बिहार सरकार ने मिट्टी घोटाला की जांच निगरानी को सौंपा

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पटना(स्टेट हेड,मुकेशकुमार)।।बिहार सरकार ने मिट्टी घोटाला में निगरानी को सौंपा जांच का जिम्मा। मामले में आरोपी हैं राजद सुप्रीमो लालू यादव और पूर्व मंत्री तेजप्रताप यादव।

उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी ने इस मामले को उठाया था और बताया था कि किस तरह लालू यादव ने पटना जू को अपने निर्माणाधीन मॉल के साइट से निकाली गई मिट्टी बेच दी और इसके लिए कोई टेंडर भी निकाला नहीं गया। गौरतलब है कि पटना ज़ू वन एवं पर्यावरण विभाग के मातहत काम करता है और इस विभाग के मंत्री लालू यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव थे। बड़ी बात ये है कि जब राजद जदयू के साथ था, उस वक्त लालू परिवार को इस मामले में क्लीनचिट मिल गई थी।

जो मुख्य बातें इस मामले में सामने आई हैं, वो इस प्रकार हैं …

निदेशक, संजय गाँधी जैविक उद्यान पटना के पत्रांक – 1371, दिनांक – 9.08.2016 के अनुसार उद्यान में “मिट्टी के पथ निर्माण का औचित्य दर्शकों की संख्या में वृद्धि एवं भविष्य में होने वाली सम्भावित वृद्धि बताया गया है। जबकि, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक–सह-मुख्य वन प्राणी प्रतिपालक,बिहार पटना के जाँच प्रतिवेदन (18.07.2017) की कंडिका – 1 के अनुच्छेद – 7 में उल्लेख है कि ‘मिट्टी के पथ निर्माण कार्य का औचित्य अन्य व्यावहारिक प्रयोजन यथा उक्त दूरस्थ भूखंड में सुरक्षा हेतु निगरानी कार्य, आगंतुकों को घुमने के लिए All Weather Path जो वर्षा ऋतु में भी उपयोगी रहे एवं गर्मी के समय में अग्नि सुरक्षा कार्यों के लिए पहुंच पथ तथा उक्त कोने में बाउंडरी वॉल के हिस्से सुदृढ़ीकरण हेतु बहु उपयोगी प्रयोजनों से भी संयोजित है’। इस प्रतिवेदन में दर्शकों की संख्या में वृद्धि एवं भविष्य में होने वाली सम्भावित वृद्धि को पथ निर्माण के कार्य का औचित्य नहीं बताया गया है. इस प्रकार पथ निर्माण के औचित्य के सम्बन्ध में दोनों पदाधिकारियों द्वारा भिन्न बातें बताई गई हैं।

Airport Authority of India के प्रस्ताव को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार के पत्रांक 5. बीएच.बी 167/2012. बी.एच.क्यू. दिनांक – 10.07.2012 द्वारा दिए गये सुझाव के अनुसार चिड़ियाघर के landscaping को redesign करने के क्रम में animal houses, forest rest house & Director’s bunglow को relocate किया जाना था। किन्तु ऐसा न करके pathway का निर्माण क्यों कराया गया ? फिर, पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, भारत सरकार का उक्त पत्र वर्ष 2012 में निर्गत है, जबकि कार्रवाई 4 वर्षों बाद वर्ष 2016 में क्यों की गई?
उक्त पत्र में उल्लेख है कि flight funnel area में theme based garden यथा evolution garden, masala, garden, herbal garden, butterfly garden, holy plant garden, RET species आदि विकसित करने के विषय में सोचा किया जा सकता है। क्या भारत सरकार के इस सुझाव पर विचार किया गया ? इस सुझाव को दरकिनार करते हुए किस परिस्थिति में 4 वर्षो के बाद pathway का निर्माण कराने का निर्णय लिया गया ? पुनः इस कार्य हेतु राशि का व्यय airport Authority of India के CSR activity से होना था किन्तु pathway का निर्माण राज्य योजना मद की राशि से क्यों कराया गया ?

बिहार वित्त (संशोधन) नियमावली-2016 के अनुसार 50 हजार रूपये की खरीद बिना कोटेशन के, 50 हजार रुपया से 5 लाख रूपये तक की खरीदगी तीन सदस्यों वाली स्थानीय क्रय समिति की अनुशंसा पर तथा 5 लाख रुपया से अधिक की खरीद निविदा के माध्यम से कराने का प्रावधान है। मिट्टी की खरीद में इन प्रावधानों का अनुपालन क्यों नहीं किया गया ?

कोटेशन संबंधित सूचना का प्रकाशन/प्रचार कहाँ–कहाँ और किस प्रकार कराया गया ?

कोटेशन में 17 items का उल्लेख हैं जबकि सिर्फ मिट्टी क्रय एवं बोल्डर के लिए ही कोटेशन प्राप्त किये गये। शेष 15 items के लिए कोटेशन प्राप्त किये जाने एवं इनसे संबंधित कार्य कराये जाने के संबंध स्पष्ट विवरण उपलब्ध करायें।

संचिका के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि मिट्टी की खरीद के लिए प्राप्त सभी कोटेशन एक ही दिन दिनांक- 23.08.2016 को निर्गत हैं तथा कोटेशन देने वाले सभी एजेंसी द्वारा मिट्टी के दर्शाये गये दर क्रमशः 4500 रु०, 4700 रु०, 4800 रु० एवं 5000 रु० प्रति हाइवा में 200 cft. compact मिट्टी/500 cft. loose मिट्टी हैं। प्रारंभ के चार दरों में क्रमशः मात्र 100 रूपये का एवं अंतिम दो दरों में 200 रु० का अंतर है। इससे प्रतीत होता है कि कोटेशन को manage करने कार्य का आवंटन किया गया। इस सम्बन्ध में स्थिति स्पष्ट करें।

पाथवे के विभिन्न भागों की ऊंचाई 4 फीट, 3 फीट एवं 2 फीट रखी गई है। ऐसा प्रतीत होता है कि पाथवे की ऊंचाई जान बुझकर बढाई गई ताकि अत्यधिक मिट्टी का उपयोग किया जा सके। अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक-सह-मुख्य वन प्राणी प्रतिपालक बिहार, पटना के प्रतिवेदन में स्वीकार किया गया है मोरम का प्रयोग होने पर पथ की ऊंचाई कम हो सकती थी। फिर, ऐसा क्यों नहीं किया गया ?
Botanical section & Animal enclosures आसपास ही है, ऐसे में रात्रि में हाइवा से 189 ट्रिप मिट्टी मंगाने पर वन प्राणियों पर कुप्रभाव पड़ना अवश्यम्भावी है।
अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक-सह-मुख्य वन प्राणी प्रतिपालक, बिहार, पटना के प्रतिवेदन की कंडिका 4 में उल्लेख है कि उनके एवं निदेशक, पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण द्वारा 6 स्थलों का भ्रमण किया गया एवं वहाँ से मिट्टी प्राप्त होने प्रमाण व्यवहारिक तौर पर उपलब्ध पाए गये। इनमें से 4 स्थलों पर उपलब्ध निर्माण कार्य से संबधित व्यक्तियों ने मेसर्स एम.एस.इंटर प्राईजेज को मिट्टी उपलब्ध कराये जाने की बात को स्वीकार की। प्रतिवेदन में भ्रमण किये गये शेष 2 स्थलों से प्राप्त मिट्टी के आपूर्तिकर्ता के सम्बन्ध में उल्लेख क्यों नहीं किया गया ? इस बात की जाँच क्यों नहीं की गई कि उर्पयुक्त चार स्थलों से उपलब्ध करायी गई मिट्टी का उपयोग कहाँ किया गया। उल्लेखनीय है कि संजय गाँधी जैविक उद्यान, पटना में मिट्टी गिराने का कार्य मेसर्स एम.एस.इंटरप्राईजेज को दिया गया था। अतः इस सम्बन्ध में निदेशक पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण के इस अभिमत से सहमत नहीं कि ”इतने दिनों के बाद यह संपुष्ट करना अब संभव नहीं कि जो मिट्टी आपूर्ति की गई थी वह निश्चित रूप से उन्हीं स्थलों से कितनी मात्रा में आपूर्ति की गई। ”

Pathway के निर्माण का प्रस्ताव कहाँ से आया तथा किस स्तर पर इसका निर्णय लिया गया ? इस संबंध में यदि किसी बैठक में निर्णय लिया गया है तो उसकी कार्यवाही प्रति उपलब्ध कराया जाय।

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