इस छात्रा को बिहार बोर्ड ने कर दिया दो बार फेल, हाईकोर्ट के आदेश पर हुई जांच तो आए 422 नंबर

इस छात्रा को बिहार बोर्ड ने कर दिया दो बार फेल, हाईकोर्ट के आदेश पर हुई जांच तो आए 422 नंबर

पटना(स्टेट हेड मुकेश कुमार)। बिहार बोर्ड ने जब सहरसा की छात्रा प्रियंका सिंह का मैट्रिक का रिजल्ट घोषित किया तो उसमें उसे फेल बताया गया। स्क्रूटनी को आवेदन दिया तो रिजल्ट में नो चेंज लिख दिया गया। पर प्रियंका को खुद पर भरोसा था कि वह फेल नहीं हो सकती। वह हाईकोर्ट गयी।

हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप किया तो बिहार बोर्ड ने प्रियंका को उसकी उत्तर पुस्तिका दे दी। बोर्ड ने इसके लिए प्रियंका से 40 हजार रुपए लिए। प्रियंका ने जब उत्तर पुस्तिका देखी तो पता चला कि यह उसकी कॉपी नहीं है। कॉपी किसी और की थी।
कॉपी दूसरी छात्र से बदल जाने के कारण उसे फेल कर दिया गया। अब जब बोर्ड ने रिजल्ट सुधारा तो प्रियंका को 422 अंक मिले हैं। यानी टॉप टेन की सूची से थोड़ा कम। संस्कृत में 9 की जगह 61 और साइंस में 49 की जगह 100 अंक आए हैं। इतना कुछ होने के बावजूद अभी भी प्रियंका रिजल्ट का इंतजार कर रही है। बोर्ड की वेबसाइट पर भी उसका रिजल्ट फेल वाला ही है। उसका नामांकन अभी तक नहीं हो पाया है।


बता दें कि प्रियंका सिंह सहरसा के डीडी हाईस्कूल सड्डिहा की छात्र है। उसने इसी स्कूल से मैट्रिक की परीक्षा (रोल कोड 41047, रौल नंबर 1700124) दी थी। इधर, सहरसा थाने में बिहार बोर्ड की ओर से दोषी कर्मियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करायी गयी है।
दर्ज एफआईआर में बोर्ड ने कहा है कि प्रियंका सिंह के लिए विज्ञान एवं संस्कृत विषयों के लिए आवंटित बार कोड संख्या क्रमश: 206964520 और 208868922 थी। लेकिन यह बार कोड प्रियंका के ही स्कूल की छात्र संतुष्टि कुमारी के विज्ञान और संस्कृत की उत्तर पुस्तिका पर डाल दिया गया।
उत्तर पुस्तिका पर बारकोडिंग का काम राजकीय कन्या उच्च विद्यालय, सहरसा केंद्र पर उप विकास आयुक्त सहरसा के निर्देशन पर किया गया था।

लिखावट से हुई कॉपी की पहचान

हाईकोर्ट के आदेश के बाद जब प्रियंका सिंह को उसकी उत्तर पुस्तिका मिली तो उसमें लिखावट में बदलाव था। हाईकोर्ट ने प्रियंका सिंह से लिखवा कर भी देखा।
लिखावट में बदलाव देख कर हाईकोर्ट ने बिहार बोर्ड को जल्द से जल्द प्रियंका सिंह के रिजल्ट में सुधार करने का आदेश दिया। बता दें कि बिहार बोर्ड ने मूल्यांकन में गोपनीयता रखने के लिए कॉपियों की बारकोडिंग की थी। पर एजेंसी की गलती से परीक्षार्थियों की कॉपी बदल गई।
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