सुरक्षित यात्रा जरूरी है या बुलेट ट्रेन?


अब्दुल रशीद।।मुंबई के एलफिंस्टन रोड हादसे में २३ लोगों की हृदयविदारक मौत के बाद बुलेट ट्रेन को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गया है।लगातार हो रहे रेल हादसे को लेकर सुरेश प्रभु ने इस्तीफे की पेशकश की थी,बाद में मंत्रीमंडल विस्तार के समय उम्का मंत्रालय बदल कर पीयूष गोयल को दे दिया गया। लगातार हो रहे रेल हादसे से ध्यान बटाने 

और गुजरात चुनाव के मद्देनजर बुलेट ट्रेन का उद्घाटन के समय खूब हो हल्ला मचाया गया। हल्ला मचाने से रेल हादसों से कितना ध्यान बटा या गुजरात चुनाव में कितना फायदा मिलेगा यह तो भविष्य के गर्भ में है लेकिन यह बात तो आईने के तरह साफ़ दिखाई पड़ रहा है के सरकार सुरक्षित रेल यात्रा के लिए कितना गंभीर है? मुंबई हादसे के बाद यह सवाल हर आम आदमी के जेहन में कौंध रहा है की रेल यात्रियों की सुरक्षा जरूरी है या बुलेट ट्रेन? 

बुलेट ट्रेन का भी हाल नोटबंदी जैसा हो सकता है? 

मुंबई हादसे से तीन दिन पहले ही सोशल मीडिया पर स्थानीय पत्रकार संतोष आंधले ने ऐसी आशंका जतायी थी।और हादसे के बाद फेसबुक पर अपनी बात दोबारा पोस्ट करते हुए संतोष आंधले ने लिखा कि उन्हें बहुत दुख हो रहा है कि उनकी बातों पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। 


राज्य सभा सांसद सचिन तेंदुलकर ने भी ये मामला अगस्त, 2016 में उठाया था। 

मिडिया रिपोर्ट क्र अनुसार 'शिवसेना की ओर से दो सांसदों अरविंद सावंत और राहुल शिवाले ने 2015-16 में इसी ब्रिज को चौड़ा करने के लिए चिट्ठी लिखी थी, जिसके जवाब में तत्कालीन रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा था कि रेलवे के पास इसके लिए फंड नहीं है।' तत्कालीन रेल मंत्री ने कहा था - 'ग्लोबल मार्केट में मंदी है, आपकी शिकायत तो सही है लेकिन अभी फंड की कमी है।' 

कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने भी सरकार को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की है।चिदंबरम का कहना है कि रेलवे को सुरक्षा के बेहतर उपायों और सुविधाओं पर ध्यान देना चाहिये, न कि बुलेट ट्रेन पर।चिदंबरम का कहना है कि बुलेट ट्रेन का भी हाल नोटबंदी जैसा हो सकता है। 


बीजेपी की सहयोगी पार्टी शिवसेना ने कहा था कि बुलेट ट्रेन आम लोगों के लिए नहीं, बल्कि अमीरों के लिए है।शिवसेना के मुखपत्र सामना में उद्धव ठाकरे ने लिखा था - 'हम बस ये उम्मीद करते हैं कि इससे मुंबई को नुकसान नहीं होगा।' 

अपना विरोध जताते हुए उद्धव ने कहा था - मुंबई में लोकल ट्रेनों की हालत खराब है।विदर्भ और मराठवाड़ा में कई परियोजनाएं लंबित हैं और ये सरकार हमें बुलेट ट्रेन दे रही है। 

मुंबई के ताजा हादसे के बाद महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे ने तो ज्यादा ही कड़ा रुख अख्तियार किया है. राज ठाकरे ने इस मामले में भी वैसे ही धमकाया है जैसे वो कई मामलों में यूपी-बिहार के लोगों को धमकाते रहे हैं। 

राज ठाकरे न कहा है कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुलेट ट्रेन चलाना चाहते हैं,तो गुजरात में चलाएं मुंबई में नहीं. राज ठाकरे का कहना है कि बुलेट ट्रेन की एक ईंट भी वो मुंबई में नहीं रखने देंगे।उन्होंने कहा कि अगर वे लोग फोर्स का इस्तेमाल करेंगे तो हमें सोचना पड़ेगा कि क्या करना है। 

हादसे के शिकार को मुआबजा देकर मामले को जांच के हवाले दे देने और सुधार के लिए राजनैतिक घोषणा करने भर से विकास नहीं होता। विकास के लिए काम करना होगा और राजनैतिक दिखावे को नजरअंदाज कर विवेकपूर्ण निर्णय लेना होगा तभी रुक सकता है हादसों का सिलसिला। सबसे अहम सवाल,जब सरकार कर्जा लेकर अमीरों के लिए बुलेट ट्रेन बना सकती है तो गरीबों की जान क्यों नहीं बचा सकती?
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