सावधान योगी- निकाय चुनाव बहुमत आया बहुमन गया

सावधान योगी- निकाय चुनाव बहुमत आया बहुमन गया

प्रदेश के प्रथम भगवाधारी ईमानदार सन्याशी मुख्यमंत्री व ब्राह्मण प्रदेश अध्यक्ष दिनेश शर्मा और सुरेश खन्ना जैसे नेक मन्त्री के होते हुये भाजपा ने बहुमत पाया तो बहुमत खोया है इस लिये भाजपा का निकाय चुनाव मे नगर पालिका व नगर पंचायत मे अच्छा प्रदर्शन नही रहा है।
दीप शंकर मिश्र"दीप"
विशेष संवाददाता।।लखनऊ।। प्रदेश के नगर निकाय चुनाव में भाजपा को भले ही ईमानदार भगवाधारी मुख्य मंत्री व ईमानदार प्रधानमंत्री के नाम पर भले ही बहुमत मिल गया हो परन्तु यह सत्य है की भाजपा के नेताओ को ईमानदार मुख्यमंत्री और दिनेश शर्मा जैसे उपमुख्य मन्त्री तथा सुरेशखन्ना जैसे नेक मंत्री की तनिक हवा भी अभी नही लगी है । नगर पंचायत नगर पालिका परिषद की सीटों पर भाजपा का प्रदर्शन अच्छा नही होना इस बात का जीता जागता गवाह है ।भाजपा के ईमानदार मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के नेतृत्व मे लड़ा गया चुनाव कमल खिलाने में जनपद स्तर पर पार्टी की टिकट वितरण में जिताऊ प्रत्याशी की अनदेखी और जिला स्तर पर आम जनता की जेब में पड़ रहे डाके भ्र्ष्टाचार के चलते ही शायद प्रदेश की आधी से भी कम नगर पालिका व नगर पंचायतों मे भाजपा का कमल खिलने में पूरी तरह कामयाब नही रहा । ईमादार प्रधानमंत्री ईमानदार मुख्य मंत्री व ब्राह्मण प्रदेश अध्यक्ष के होते हुये नगर पंचायतों व नगर पालिका का चुनाव जहाँ मतदान में अधिकांश आम जनता की भागी दारी होती है वहाँ सत्ता पक्ष की पार्टी को आधी सीटों पर भी अपना परचम न लहरा पाना पूरी तरह कमल खिला नजर न आना यह दर्शाता है की भाजपा के नेताओं विधायकों में ईमानदार मुख्य मंत्री की तनिक भी हवा नही लगी है भ्र्ष्टाचार से आम जनता त्रस्त है यही कारण है की चुनावी नतीज़ों के अनुसार नगर पंचायत के 437 निर्ववाचित परिणामों सत्ता धारी भाजपा पार्टी को आधे से भी कम मात्र 100 सीटों से सन्तोष करते हुये 337 नगर पंचायत की सीटों पर सत्ता धारी पार्टी को हार का मुहँ देखना फिर गुलाल खेलकर आम जनता को मुहँ चिढाना सराहनीय नही यही हाल नगर पालिका की निर्वाचित 195 सीटों का है यहाँ भी अधिकांश आम जनता अपने मत का प्रयोग करती है । जो लोक सभा और बिधान सभा के चुनाव में मोदी नाम की लहर में बही थी वही जनता अपने मत का प्रयोग करती है । यहां भी सत्ताधारी पार्टी को आधे से भी कम मात्र 68 सीटों पर जीत का झंडा फहराकर 127 सीटों से हार का सामना करना पड़ा मेरे विचार से जनपद स्तर के नेताओं को बुलाकर ईमानदार प्रदेश के प्रथम सन्याशी मुख्य मंत्री योगी आदित्य नाथ और नव नियुक्त भाजपा के ब्राह्मण प्रदेश अध्यछ महेन्द्र नाथ पांडेय को इस हार की समीक्षा करनी होगी । क्योंकि इससे यह प्रतीत होता है की थाना तहसील ब्लाक इत्यादि के भ्र्ष्टाचार से आम जनता त्रस्त है और भाजपा के नेता मस्त है गुलाल खेलने वाले भाजपा के नेता बिधायक नगर पंचायत व नगर पालिका के चुनाव की समीचा करे क्योंकि इस चुनाव से यह प्रतीत होता है की हम शहरी क्षेत्र के को छोड़कर अन्य क्षेत्रों के लोगो का मन जमीनी लोगों का मन जितने में कामयाब नही है इस लिये निकाय चुनाव के बहु मन को जीतने की यदि भाजपा समीक्षा नही करती तो भविष्य में परिणाम अच्छे नही होंगे।

सत्ता में बैठकर ईमानदार मुख्य मंत्री ईमानदार प्रधान मंत्री के नाम के सहारे मात्र 14 मेयर बनाकर अपनी कामयाबी का ढ़िढोरा पीटना अपने साथ ईमानदारी का उपहास उड़ाकर पार्टी के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ साबित होगा क्योंकि यहाँ हाँ भी BSP के हांथी ने फूल का पीछा नही छोड़ा है और अलीगढ़ मेरठ जैसे महत्व पूर्ण महानगरों में बसपा के हांथी न सत्ता धारी पार्टी के कमल को खिलने से रोक दिया वह भी मेरठ और अलीगढ़ से महत्व पूर्ण शहर में 16 नगर निगमो में 14 में भाजपा को कामयाबी जरूर मिली परन्तु यहां पर 2 नगर निगमों में बसपा अपना मेयर बनाने में कामयाब रही है । भाजपा नेताओं ने यदि आम आदमी के दिल की धड़कन को नही पहंचाना तो समय किस करवट बैठेगा यह भविष्य के गर्भ में है । हाँ अन्य जगहों पर भी हांथी की चाल को कम नही समझना चाहिय क्योकिे बसपा जहां लड़ी है वहाँ फिर लड़ी है ।

नगर निकाय चुनाव में भाजपा ने कमल जरूर खिलाया परन्तु जहाँ अधिकांश ग्रामीण आम जनता निवास करती है सत्ता धारी भाजपा का उन नगर पालिका व नगर पंचायत की आधी सीटो तक भी नही पहुँच पाना थाना तहसील ब्लाक की कार्य शैली और भ्र्ष्टाचार पर प्रश्नचिन्ह लगता है। इस लिये प्रदेश के प्रथम भगवा धारी ईमानदार सन्याशी मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ व प्रदेश अध्यछ महेन्द्र नाथ पांडेय को अपने विधायकों /सांसदों जिलाअध्यक्ष के साथ बैठकर इसकी समीक्षा जरूर करनी होगी। 
भाजपा के ब्राह्मण प्रदेश अध्यक्ष जिन्होंने अभी तक अपने ब्राह्मण समाज की तरफ भी मुड़ कर नही देखा होगा । उनको कम से कम एक बार तो इस दिशा दिशा में मंथन करना होगा क्योंकि बात बड़े दल की रूप आने की नही बात नगर पँचायत व नगर पालिका के आदि पद' की आधी सीटों तक भी न पहुँच पाने की है । 
एक सत्ता धारी पार्टी वह भी योगी आदित्य नाथ जैसे मुख्यमंत्री के होते हुये नगर पंचायत नगरपालिका परिषद की जहाँ आम जनता निवास करती है और अपना मतदान करती है वहां,आधी सीटों तक भी न पहुँच पाना विचारणीय है गम्भीर है ।

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