जाति भेद के कारण भारत गुलाम रहा इस बुराई को मिटाएंगे- पंकज


नोएडा (उ.प्र.)।। जातिगत भेद-भाव और अहंकार एक सामाजिक कलंक है, इससे समाज को मुक्त करने के लिए नागरिक निर्माण और मानसिक परिवर्तन की आवश्यकता है तब जाकर समाज में एकता और बंधुत्व को बढ़ावा मिलेगा। 
उक्त उदगर विहंग योग सेवा संस्थान के प्रांत प्रमुख, चिंतक और लेखक पंकज के सिंह ने रविवार को सिंह सदन नोएडा में आयोजित योग एवं ध्यान शिविर में व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मानसिक क्रान्ति का एकमात्र स्रोत योग साधना एवं ध्यान ही है। इस कार्यक्रम में तकरीबन 400 लोगों ने एक साथ योग गुरु स्वामी आशुतोष महाराज के दिशानिर्देश में योगाभ्यास एवं साधना के साथ ही ध्यान का प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस प्रशिक्षण के दौरान मौजूद लोगों को काया ध्यान, योग निदान एवं आहार व्यवहार का विशेष अभ्यास और प्रशिक्षण दिया गया। 


कार्यक्रम के दौरान ही विचारक, चिंतक एवं लेखक पंकज के सिंह द्वारा लिखित पुस्तक 'पखण्डमुक्त भारत' का लोकार्पण किया गया। सामाजिक समरसता एवं राष्ट्रीय एकता विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। जिसमें वक्ताओं ने समाज में व्याप्त कट्टरता, भेद-भाव तथा जातिवाद पर चिन्ता व्यक्त किया। भारत को विभिन्न प्रकार की कुरीतियों तथा नफरत से मुक्त करने का संकल्प लोगों ने लिया। मौजूद लोगों ने प्रण लिया कि भूत में हुए भूल और गलतियों से सबक लेकर सुनहरे भविष्य की आधारशिला रखा जाएगा। 
आगामी दिसम्बर माह में आयोजित होने वाले विशाल योग एवं ध्यान शिविर के लिए पंजीकरण की शुरुवात भी किया गया। 
इस दौरान प्रमुख रूप से अधिशासी अभियंता मनोज कुमार, उधोगपति आराधना सिंह, गौरव गुप्ता, रविन्द्र, कपिल जैन, मनीष गुप्ता, मनोज, अनूप खन्ना सहित राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के अनेक पदाधिकारियों एवं गणमान्य लोगों मौजूद रहे। 
कार्यक्रम की अध्यक्षता डायमंड बुक्स प्रकाशन के चेयरमैन नरेंद्र वर्मा एवं संचालन अनूप खन्ना ने किया।

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