विद्युत विभाग में सरकारी कर्मचारी सेवा नियमावली का घोर उल्लंघन


धन बल के दम पर क़ायदे कानून को ठेंगा दिखाने वाले कर्मचारी पे कार्यवाही करने में आखिर क्यों है बेबस विभाग?

वाराणासी ब्यूरो कार्यालय।।विद्युत विभाग में प्रायः कई कर्मी सेवा में आते समय प्रस्तुत मूल आवास घोषणा पत्र में जान-बूझकर गड़बड़ी करते है, जिससे उन्हें ऐच्छिक स्थल पे ही कार्य का अवसर मिले, जो कि सरकारी सेवा नियमावली गृह मंत्रालय मेमो नंबर 43/715/57/Exts(A) दिनाँक 24.06.1958 एवं उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी शासनादेश संख्या 957/कार्मिक-1/1998,लखनऊ दिनाँक 17अक्टूबर,1998 तथा संख्या 13/5/98-का0-1/2002 दिनाँक 9अगस्त,2002 का स्पष्ट उल्लंघन है। यही अनियमितता नगरीय विद्युत वितरण मंडल-द्वितीय, वाराणसी में तैनात  राहुल कुमार द्वारा भी की गई। राहुल कुमार विद्युत विभाग में लाइन मैन के पद पर कार्यरत अपने पिता रामयश की सेवा के दौरान मृत्युपरांत मृतक आश्रित कोटे से कार्यालय सहायक-तृतीय के पद पर विद्युत विभाग में नियुक्त हुए, नियुक्ति के समय इन्होंने अपना मूल आवास आरा, बिहार दर्शाया, जबकि इनके पिता ने अपने जीवनकाल में ही वाराणसी में स्थायी आवास बना कर परिवार सहित निवास करते थे तथा  राहुल कुमार भी अपने पिता के साथ वाराणसी में बचपन से ही निवास करते थे, इनका राशन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र एवं अन्य सभी सरकारी दस्तावेजों पर इनका वाराणसी का ही पता अंकित हैं। अतः इन्होंने विद्युत विभाग में नियुक्ति के समय गलत सूचना प्रेषित की, जो कि सरकारी कर्मचारी सेवा नियमावली का स्पष्ट उल्लंघन है।
राहुल कुमार द्वारा पूर्व में नगरीय विद्युत वितरण मंडल-द्वितीय, वाराणसी में निविदा का कार्य करने के दौरान भारी भ्रस्टाचार कर अपर धन-संपदा का अर्जन किया गया, जिसकी खबर दैनिक समाचार पत्र जनसंदेश में दिनाँक 19-01-2015 एवं 20-01-2015 को तथा हिन्दुस्तान में दिनाँक 19-01-2017 को प्रकाशित हुई थी। राहुल कुमार के विरुद्ध आय से अधिक संपत्ति अर्जन का प्रकरण माननीय लोकायुक्त के समक्ष भी लंबित है। तथा निविदा संख्या 102/2012-13 में अनियमित एवं घोटाले हेतु प्रकरण माननीय न्यायालय, वाराणसी के समक्ष लंबित है। 
इस प्रकरण की जांच तत्कालीन अधिशासी अभियंता, नगरीय विद्युत परीक्षण खंड-प्रथम, वाराणसी  ए के सिंह द्वारा की गई थी एवं ए के सिंह ने राहुल कुमार के प्रभाव (अज्ञात) में आकर गलत रिपोर्ट द्वारा इन्हें निर्दोष करार दिया गया था, जबकि निविदा संख्या 102/2012-13 दिनाँक 02-01-2013 को जारी कर तत्समय निविदा शर्तो के पूर्णतया अयोग्य फर्म आदर्श इंटरप्राइजेज, सिकरौल, वाराणसी को आवंटित कर दिया गया था, उस समय वर्णित फर्म के पास निविदा शर्तो के अनुरूप श्रम पंजीकरण, ई0पी0एफ0 पंजीकरण एवं ई0एस0आई0 पंजीकरण भी उपलब्ध नही था।
राहुल कुमार धन-बल से निरंतर प्रोन्नति प्राप्त करते गये तथा घूम-फिर के वापस नगरीय विद्युत वितरण मंडल-द्वितीय, वाराणसी में तैनाती करा लेते हैं। राहुल कुमार दिनाँक 03-11-2003 के अपनी नियुक्ति के उपरांत से ही लगातार वाराणसी ज़ोन के अंतर्गत ही तैनात है। जबकि निगमीय आदेश संख्या 516-जा0श्0 एवं प्र0-01/पा का ली/2008-100(1) प्र0सु0/92 दिनाँक 03-12-2008 के मुताबिक कार्यालय सहायको को गृह जनपद में तैनाती नही हो सकती तथा स्थानांतरण नियमावली संख्या 425-ज0श्0 एवं प्र0सु0-01/पाका ली/2017-100(1) प्र0सु0/92 दिनाँक 16-06-2017 के मुताबिक कार्यालय सहायक की तैनाती एक ज़ोन में निरंतर 10 वर्ष से अधिक नही हो सकता। परंतु राहुल कुमार धन-बल के प्रभाव का इस्तेमाल कर 14 वर्षो से लगातार वाराणसी ज़ोन में ही तैनात हैं।

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