बेसहारा की बच्चियों को रिश्तेदारों ने दिया सहारा

बेसहारा की बच्चियों को रिश्तेदारों ने दिया सहारा


बिन दहेज के विवाह कर इंसानियत का मिशाल पेश किया।
धानापुर-चन्दौली। कहते हैं जिसका कोई नहीं उसका खुदा होता है। कायनात के हर जर्रे में खुदा मौजूद तो है मगर कहीं नुमाया नहीं। वह इंसानों की शक्ल में ही समाज को बेहतर संदेश पहुंचा देता है। कुछ ऐसा ही आज धानापुर कस्बे में नजीर बना। इसी साल 27 जून को हुए हत्या कांड ने एक परिवार को बिल्कुल बेसहारा कर दिया। जो सरताज हत्या कांड के नाम से जाना गया, इस हत्या कांड में परिवार का एक मात्र सहारा सरताज खान जिस की उम्र तकरीबन 19 साल रही होगी और जिस पर परिवार का सारा बोझ था क्योंकि सरताज के पिता जो आर्मी के रिटायर्ड थे जिनकी एक साल पहले कैंसर के इलाज के दौरान मौत हो चुकी थी। सरताज की तीन कुंवारी बहनें जिनकी शादी की जिम्मेदारी पिता के मरने के बाद सरताज के कंधों पर था। असमय सरताज की मौत ने पूरे परिवार को बेसहारा कर दिया। ऐसे विपरीत परिस्तिथि मे रिस्तेदारों ने इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए बिना बारीतियो और बिना दहेज के सरताज की बहनों को अपना लिया और निकाह करके विदा कराकर अपने घर ले गए। जिसमें कलाम खान पुत्र मुनव्वर खान निवासी धानापुर पठानटोली, राजा तनवीर खान पुत्र अबुल मोहसीन खान निवासी धानापुर पठानटोली और तीसरे पिंटू निवासी मन्नापुर जो लड़की के खाला के लड़के है इन लोगो ने एक साथ तीनो बेसहारा लड़कियों का हाथ थाम कर उन्हें सहारा देकर समाज में एक बहुत बड़ा पैगाम दिया है, जिसकी प्रसंसा चहूंओर किया जा रहा है। इस नेक काम से हर कोई सबक ले ले तो लड़कियां समाज में बोझ नहीं बनेंगी।

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