भाजपा के कर्मठ सिपाही श्यामू पांडेय ने अपने राजनैतिक गुरु पटेल रामकुमार वर्मा के बसपा में जाने के बाद भी नही छोड़ी थी भाजपा पार्टी


दीप शंकर मिश्र"दीप"विशेष संवाददाता
लखनऊ।। साधना पांडेय सहकारी चीनी मिल संघ की उपाध्यक्ष बनी तो भाजपा के कर्मठ और जुझारू कार्यकर्ता मनीष साहनी डायरेक्टर बने ज्ञात हो कि अभी कुछ दिन पूर्व विकास भवन में भाजपा कार्यकर्ताओं के आपसी बवाल के बाद से लखीमपुर में भाजपा पूर्ण रूप से दो गुटों में बंटी हुई देखी जा रही है हालांकि पार्टी के पाक साफ छवि के नायक कर्मठ जिलाध्यक्ष शरद बाजपेयी ने इस बात का खंडन किया औऱ कहा की हमारी पार्टी एक है सब आपस की बात है पार्टी में कोई गुट बाजी नही है। माननीय प्रदेश अध्यक्ष जी का निर्णय ही अंतिम निर्णय होगा। 

श्यामू पांडेय पूर्व जिलाध्यक्ष भाजपा को पूर्ण रूप से समर्पित बेलरायां के मूलतः निवासी है और उनके पिता व परिवार के भाई बन्धु सभी जनसंघ के समय से भाजपा और संघ को समर्पित रहे है। श्यामू जी के पूज्य पिता जय करन नाथ पांडेय निघासन ही नही लखीमपुर में जनसंघ की पहचान रहे स्व० रामचरन शाह के पुराने जनसंघी साथियोँ में से थे। इसी बीच लगभग वर्ष 77 के आस पास निघासन में तहसील प्रचारक के रुप में रामकुमार जी नाम के एक अच्छे स्वयं सेवक का उदय हुआ जो बाद मे अपने संघर्षी जीवन रूपी रथ पर सवार होकर पटेल राम कुमार वर्मा के नाम से सम्पूर्ण प्रदेश मे लोक निर्माण व सहकारिता जैसे विभागों के सफल मन्त्री साबित हुये पटेल रामकुमार वर्मा जो आज भी मन्त्री जी के नाम से पुकारे जाते है। उनको संघ व भाजपा के समर्पित सिपाही श्यामू जी पांडेय ने अपना राजनीतिक गुरु मान लिया और बिना किसी स्वार्थ के पटेल जी के साथ सुख दुख के साथी बन गये इस दौर में मंत्री जी का एक समय था जमाना था बहुत से लोग साथ थे मन्त्री पद जाने के बाद लोग साथ छोड़ते गये परन्तु श्याम जी पांडेय ने मन्त्री जी का साथ नही छोड़ा यह बात अलग है कि अपने उत्थान व विकास दौड़ में पटेल राम कुमार वर्मा जब रथ पर सवार हुये तो पीछे मुड़कर नही देखा यहां थोड़ी बिडम्बना यह जरूर रही की इस बीच मन्त्री जी ने लखीमपुर के विकास के लिये भी पीछे मुड़कर नही देखा समय की बात है आज प्रदेश में ईमानदार योगी जी तो केन्द्र में ईमानदार मोदी जी की सरकार है इस अवधि मे भी निघासन तहसील मुख्यालय ग्राम सभा है सच कडुवा होता है परन्तु यदि कोई विधायक सांसद वह चाहे सत्ता पक्ष का हो या विपक्ष का यदि उसके द्वारा अपने क्षेत्र का विकास नही हो पाया तो जय सियाराम हाँ पूर्व मंत्री आदरणीय पटेल जी द्वारा अपने मंत्रित्व के कार्यकाल में निघासन व लखीमपुर का एक महत्व पूर्ण काम निघासन क्षेत्र की लखीमपुर का बाई पास मार्ग बन्धा रोड़ चालू कर किया बस यह पुराना कार्य आज भी इस रोड पर चलने वाला व्यक्ति जरूर अपने विधायक व श्यामू पांडेय के राजनैतिक गुरु का एक बार जरूर नाम लेता होगा । 


अपने पति श्यामू पांडेय के साथ पार्टी व सामाजिक कार्यो में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेती साधना पांडेय

समय बदला तो आम जनता के लिये नही अपने स्वार्थ वश मन्त्री जी ने वर्ष 2007 के आस पास में बसपा का दामन थाम लिया जो पटेल राम कुमार वर्मा के जीवन की सबसे बडी राजनीतिक भूल थी यहाँ पर समय के परिवर्तन के साथ संघ और भाजपा के समर्पित सिपाही श्याम जी पांडेय ने अपने पुराने भाजपा के झण्डे को ही पकडे रक्खा जो आज तक मजबूती के साथ पकडे है और इसी मजबूती का परिणाम यह है की श्याम जी पांडेय की पत्नी साधना पांडेय का सहकारी चीनी मिल संघ के उपाध्यक्ष जैसे महत्व पूर्ण पद पर आसीन होना हाँ कुछ लोगो का यह भी मानना है की यदि विकास भवन में बवाल न होता तो संघ का उपाध्यक्ष कोई औऱ ही होता परन्तु भाजपा के इस कर्मठ सिपाही पूर्व मंत्री पटेल राम कुमार वर्मा के सच्चे साथी जो अब तक पार्टी के लिये खून पसीना बहाते रहे उनके साथ जो हुआ उसके बदले में पार्टी द्वारा दिया गया यह इनाम कुछ माने नही रखता माने रखता है , आपसी प्रेम भाव औऱ पार्टी के दोनों पक्षों को से गले लगवाना जिस पर पार्टी के जिला अध्यक्ष शरद बाजपेयी व जन पद के जन प्रिय सांसद जनप्रिय आठो विधायको को पार्टी व आम जनता के हित के लिये इस नेक कदम के लिये अपना कदम आगे आना चाहिये। जिसकी सम्भावना कहीँ नजर नही आ रही है । 

लखीमपुर शहर की है साधना पांडेय, उपाध्यक्ष सहकारी चीनी मिल संघ उत्तर प्रदेश

भाजपा के कर्मठ कार्य कर्ता पूर्व जिलाध्यक्ष श्यामजी पांडेय की पत्नी साधना पांडेय एम ए समाज शास्त्र के पिता स्व श्री कान्त शुक्ल लखीमपुर शहर के ही निवासी और जिलापंचायत कार्यालय में कार्य अधिकारी के पद पर कार्यरत थे साधना पांडेय ने भगवादीन आर्यकन्या इण्टर कालेज से समाज शास्त्र में एम ए तक शिक्षा प्राप्त की है रक्खी है

एक प्रश्न उपाध्यक्ष सहकारी चीनी मि संघ जनप्रिय सांसद जनप्रिय सभी आठों विधायक
जनपद लखीमपुर की सरजू सहकारी चीनी मिल के भ्र्ष्टाचार अनियमितता की एक कहानी यह है कि उक्त शुगर मिल में लगभग 20 वर्षों से कोई वार्षिक मीटिंग AGM ही नही हुई आखिर क्यों ?
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