आउटसोर्सिंग कम्पनियों की दबंगई के आगे,बेरोजगार युवा बेबस



  • आउटसोर्सिंग कंपनियों के साथ NCL प्रबंधनऔर स्थानीय जनप्रतिनिधि व प्रशासन की है साठ-गांठ,
  • गैर प्रान्तों से लाकर काम पर रखे जारहे है कर्मचारी,
  • स्थानीय बेरोजगारों को नोकरी के पड़े है लाले,
  • बेरोजगार पहुचे भुखमरी के कगार पर ,
  • एन सी एल के श्रमिक संगठन व राजनैतिक दल सेक रहे है रोटियां ,
सिंगरौली से के सी शर्मा।।अजीब विडंबना है कि एन सी एल में ओबी हटाने के लिए बाहर से आयी बड़ी बड़ी आउट सोर्सिंग कंपनियों के मालिक व मैनेजर की कुछेक वर्षो में ही सिंगरौली परिक्षेत्र के विभिन्न क्षेत्रों में उनकी इतनी पैठ बढ़ गयी है कि वे अब राजनैतिक दलों ,श्रमिक संगठनों ,जिला प्रशासन, एनसीएल प्रबंधन ,स्थानीय पत्रकारों सहित ग्रामपंचायतो के निवर्वाचित प्रतिनिधियों तक इस तरह पैठ बना लिए है मानो ऐसा लगता है जैसे उनका इस परिक्षेत्र में परोक्ष में साम्राज्य स्थापित होगया हो ।

उपरोक्त वर्गों को कोटा देकर उनके आदमियों को अपने यहा कम्पनी में सेवायोजित कर उनका मुह ही बंद नही किया है बल्कि उन्हें प्रतिमाह सनरक्षण रूपी सुबिधा शुल्क पहुँचा अपनी मनमर्जी करने का लाइसेंस रूपी आशीर्वाद भी हासील कर लिया है । यही कारण है कि जब स्थानीय लोगो के मुद्दे पर लोगो द्वारा बात की जाती है तो प्रशासन व नेता तथा जन प्रतिनिधि भी इन्ही कंपनियों के इषारे पर चलते है। यही हाल एनसीएल प्रबंधन व श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधियों का भी बना हुआ है।


स्थानीय बेरोजगारों की हालत कितनी बुरी है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि भारतीय जनता पार्टी की केंद्र में सरकार बने साढ़े तीन वर्ष से ज्यादा समय हो गया और प्रदेश में भी 6महीने से अधिक सरकार बने होगया और मध्य प्रदेश में तो आउटसोर्सिंग कम्पनियो के आने से पहले से ही भाजपा की सरकार है ।फिर भी स्थानीय बेरोजगार फटेहाल रोजगार की तलास में वर्षो से दर दर की ठोकरे खाते भटकते भटकते भूखमरी की कगार पर आगये है ।आउटसोर्सिंग कम्पनिया उक्त काकशो को मिला कर सिंगरौली की सर जमी पर वह नँगा नाच कर रहे है जिसे देख स्थानीय लोगो को ऐसी टीस लगती है जैसे उनके छाती पर कोई मूग की दाल दल रहा हो ।स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि भाजपा के बेरोजगार कार्यकर्ताओ को आज तक रोजगार नही मिल सका है ।भाजपा के हर मीटिंग बैठक में यह सवाल कार्यकता उठाते है और हर बार उन्हें वरिष्ठ नेताओं वक्षेत्रीय सांसद,विधायक के कोरे आश्वासनों की गठरी पकड़ा दी जाती है और इसी तरह महीनों ,वर्षो गुजरते चले जा रहे है और बेरोजगारों की हालत बाद से बदतर दिन प्रतिदिन होती चली जा रही है ।लेकिन इन बेचारो की सुधि लेने वाला कोई नही है ।इससे सहज ही अंदाजा लगया जा सकता है कि स्थानीय आम बेरोजगार की स्थिति क्या हो सकती है?ऐसा नही की रोजगार के सवाल पर यहा के वेरोजगरो ने संघर्ष न किया हो ,समय-समय पर बेरोजगारों को रोजगार दिलाने के लिए बिभिन्न संगठनों सिहित स्थानीय विस्थापितों द्वारा आवाज बुलंद की जाती रही है ,परन्तु उक्त काक स के सहयोग से आउट सोर्सिंग कम्पनिया प्रशासनिक स्तर से कानून का चाबुक चला उनकी जुबान को बंद करने का काम कराती रही है ।कभी धारा 144 लगा कर कभी आंदोलनकारी बेरोजगारों पर मुकदमा दर्ज कर दमनकारी नीति के तहत इनको जोगार देना तो दूर की बात इन भूखे बेरोजगारों का दमन किया जाता रहा है ।चंद चादी के सिक्के पर अपना जमीर बेचने वाले जनता के इन रहनुमाओं का दिल कभी भी नही पसीजता है ।इन्हें इनकी व्यथा सिर्फ बोट मांगते समय ही दिखती है ।यही कारण है कि इस क्षेत्र के बेरोजगारों में असन्तोष और की चिंगारी बढ़ती ही जारही है ,यह कहना अतिश्योक्ति नही होगा कि यह चिंगारी कभी ज्वाला न जाये।क्यों की बेरोजगारी वेगारी से ही क्रांति के उदय होने का इतिहास सब को मालूम ही है ।

इस क्षेत्र में कम्पनियो के प्रवंधन,नेताओ ,श्रमिक नेताओ,स्थानीय प्रशासन,आदि के दलाल क्षेत्र में घूमते रहते है यह 50 से 70 हजार में नोकरी खुले बाजार में बिकने का कारोबार फल फूल रहा है ।इतना ही नही सभी कम्पनिया लाइजनर के नाम पर अपने ,अपने कम्पनी में दलाल किस्म के आदमी भी नियुक्त कर के रखी है जिनका काम उक्त काक श को मैनेज करना और सुबिधा शुल्क उनतक पहुचाने का काम रहता है। इन कम्पनियो के मालिक व इनका प्रबन्धन तो आमलोगों की नजरों से हमेशा ओझल ही रहते है ।देश के गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने चुनाव के दौरान ककरीऔर म्योरपुर की आम सभा में यह सार्वजनिक घोषडा की थी कि यदि हमारी सरकार बनेगी तो हम कानून बना देंगे की 80%नोकरी स्थानीय लगो को ही मिलेगी वही मध्य 

प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान 60 फीसदी स्थानीय लोगों को रोजगार देने की बात करते है। लेकिन सिंगरौली के जनप्रतिनिधियों व प्रशासन को आउटसोर्सिंग कम्पनियों के कर्ताधर्ता इन्हें तवज्जों नहीं दे रहे हैं, बल्कि उल्टे उक्त निर्देशों ठेंगा दिखाने में सक्रिय हैं !

जनता को गृह मंत्री व मुख्यमंत्री की यह कोरी घोषणा मौखिक व कागजी ही दिखाई दे रही है और तब तो सरकार को दोष देते आम बेरोजगारों का आक्रोशित होना स्वाभाविक है !


आउटसोर्सिंग कम्पनियों की इस दबंगई के आगे किसी का नहीं चल रहा है। मालूम हो कि एनसीएल सिंगरौली में आउटसोर्सिंग का कार्य विभिन्न परियोजनाओं में बीजीआर, वीपीआर, सद्भाव, गजराज माइनिंग व ढोलू ,मोंटी कार्लो , के इन आई ,आदि कई कम्पनीया कार्य कर रही है। 

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एक बार फिर क्षेत्र के बेरोजगार उक्त काकश को तोड़ने के लिये अंदर खाने लामबंद होना शुरू कर दिए है जिसमे भाजपा के बेरोगरो का समर्थन उन्हें अंदर से ही सही पर प्राप्त है ।यदि समय रहते इसे गम्भीरता से नही लिया गया तो 2019 के चुनाव में जहाँ विपरीत पड़ेगा वही एक बड़े बेरोजगारी के खिलाफ बड़े जंग का कभी भी एलान होंने की संभावना से इंकार नही किया जासकता है ।

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