भाजपा के थप्पड़बाज मुख्यमंत्री पर कार्यवाही कौन करेगा?


जिस राज्य का मुख्यमंत्री ही कानून और व्यवस्था के मुंह पर झापड़ मारे उस राज्य के अन्य सत्ताधारी जनप्रतिनिधियों का क्या ? 

अपना काम कर रहे सुरक्षा कर्मी को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने थप्पड़ जड़ दिया। कानून की नज़र से देखे तो मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पर सरकारी काम मे बाधा डालने का मामला बनता है। लेकिन क्या सत्ता के अहंकार में डूबे ऐसे नेताओं पर कोई कार्यवाही होगा ,शायद नही।

क्या है मामला

धार जिले के सरदारपुर में शिवराज सिंह चौहान के रोड शो के दौरान सुरक्षाकर्मी सिर्फ अपना काम कर रहा था। चौहान लोगों के बीच में थे और सुरक्षाकर्मी अपनी ड्यूटी का पालन करते हुए उनकी हिफाजत करने की कोशिश कर रहा था। लेकिन चौहान भड़क गए। उन्होंने सुरक्षाकर्मी को थप्पड़ भी मारा और धकेलते हुए दूसरी तरफ फेंक सा दिया। सुरक्षा कर्मी इस मामले में न्याय की बात करेगा ऐसा संभव नहीं। शिवराज प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं,अपने किए को सही साबित करने के लिए अदना से सुरक्षा कर्मी को निलंबित, तबादला और दोषी साबित कर बर्खास्त करने में कितना देर लगेगा। लेकिन अहम सवाल यह है कि क्या यही सुशासन की परिभाषा है?

समस्या एक मुख्यमंत्री के थप्पड़ मारने या केंद्रीय मंत्री के द्वारा चिकित्सक को गोली मारने की धमकी तक खत्म नही होता। आजकल सत्ताधारी नेताओं का सरकारी कर्मचारियों और गरीब जनता पर धौंस जमाना आम बात हो चला है।

लोकतंत्र संविधान से चलता है और संविधान के नजर में न कोई छोटा न कोई बड़ा होता है। यदि कुछ गलत हो रहा है तो उसके लिए संवैधानिक प्रक्रिया है। लोकतंत्र में जब जनप्रतिनिधियों द्वारा जनता को सत्ता का धौंस दिखाया जाएगा तो ऐसे में नेताओं और गुंडों में फर्क क्या रह जाएगा।

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