सूबे बिहार में मनरेगा योजना को लगा बड़ा झटका,बेवक्त अभियंताओं के तबादले से थम जायेगी, सात निश्चय की गति।

सूबे बिहार में मनरेगा योजना को लगा बड़ा झटका,बेवक्त अभियंताओं के तबादले से थम जायेगी, सात निश्चय की गति।

पटना(बिहार ब्यूरो)।।  सूबे बिहार में अधिकारियों के काम करने का अंदाज वाकई में निराला है।सरकार एक तरफ जहां सात निश्चय के तहत पंचायतों को ओडीएफ मुक्त करने के लिए सतत प्रयत्नशील है। सभी जिलों में जिला प्रशासन को काफी जद्दोजहद के बाद इस योजना को सफलीभूत करने की रफ्तार जब मिली तो ग्रामीण विकास विभाग ने मनरेगा के अभियंताओं के तबादले की झड़ी ही लगा डाली। फिलवक्त में ग्रामीण विकास विभाग ने पहले चरण में सूबे बिहार के कार्यपालक अभियंताओं का तबादला एक जिले से दूसरे जिले में कर दी,वही दूसरे चरण में सहायक अभियंताओं का भी पूरा कुनबा उस वक्त तबादले की भेंट चढ़ गया जब काफी मशक्कत के बाद शौचालय बनाने के लिए ग्रामीणों व आपूर्तिकर्ताओ को समझा-बुझाकर तैयार कर कार्य प्रारंभ कर दिया गया। महकमे के आलाधिकारी इस मसले से वाकिफ है कि उक्त कार्य के क्रियान्वयन के लिए कितनी निधि आवंटित हुई है...

सरकार पर भरोसा,कार्य पूरा करने का उद्देश्य।बस यही मानकर सभी जिलों में कार्य की गति पटरी पर चढ़ चुकी थी कि महकमे ने तबादले की झड़ी ही लगा डाली।उल्लेखनीय है कि मनरेगा के कनीय अभियंताओं का तबादला लगभग दस वर्षों से नही हुआ है। जबकि यह प्रावधान के तहत समय पर होनी चाहिए थी।वित्तिय वर्ष मार्च के उपरांत ऐसे महकमे में तबादले की प्रक्रिया होनी चाहिए, ताकि रफ्तार से चल रहे कार्य की गति थम नही जाये,जब पूरे सूबे में लंबे अंतराल के बाद जिला परिषद को विकास कार्य के लिए सरकार द्वारा निधि दी गयी है और इसका क्रियान्वयन मनरेगा के अभियंताओं द्वारा ही किया जाना है।गौरतलब है कि नक्सल प्रभावित जिलों में ग्रामीण विकास विभाग द्वारा किये गये अभियंताओं के तबादले से विकास की गति थमने के करीब है। क्योंकि नये अधिकारियों को यहां इतिहास, भूगोल समझने में ही 6 माह का वक्त यूं ही गुजर जायेगा।सीएम साहब के सात निश्चय पर महकमें की अदूरदर्शिता के कारण विकास की गति पर प्रश्रचिन्ह लगना लाजमी है।
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