पेड़ों की छांव तले रचना पाठ” की छतीसवीं साहित्य गोष्ठी सम्पन्न

पेड़ों की छांव तले रचना पाठ” की छतीसवीं साहित्य गोष्ठी सम्पन्न

बाबू जी का चश्मा और अखबार है / हिन्दी हमारे लिए घरबार है .
न्यूज डेस्क।। “राष्ट्र भाषा हिन्दी और शिक्षक दिवस” पर गीतों , कविताओं और गजलों से परिपूर्ण “पेड़ों की छांव तले रचना पाठ” की छतीसवीं साहित्य गोष्ठी वैशाली सेक्टर चार, स्थित हरे भरे मनोरम सेंट्रल पार्क में सम्पन्न हुई ।
हिन्दी साहित्य से संबन्धित अभिनव प्रयोग की यह श्रंखला प्रत्येक माह के अंतिम रविवार को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम अनुसार ही मध्यान्ह उपरांत 4 .30 बजे से प्रारंभ हुई। देर शाम तक चली गोष्ठी को “राष्ट्र भाषा हिन्दी और शिक्षक दिवस विषय में रची बसी कविताओं ने नयी बुलंदियों से स्पर्श कराया ।
गोष्ठी में पधारे गीत विधा के सशक्त हस्ताक्षर वरिष्ठ गीत कार बृजेन्द्र नाथ मिश्र ने हिन्दी पर अपना गीत “देश की माला भाषाएँ हैं / हिन्दी इनकी डोर है / इस मनके में बंधे रहें सब / माँ हो रही विभोर है" पढ़ा । वहीं शिक्षा को उद्देश्य पूर्ण बताने वाला गीत "घर से चुप चाप निकल / दबाकर अपने पदचाप निकल / अलख जगाने को मेरे मन / मिटाने को संताप निकल" सुनाकर श्रोताओं को आकर्षित किया । 
गीतकार केशव प्रसाद पाण्डेय ने अपना गीत “हिन्दी हो हिंदुस्तान की भाषा / ऐसी है अपनी अभिलाषा / हिन्दी बने आन की भाषा /हिन्दी बने शान की भाषा / हिन्दी हो सम्मान की भाषा ...” पढ़ा ।
कवि अमर आनंद ने हिन्दी को भारतीय संस्कृति , संस्कार और मूल्यों को का पूरक बताया और “बाबू जी का चश्मा और अखवार है / हिन्दी हमारे लिए घरबार है ... भाई की हमजोली / बहन की डोली / माँ की दवाई है / हिन्दी तो रग रग में समाई है.../ हिन्दी प्यार है / हिन्दी मनुहार है / हिन्दी तो जैसे बहार ही बहार है ।" सुना कर तालियाँ बटोरी ।
संयोजक कवि अवधेश सिंह ने अपनी मातृभाषा शीर्षक की कविता “ जैसे.../ शब्द से बनता हो / कोई निवाला / जिसका पौष्टिक होना / पहली शर्त हो / सम्बन्धों के लिए / मानवता के लिए / प्रेम के लिए / गौतम बुद्ध की / इस दुनिया के लिए / होने को एक मातृभाषा ।" पढ़ी । 
अन्य कवियों में नवोदित कवि रतनलाल गौतम , कवियत्री करुणा दिवेदी व शिवानी श्री ने रचना पाठ किया । 
गोस्ठी का सफल संचालन संयोजक अवधेश सिंह ने व अध्यक्षता वरिष्ठ गीत कार बृजेन्द्र नाथ मिश्र ने की । इस अवसर पर सर्व श्री राजदेव प्रसाद सिंह , शत्रुघ्न प्रसाद , शशिकांत सुशांत कुशवाहा , एस पी चौधरी , उमाशंकर प्रसाद गुप्त , आर पी सिंह आदि प्रबुध श्रोताओं ने रचनाकारों के उत्साह को बढ़ाया ।
गोस्ठी के समापन पर आभार व्यक्त करते हुए इस गोस्ठी के संयोजक कवि लेखक अवधेश सिंह ने इस गोष्ठी की निरंतरता को बनाए रखने का अनुरोध करते हुए सबको धन्यवाद दिया।

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