हमने इंजीनियर-डॉक्‍टर पैदा किए और पाकिस्‍तान ने आतंकवादी - सुषमा स्‍वराज

उर्जान्चल टाइगर (हिंदी मासिक)


न्यूज डेस्क।।विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने शनिवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित किया। सुषमा स्वराज हिन्दी में संयुक्त राष्ट्र को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि दुनिया में आतंकवाद आग की तरह फैल रही है। सुषमा ने कहा कि दुनिया में इस वक्त बड़ी आबादी अलग-अलग वजहों से पलायन कर रही है। गरीबी से निपटने के लिए भारत सरकार के उठाये गये कदमों का जिक्र करते हुए सुषमा स्वराज ने जनधन योजना, मुद्रा योजना और उज्ज्वला योजना की चर्चा की। सुषमा स्वराज ने कहा कि भारत ने 30 करोड़ लोगों के जीरो बैलेंस पर खाते खोले। ये आबादी अमेरिका की आबादी के बराबर है। सुषमा स्वराज ने गरीबी उन्मूलन के लिए भारत की कोशिशों का जिक्र करते हुए मुद्रा योजना का हवाला दिया। सुषमा ने कहा कि इस योजना के तहत पूंजी की कमी झेल रहे युवाओं को रोजगार के लिए सरकार मदद देती है। सुषमा ने उज्ज्वला योजना का जिक्र कर कहा कि इस योजना के जरिये महिलाओं को मुफ्त में रसोई गैस का कनेक्शन दिया जाता है।

सुषमा ने आगे कहा कि सभापति महोदय हमलोग तो गरीबी से लड़ रहे हैं लेकिन हमारा एक पड़ोसी है जो हमसे लड़ रहा है। सुषमा ने पाकिस्तान को जमकर लताड़ लगाई। उन्होंने कहा कि इसी मंच पर पाकिस्तान के पीएम जनाब अब्बासी ने भारत पर मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लगाये। सुषमा ने कहा कि वैसा देश हमें मानवाधिकार पर लेक्चर दे रहा है जो सालों तक आतंकवादियों को पनाह देता रहा है। सुषमा ने कहा कि हैवानियत की हदें पार करने वाला देश हमें भाषण ना सुनाएं।
‘‘ भारत की आजादी के बाद पिछले 70 वर्षों में कई पार्टियों की सरकारें रही हैं और हमने लोकतंत्र को बनाए रखा और प्रगति की। हर सरकार ने भारत के विकास के लिए अपना योगदान दिया।’’ विदेश मंत्री ने कहा, ‘‘हमने वैज्ञानिक और तकनीकी संस्थान स्थापित किए जिन पर दुनिया को गर्व है। परंतु पाकिस्तान ने दुनिया और अपने लोगों को आतंकवाद के अलावा क्या दिया?’’ उन्होंने कहा, ‘‘ हमने वैज्ञानिक, विद्वान, डॉक्टर, इंजीनियर पैदा किए और आपने क्या पैदा किया? आपने आतंकवादियों को पैदा किया...आपने आतंकी शिविर बनाए हैं, आपने लश्कर-ए-तैयबा , जैश-ए-मोहम्मद, हिज्बुल मुजाहिदीन और हक्कानी नेटवर्क पैदा किया है।’’ 

उन्होंने कहा, ‘‘अगर हम अपने शत्रु को परिभाषित नहीं कर सकते तो फिर मिलकर कैसे लड़ सकते हैं? अगर हम अच्छे आतंकवादियों और बुरे आतंकवादियों में फर्क करना जारी रखते हैं तो साथ मिलकर कैसे लड़ेंगे? अगर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद आतंकवादियों को सूचीबद्ध करने पर सहमति नहीं बना पाती है तो फिर हम मिलकर कैसे लड़ सकते हैं?’’ सुषमा सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य चीन का परोक्ष रूप से हवाला दे रही थीं जिसने जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को प्रतिबंधित करने के भारत के प्रयास को बार-बार अवरुद्ध करने का काम किया है।


उन्होंने कहा, ‘‘मैं इस सभा से आग्रह करना चाहूंगी कि इस बुराई को आत्म-पराजय और निरर्थक अंतर के साथ देखना बंद किया जाए। बुराई तो बुराई होती है। आइए स्वीकार करें कि आतंकवाद मानवता के अस्तित्व के लिए खतरा है। इस निर्मम हिंसा को कोई किसी तरह से उचित नहीं ठहरा सकता।
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