों में भी भाजपा की सरकार है, इस वजह से गौ रक्षकों को दंड मिलने में कोताही बरती जा रही है।
ज्ञात हो के पहलू खान के हत्यारे को अभी हाल ही में भाजपा शासित राजसथान में तब बरी कर दिया गया जबकी मीडिया में आरोपी का वीडियो फुटेज दिखाया गया और पहलू खान के रिश्तेदारों ने शिनाख़्त किया था। ऐसे में देखना अहम होगा की भाजपा शासित राज्यों में सुप्रीम कोर्ट के आदेश को कितने निष्पक्षता से लागू किया जाता है।
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