मुंगेर-भागलपुर के डीआईजी विकास वैभव ने मकर संक्रांति पर्व की महत्ता पर डाला प्रकाश


सभी मित्रों व आमजनों को दी मकर संक्रांति की हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं
पटना(स्टेट हेड-मुकेश कुमार)।। सकारात्मक परिवर्तन के द्योतक इस पर्व में दक्षिणायण से उत्तरायण में सूर्य का प्रवेश प्राकृतिक परिवर्तन के संकेतों के साथ शरद ऋतु के समापन तथा निकटवर्ती वसंतऋतोपरांत चैत्र मास में भारतीय नव वर्ष (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा) के समीप होने का भी संकेत है। जिसे भारत के भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में भिन्न-भिन्न स्वरूपों में सामुहिक उत्सव के रूप में हर्षोल्लास के साथ मनाने की सशक्त प्राचीन परंपरा सदैव सुदृढ़ रही है । 
प्राचीन काल से ही इस दिवस का अत्यंत महत्व रहा है, जिसका उल्लेख अनेक शास्त्रों में भी स्पष्ट मिलता है । महाभारत में वर्णित है कि भीष्म पितामह ने अपने शरीर को त्यागने के लिये मकर संक्रान्ति के दिवस का ही चयन किया था तथा पुराणों के अनुसार इसी दिन गंगा भी भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होती हुई सागर में जाकर मिली थीं।चूंकि दक्षिणायण को देवताओं की रात्रि अर्थात् नकारात्मकता का प्रतीक तथा उत्तरायण को देवताओं का दिन अर्थात् सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है, अतः इस दिन जप, तप, दान, स्नान, श्राद्ध, तर्पण आदि धार्मिक क्रियाकलापों का विशेष महत्व माना जाता है। 
इस शुभ अवसर पर सर्वशक्तिमान से प्रार्थना है कि राष्ट्र सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में सतत् अग्रसर रहे तथा चहुँमुखी आर्थिक विकास के साथ सामाजिक सौहार्द में नित्य वृद्धि प्राप्त करते हुए संपूर्ण विश्व जगत को प्राचीन सांस्कृतिक मूल्यों से प्रेरित मार्गदर्शन प्रदत्त करता रहे ।
लेखक:मुंगेर व भागलपुर के डीआईजी,विकास वैभव है
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