इंडियन चेष्ट सोसाइटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा सूर्यकान्त आई एम ए के राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा समान्नित

इंडियन चेष्ट सोसाइटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा सूर्यकान्त आई एम ए के राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा समान्नित


खान पान व व्यायाम को अपनी जीवन शैली का हिस्सा बनाये - डा सूर्यकान्त

दीप शंकर मिश्र"दीप"विशेष संवाददाता
लखनऊ।। इंसान अपनी मेहनत के बलबूते एक दिन एक ऐसे मुकाम को पा लेता है कि लोग उस इंसान को उसके द्वारा किये गए कार्यों से बखूबी पहचान कर बिना सराहना किये नही रह पाते और शायद इसीलिए एक कहावत कही गयी है कि इंसान अपने नाम से नही बल्कि अपने द्वारा किये गए कार्यों से जाना जाता है *और इस कहावत को सच कर दिखाया है मिलनसार व मृदु भाषी डाक्टर चिकित्सा विभाग के रेस्पाइरेटरी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ० सूर्यकांत ने जिस वजह से डॉ० सूर्यकांत को आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा सम्मानित किया गया।*
बताते चलें कि डॉ० सूर्यकांत ने कैंसर रोगों के बारे में उल्लेखनीय कार्य किये जिस वजह से इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के प्रतिष्ठित डॉक्टर लैचमेन्स कैंसर अवएरनेस एन्ड रिसर्च अवार्ड से सम्मानित किया गया।
आगरा में हुए आहूत इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के 82वें वार्षिक सम्मेलन में आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ० रवि वानखेड़कर द्वारा उपरोक्त अवार्ड से डॉ० सूर्यकांत को सम्मानित किया गया।
ज्ञात हो कि डॉ० सूर्यकांत इंडियन चेस्ट सोसाइटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी है व पूर्व में डॉ० सूर्यकांत इंडियन साइंस कांग्रेस एसोसिएशन के मेडिकल साइंस प्रभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष और इंडियन चेस्ट सोसाइटी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी रह चुके है।

डॉ० सूर्यकांत ने लंग केंसर पर एक किताब भी लिखी है व केंसर के क्षेत्र में इनके अनेक सोध पत्र राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय जनरलस में प्रकाशित हो चुके है।

इन्होंने अपने लेखों व वार्ताओं के माध्यम से लगभग 2 दशक से अधिक समय से लोगों में कैंसर के बारे में जागरूकता फैला रहे है जिस वजह से इन्हें हुकुमचंद्र जैन अवार्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है।

डॉ० सूर्यकांत को प्राइड ऑफ इंडिया व उ०प्र० सरकार द्वारा विज्ञान गौरव अवार्ड और राज्य हिंदी संस्थान द्वारा विश्वविद्यालय स्तरीय हिंदी सम्मान से भी सम्मानित किया जा चुका है।

डॉ० सूर्यकांत ने लोगों को उर्जान्चल टाइगर के माध्यम से जानकारी देते हए बोले कि अधिकांश प्रकार के कैंसरों से बचाव हो सकता है मगर जरूरत बस इस बात की है कि लोग तम्बाकू, धूम्रपान जैसी आदतों से बच कर रहे।

खान पान व व्यायाम को अपनी जीवन शैली का हिस्सा बनाये।
डॉ० सूर्यकांत ने उर्जान्चल टाईगर के विशेष सवांददाता दीप शंकर मिश्र'दीप" को बताया कि जागरूकता फैलाने के लिए चिकित्सकों की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि चिकित्सकों का कर्तव्य है कि हर मरीज को संभावित कैंसर कारकों के बारे में सरल भाषा मे जानकारी दे और यदि जरूरी हो तो तम्बाकू निषेध कार्यक्रमों से जोड़े ताकि वे कैंसर से बच सकें
उन्होंने यह भी बताया कि टीबी, हृदयरोग व डायबिटीज से पहले से ही जूझ रहा हमारा देश अब धीरे धीरे कैंसर के बढ़ते मामलों में जकड़ता जाएगा। 
अंत मे उन्होंने यह कहते हुए अपनी बात समाप्त किया कि कैंसर से बचाव व इससे जुड़े जांचकार्यों को प्राथमिकता दे।
जानकारी के लिए बता दे कि डॉ० सूर्यकांत हिंदी भाषा में चिकित्सा विषयक कई पुस्तकें भी लिख चुके है जिस वजह से उनके शोध कार्यों व उल्लेखनीय योगदानों को दृष्टिगत कर इन्हें उ०प्र० एवं उड़ीसा के राज्यपाल द्वारा भी सम्मानित किया जा चुका है।

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