विकास के नाम पर जेपी ने जमीन लिया, अब जीविका के लिए दर दर भटक रहें

विकास के नाम पर जेपी ने जमीन लिया, अब जीविका के लिए दर दर भटक रहें


निगारी(सिंगरौली)।।जेपी पावर प्लांट निगरी द्वारा लोगो का जमीन व मकान अधिग्रहण के बाद ऐसे जगह पर विस्थापन किया जहां पर जानवर भी रहना पसंद नही करेगा। एक तरफ मूलभूत सुविधाओं का अभाव है तो दूसरी तरफ बेरोजगारी महिसासुर की तरह मुंह बाए है ऐसे बदहाली में जी रहे विस्थापित अपनी फरियाद किसको सुनाए पिछले दो कलेक्टर आए वादा किया फिर भूल गए। आखिर क्यों कंपनी के चकाचौंध के आगे गरीबों की बदहाली जिले के हाकिमों को दिखाई नहीं देती?

प्राप्त जानकारी के अनुसार सीधी सरई मेन रोड से लगभग 7 से 8 किलो मीटर मेन बजार निगरी से 10 किलो मीटर की दूरी पर वह भी गोपद नदी के किनारे और वह भी पावर प्लांट से सटा कर जब की उसके पहले वे लोगो का रोड के किनारे व मेन बजार के नजदीक मे मकान था। जब कंम्पनी लगाई गयी तो विकास का वादा किया गया लेकिन विकास तो दूर मूलभूत सुवीधा भी विस्थापित परिवार को नसीब नहीं हो रहा। आपको जानकर हैरत होगा के इन विस्थापित कालोनी मे विद्यालय, आँगनवाड़ी ,अस्पताल ,शमशान घाट खेल का मैदान राशन की दुकान हाट बाजार नही ही है यहाँ तक कि जे पी पावर प्लांट द्वारा विस्थापित कालोनी मे एक भी न तो सार्वजनिक और न ही व्यक्तिगत शौचालय है।


विस्थापितों का दर्द उन्हीं की जुबानी 

जिन जिन किसानो को विस्थापित किया गया है उनमे से तो कुछ लोगों  को प्लाट तो दे दिया गया लेकिन न तो उन्हे मकान बनाने के लिए कोई पैसा दिया गया और न ही रोजगार दिया गया।

रामबरन यादव - का कहना है कि हमे प्लाट  तो दे दिया गया लेकिन मकान बनाने के लिए कोई राशि नही दी गयी और न ही कोई रोजगार दिया गया हमारा परिवार भूखे मरने के कगार पर है जमीन था तो कंम्पनी ले ली अब हम अपनी व अपने परिवार की जीविका कैसे चलाये ।

राजमन कुशवाहा- का भी यह कहना है कि हमे मकान के बदले प्लाट तो दे दिया गया लेकिन न तो मकान कंम्पनी द्वारा बनवाया गया और न बनवाने के लिए पैसा दिया गया और न ही कंम्पनी मे मुझे कोई रोजगार दिया गया जिससे हमारा भी परिवार संकट झेल रहा है यदि हम कही गांव मे मजदूरी करके लाते है तो परिवार को भोजन मिल पाता है नही तो भूखे रहते है।और बच्चे पढने भी नही जाते है क्यो की स्कूल यहा से 10 किलो मीटर दूरी पर है और विस्थापित कालोनी मे है नही तो छोटे - छोटे बच्चे कैसे जाय बीच रास्ते मे रेल्वे लाईन भी पड़ता है जिसमे कोई गेट नही लगा है।दिन भर कोयला लेकर मालगाड़ी आती जाती रहती है।

बुटिया साहू- का कहना है कि मेरा पूरा घर प्लांट मे फस गया लेकिन हमारे परिवार के लोगो मे किसी को रोजगार नही दिया गया है प्लांट व मकान बनाने के लिए बस पैसा दिया गया है जिसमे की एक लड़का मेरा बजार से मोटर सायकल आवस कालोनी घर आ रहा था तो रास्ते में गढ्ढे होने के कारण मोटर सायकल से गिरने के कारण मृत्यु हो गयी ।

चन्दन साहू- का कहना है कि हम लोगो को कंम्पनी द्वारा नरक मे लाकर बसा दिया गया है जहा पर प्लांट से इतनी आवाज आती है कि न तो बच्चे पूरी नीद सो पाते है और न ही पढ पाते है और इतना ज्यादा कोयले का डस्ट उड़ती है की यदि कोई कपड़े घर के बाहर सुखा दिया जाय तो वह कुछ ही घंन्टो के अन्दर काला हो जाता है।और यदि एक किलो नमक व एक बुखार की गोली भी खरीदनी हो तो 10 किलो मीटर दूरी जाना पड़ता है वह भी कंम्पनी द्वारा विस्थापित कालोनी पहुच मार्ग मे गढ्ढे ही गढ्ढो से गुजरना पड़ता कभी दुर्घटना हो सकती है।

चौपाल लगा,समस्या सुना गया लेकिन हुआ कुछ नहीं 

इसके अलावा भी जेपी पावर प्लांट के विस्थापित कालोनी मे ढेरो समास्ये है जिन्हे हल करने के लिए तत्कालीन कलेक्टर शशांक मिश्रा द्वारा विस्थापित कालोनी मे चौपाल लगा कर लोगो की समस्या सुन कर कंम्पनी प्रबंधन को मौके पर बुला कर हल करने को कहा गया था लेकिन उनके रहते थोड़ा बहुत कालोनी मे रोड व नाली बनाया गया लेकिन उनके जाते ही उन समास्यो को हल करना भूल गया।

एक बार निगरी प्रवास के दौरान तत्कालीन कलेक्टर शिवनारायण सिंह चौहान द्वारा विस्थापित कालोनी मे जाते जाते आधे रास्ते से लौट आए जिससे विस्थापित कालोनी वासियो का और भी मनोबल टूट गया की अब किसके पास जाए  जब प्रशासन की बात नही मानता कंम्पनी प्रबंधन जब की इसके पहले विस्थापितो व ग्राम वासियो के द्वारा सिद्ध नाथ साहू के अगुआई मे कलेक्ट्रेट से लेकर एसडीएम कार्यालय व कंम्पनी तक विस्थापितो की मागो को लेकर धरना प्रदर्शन भी किया गया लेकिन प्रशासन की इशारे पर विस्थापितो की एक भी नही सुनी गयी।

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