मैं हेलमेट हूँ


विमल मिश्र "विमल"अध्यापक/पत्रकार
मन मेरा बेचैन है।
दुखी दोनों नैन हैं।।
जीवन बचाता हूँ।
काम खूब आता हूँ।।
फिर भी मुझसे दूरी है।
ऐसी क्या मजबूरी है।।

अफ़सोस!तमाम अभियानों के बाद भी,
लोग नहीं जाग रहे।
पुलिस को देखकर,
इधर-उधर भाग रहे।।

पता नहीं क्यों लोग,
मुझे लगाने से डरते हैं।
आये दिन सड़कों पर,
बिना मौत मरते हैं।।

मैं तो कहता हूँ कि,
जब भी बाइक चलाओ।
बिना किसी झिझक के,
गर्व के साथ मुझको लगाओ।।

मित्रो,जब भी कोई दुर्घटना हुयी,
"काश!हेलमेट लगा होता" कहकर
लोगों ने सदैव मुझको ही कोसा है,
क्योंकि सब जानते हैं कि बाइक पर,
हेलमेट ही सुरक्षित यातायात का भरोसा है।।

खीरी के एस पी साहब ने,
भी अभियान चलाया है।
न जाने कितने लोगों को,
हेलमेट मुफ़्त दिलाया है।।

उठो,शपथ लो।बिन हेलमेट के,
बाइक नहीं चलानी है।
खीरी की यह पहल अनूठी,
हर जनपद पहुंचा

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