पूर्व सैनिक ने नौनिहालों को शिक्षित करने का उठाया बीड़ा

उर्जांचल टाइगर (जो दिखेगा,वो छपेगा)


गरीब परिवार के बच्चों को दी जा रही है मुफ्त किताब, बस्ता व अन्य सुविधाएं।
धानापुर(चन्दौली)।शिक्षा के बिना सभ्य समाज की कल्पना बेमानी है। अगर हमें अपने समाज व राष्ट्र के विकास को गति देना है तो इसके लिए हमें सर्व समाज के नन्हें-मुन्ने बालकों को शिक्षित करना होगा। कहते हैं कि बच्चे ही राष्ट्र के भविष्य होते हैं। इसी क्रम में आभाव में जीने वाले गरीब इंसानों की बस्ती में खिलखिला रहे भारत के इन मासूम भविष्य को इकट्ठा कर पढ़ाने का छोटा प्रयास खड़ान गाँव के हरिजन बस्ती में शुरू किया है पूर्व सैनिक अंजनी सिंह ने। धानापुर विकास खण्ड के खड़ान गाँव निवासी अंजनी सिंह आम इंसान की जरूरतों में सदैव शामिल रहते हैं। जात-पात और भेद-भाव मुक्त समाज की कल्पना के साथ ही ये समाज के दबे कुचले तबके के कल्याण के लिए लम्बे समय से संघर्ष कर रहे हैं। इस बार इनका फोकस शिक्षा से वंचित बच्चों को शिक्षित करना है। इन्होंने कुछ युवाओं की मदद से खुद के खर्च पर कापी, किताब, बैग आदि का इंतजाम कर गांव के हरिजन बस्ती के बच्चों को एक जगह इकट्ठा कर शिक्षा का लौ जगाने का प्रयास किया है। वैसे तो केंद्र व राज्य सरकार ने सब पढ़े, सब बढ़े के नारे के साथ सबको शिक्षित करने का मुहिम जरूर छेड़ रखा है मगर उसकी हक़ीक़त सबके सामने है! पूर्व सैनिक अंजनी सिंह अपने इस अभियान में सहयोग देने के लिए युवा वीरेंद्र राम और उनके साथियों को धन्यवाद देना नहीं भूलते। अंजनी सिंह कहते हैं कि क्षेत्र सहित देश व प्रदेश के युवा बुद्धिजीवी समाज को साथ लेकर गाँव-गाँव गरीब किसान, मजदूरों के बच्चों को शिक्षा दें। इस क्रम को निरंतरता प्रदान करें। उन्होंने एक नारा दिया कि चलो गरीब किसान मजदूरों के घर शिक्षा का अलख जगाएं।
एक बेहतर मकसद के लिए संघर्ष कर रहे इस पूर्व सैनिक ने अपने इस अभियान से साबित कर दिया है कि परिंदे परों से नहीं उड़ते, हौसलों से उड़ान होती है।

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