विदेशी है हिंदू राष्ट्रवाद का विचार- रामचंद्र गुहा

विदेशी है हिंदू राष्ट्रवाद का विचार- रामचंद्र गुहा

(फाइल फोटो- रामचंद्र गुहा) 
बेंगलुरु।।इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने राष्ट्रवाद के हिंदुत्व मॉडल को 19वीं सदी के यूरोपीयन और मध्ययुगीन मिडल-ईस्ट (इस्लामिक) विचारों पर आधारित बताया है। उन्होंने इसे श्रेष्ठता बोध की उन्मादी भावना करार दिया है जो बाकी लोगों को सेकंड क्लास के तौर पर या फिर उन्हें तबाह कर देने की भावना से प्रेरित होता है। 
गुहा ने बेंगलुरु में लिटरेचर फेस्टिवल के दौरान शनिवार को कहा, 'इस्लामिक राष्ट्र पाकिस्तान एक ऐसा मुल्क है, जो पूरी तरह से यूरोपीय राष्ट्रवाद का अनुसरण करता है। हिंदुत्व राष्ट्रवाद भारत का मूल स्वदेशी विचार नहीं है। इसकी जड़ें अपने आदर्शों में भी नहीं है। भारत के राष्ट्रवाद को यूरोप से आयात नहीं किया जा सकता है। यह बहुलतावाद पर आधारित है और किसी एक भाषा या धर्म के आधार पर तय नहीं किया जा सकता है। ऐसा करना देश को बर्बाद कर देगा।' 
उन्होंने कहा, '19वीं सदी में यूरोप का राष्ट्रवाद पूरी तरह से साझी भाषा, साझा धर्म और साझे बाहरी शत्रु के विचार पर आधारित था। उदाहरण के तौर पर फ्रांस में सभी लोग फ्रेंच बोलते थे, सभी कैथोलिक थे और इंग्लैंड से घृणा करते थे। अब आरएसएस का मॉडल कहता है कि हिंदी ही राष्ट्रीय भाषा है, हम सभी को हिंदू होना चाहिए और पाकिस्तान से नफरत करनी चाहिए।' उन्होंने कहा कि इसी तरह से मध्यकालीन मध्य-पूर्व में इस्लाम ही सर्वोपरि था और बाकी सभी को खत्म कर दिया। 
गुहा ने कहा, 'देशभक्ति तब है जब आप यह स्पष्ट कर सकें कि कोई भी राज्य या संस्कृति पूरी तरह से परफेक्ट नहीं है। जब आपको अपने राज्य की असफलता पर शर्मिंदगी हो और उसे सही करने की इच्छा हो। जब आपको दूसरी सभ्यताओं से भी सीखने की इच्छा जगे। वहीं कट्टर राष्ट्रवाद इससे उलट है, जिसमें आप दूसरे से लड़ने की मुस्तैदी की शेखी मारें और यह बदला लेने और घृणा की भावना से पूर्ण हो।'(Source-NBT)

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