मेढ़ोली मुआब्ज़ा फर्जीवाड़ा-विभागीय कार्यवाही शुरू, सात निलंबित,कई और नप सकते हैं।

उर्जांचल टाइगर (जो दिखेगा,वो छपेगा)

  • मेढ़ोली मुवाजा वितरण फर्जीवाड़े की विभागीय कार्यवाही शुरू ,
  • सात कर्मी निलंबित,कई अधिकारी भी आरोपो की जद में,
  • करोड़ो के गमन का हुवा खुलासा,
  • उदवासित किसान मजदूर परिषद ने प्रधानमंत्री व कोयला मंत्री को पत्र भेज कार्यवाही किये जाने की है मांग,
  • उठने लगी एफ आई आर दर्ज कराने और गिरफ्तारी की मांग,
उर्जांचल टाइगर ब्यूरो।। सिंगरौली  जिले का अबतक का सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा प्रकाश में आया है। जिसकी यदि निष्पक्षता से जाँच हो जाए तो अरबो का घोटाला सामने आ सकता है मामला मढोली ग्राम के विस्थापन से जुड़ा है, मेढोली ग्राम का विस्थापन नार्दन कोल फिल्ड लिमिटेड के जयंत कोयला खदान के विस्तार के लिए किया जाना था।
फर्जीवाड़ा के प्रकाश में आने के बाद शुरू हुई विभागीय जाँच के पहले चरण में दोषी पाए गए सात कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है। सूत्रों की माने तो और कर्मचारियों पे गाज जल्द गिर सकती है।

जिन सात कर्मचारियों को निलंबित किया है उनपर आपने सगे संबंधियों के नाम कागाजात तैयार कर मुआबजे के रूप में करोडों रूपए हड़पने का आरोप लगा था। इसी फर्जीवाड़े को सज्ञान में लेते हुए एन सी एल प्रवंधन ने यह पहली कार्यवाही की है । चर्चा तो यह भी है के कुछ कर्मचारियों ने अपनी पत्नियों के नाम भी करोडों का मुआब्ज़ा बनवाकर लाखो रुपए का भुगतान भी करा लिया ऐसे लोगों पर पैसा वापस करने के लिए प्रबंधन दबाव बना रही जिनका चेक कैश नहीं हुआ है ,उनके चेक रोकने के लिए बैंक को पत्र के माध्यम से कहा गया है। 



सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात तो यह है की खुलासे के बाद भी प्रबंधन ने इनके खिलाफ थाने में कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई है? और इनके नाम सार्वजनिक करने से परहेज़ कर रही है। प्रवंधन के इस रवैये से जहां  आम आदमी चकित है वहीँ  विस्थापितो में भारी असन्तोष और आक्रोष व्याप्त है। लोगों का कहना है की जिस तरह से प्रबंधन इस मामले में लुकाछिपी का खेल खेल रही उससे ऐसा प्रतीत होता है के फर्जीवाड़े में कार्यावाही का दिखावा कर लीपापोती की जा राही हो?

वरिष्ठ पत्रकार के सी शर्मा ने बताया की विस्थापितों का हक लुट कर करोडों के वारे न्यारे करने वाले  दोषीयों  को सज़ा और विस्थापितों को न्याय दिलाने के लिए "उदवासित किसान मजदूर परिषद"और "भारतीय विस्थापित संघ"सहित कई सामाजिक व विस्थापित संगठनों ने प्रधान मंत्री , कोयला मंत्री,सूबे के मुख्य मंत्री,सहित सम्वन्धित अधिकारियो को पत्र भेज इस फर्जीवाड़े की विभागीय जांच के अतिरिक्त आर्थिक अपराध अनुसंधान या अन्य एजेंसी से  जांच  कराये जाने की मांग की है ।

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