सोनभद्र में एक मजदूर काम मांगते मांगते मर गया

(प्रतीकात्मक तस्वीर)

अब्दुल रशीद।।कहते हैं गरीबी से बड़ी गाली और भूख से बड़ी लाचारी कुछ नहीं होता.यह भूख की लाचारी थी के एक मजदूर उस कंपनी के चौखट पर माथा टेकने बार बार जाता रहा जिस कंपनी ने उसे निलंबित कर दिया था।. मोंटी कार्लो कंपनी जहां से उसे निलंबित कर दिया गया था उसी के कैम्पस में बुधवार को मजदूरी और मज़बूरी के दो पाटो में पिस्ता मजदूर भूख की लाचारी के सामने आपा खो दिया और और खुद को आग लगा लिया।  

प्राप्त जानकारी के अनुसार शक्तिनगर थाना अन्तर्गत बीना पुलिस चैकी क्षेत्र के कोहरौल गांव निवासी महेंद्र पुत्र बोधेलाल गुप्ता उम्र 27 वर्ष ने नौकरी से निलंबित करने के बहाने कम्पनी से निकाल दिए जाने से क्षुब्ध होकर बुधवार की पूर्वान्ह ग्यारह बजे एनसीएल कृष्ण शिला परियोजना के खदान क्षेत्र में ओबी हटाने का काम कर रही संविदा कंपनी “मोंटे कार्लो “के कार्यालय के समक्ष अपने उपर डीजल डालकर आग लगा ली। उसके शरीर से आग की लपटें उठती देख वहां मौजूद लोगों के होष उड़ गए। आनन-फानन में उसे जयंत स्थित नेहरू चिकित्सालय ले जाया गया। वहां उसकी गंभीर हालत को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने वाराणसी के लिए रेफर कर दिया। वाराणसी में उपचार के बाद भी सुधार न होने पर लखनऊ रेफेर किया गया लेकिन पहुँचने से पहले रास्ते में ही दम तोड़ दिया। 


क्या था मामला 

महेन्द्र गुप्ता 27 वर्ष पुत्र बोधे गुप्ता को एक महीने पहले कंपनी ने निलंबित कर काम से हटा दिया गया था। परिवार वालों के मुताबिक इसके बाद निलंबित महेंद्र गुप्ता एक दो दिन के अंतराल में कम्पनी के कार्यालय जाकर कम्पनी प्रबन्धन से मिलता था और काम पर बहाल करने का आग्रह किया करता था। परन्तु ओबी कार्य से जुड़ी कंपनी का प्रवंधन सिर्फ आश्वाशन दे कर टाल मटोल करते रहे। काम से निकाले जाने के बाद सम्बिदा मजदूर महेंद्र काफी परेसान चल रहा था ।त्यौहार का महीना होने के चलते वह आर्थिक तंगी के कारण वह काफी तंग हो गया था। ऊपर से पारिवारिक जिम्मेदारी के चलते वह कुछ दिन से काफी मानसिक तनाव से गुजर रहा था और बुधवार को भी वह इसी सिलसिले में कंपनी प्रवंधन के समक्ष अपनी फरियाद लगाने पहुंचा हुआ था। वहां उसके और प्रबन्धन के बीच कुछ ऐसा हुआ कि उससे क्षुब्ध होकर उसने खुद को आग लगा ली। 

क्या है प्रशासन का नजरिया 


सबसे अहम सवाल यह है कि क्या कभी इस बात कि जांच होगी के कंपनी परिसर में ऐसी कौन सी परिस्थिति निर्मित हु जिसके कारण घर से उम्मीद लिए निकला मजदूर इतना नाउम्मीद हो गया के खुद को आग के हावाले करके अपनी जिंदगी ही खत्म कर लिया। 

राजनीति से उपर उठकर ज़रा सोंचिए,ऐसा कौन सा आशिर्वाद प्राप्त है इस क्षेत्र को की  कबाड़ी,कोयला माफ़िया और डीजल माफ़िया करोड़ो का अवैध कारोबार खुलेआम करता है लेकिन यहाँ का एक युवा मजदूर इमानदारी के दो वक्त कि रोटी के लिए काम मांगते मांगते  मर जाता है?
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