बिजली अभियंताओं और कर्मचारियों की मेहनत आखिर रंग लाई।

बिजली अभियंताओं और कर्मचारियों की मेहनत आखिर रंग लाई।


वाराणसी।।बिजली अभियंताओं और कर्मचारियों की मेहनत आखिर रंग लाई। गुरुवार को सरकार ने 5 शहरों और 7 जनपदों की बिजली निजी हाथों में सौंपने का फैसला वापस ले लिया। सरकार ने किसी भी तरह का कोई निजीकरण न करने का बिजली विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को लिखित आश्वासन दिया है।

वाराणसी 05 अप्रैल 2018 विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के केन्द्रीय नेतृत्व के आहवान पर आज 18वें दिन भी बिजली कर्मचारियों व अभियन्ताओं का निजीकरण के विरोध में प्रदर्शन जारी रहा। निजीकरण के विरोध में संघर्ष समिति द्वारा चलाये जा रहे आन्दोलन के विरोध सभा में सैकड़ो बुनकर समुदाय के सदस्य उपस्थित हो कर बिजली कर्मचारियों द्वारा चलाये जा रहे आन्दोलन का समर्थन किया। उन्होंने जनता को आगाह किया कि निजीकरण से बिजली के दामो में बेतहासा वृद्धि होगी, रोजगार के अवसर खत्म होगे, कुटिर एवं लघु उद्योगो के सामने गम्भीर संकट उत्पन्न हो जायेंगे। 

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के केन्द्रीय कमेटी के पूर्व निर्धारित कार्यक्रमानुसार सम्भ्रान्त नागरिको के जागरूकता हेतु दिनांक 06.04.2018 (शुक्रवार) को अपरान्ह 02 बजे हार्इडिल कालोनी स्थित प्रबन्ध निदेशक कार्यालय परिसर से विद्युत कर्मियों का एक मोटरसार्इकिल जुलूस निकलने का सभा समाप्ति तक कार्यक्रम बना था।

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के वक्ताओं ने बताया कि शाम 5 बजे तक निजीकरण के मुद्दे पर लखनऊ में संघर्ष समिति के पदाधिकारियों की ऊर्जा मंत्री से वार्ता जारी है।

देर रात्रि मे इं0 सुनील कुमार यादव, क्षेत्रीय सचिव (वाराणसी क्षेत्र) उ0प्र0 राज्य विद्युत परिषद अभियन्ता संघ, ने बताया कि विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति लखनऊ की बैठक में प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा, पावर कारपोरेशन के चेयरमैन और प्रमुख सचिव, ऊर्जा आलोक कुमार, पावर कारपोरेशन की प्रबंध निदेशक अरुणा यू और विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे समेत प्रतिनिधिमंडल के मध्य गुरुवार को काफी देर तक निजीकरण के मुद्दे पर मंथन हुआ। दोनों पक्षों ने निजीकरण के फायदे और नुकसान पर अपनीअपनी राय व्यक्त की। बिजली संगठन के प्रतिनिधियों के आगे सरकार के सभी बिंदु बेकार साबित हुए और आखिरकार सरकार को निजीकरण के फैसले को विद्युत कर्मचारी संयुक्त सर्घश समिति के हित मे जाना पड़ा।
बिजली अभियंताओं और कर्मचारियों की मेहनत आखिर रंग लाई। उनकी एकजुटता के आगे सरकार को चिन्तन करना पड़ा। गुरुवार को सरकार ने 5 शहरों और 7 जनपदों की बिजली निजी हाथों में सौंपने का फैसला वापस ले लिया। सरकार ने किसी भी तरह का कोई निजीकरण न करने का बिजली विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को लिखित आश्वासन दिया है। सरकार के निर्णय बदलते ही बिजली विभाग के अभियंताओं और कर्मचारियों में खुशी का माहौल पैदा हो गया। अभियंताओं का कहना है कि अब वे पूरे मनोयोग से बिजली आपूर्ति व्यवस्था दुरुस्त करने और विभागीय राजस्व बढ़ाने में जुट जायेंगे।

ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने प्रतिनिधिमंडल को लिखित तौर पर आश्वासन दिया कि 5 शहरों और 7 जनपदों समेत प्रदेश के किसी भी जनपद का निजीकरण नहीं होगा। टेंडर प्रक्रिया को निरस्त किया जाता है। 

निजीकरण का फैसला वापस होने के बाद अभियंताओं का कहना है कि अब वह बिजली विभाग का राजस्व बढ़ाने पर पूरा ध्यान केंद्रित करेंगे। शहर की बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर खास ध्यान देंगे। इसके अलावा अभी तक जो भी काम रुका हुआ था उसे गति दी जाएगी। बकाएदारों पर वसूली की कार्रवाई तेजी से शुरू की जाएगी। इसके अलावा नए कनेक्शन लेने वालों को कनेक्शन दिए जाएंगे। समय पर बिलिंग का कार्य पूरा कराया जाएगा, जिससे सरकार को लाभ हो।

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के सदस्यों ने मा0 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा, पावर कारपोरेशन के चेयरमैन और प्रमुख सचिव ऊर्जा आलोक कुमार, पावर कारपोरेशन की प्रबंध निदेशक अरुणा यू के इस निर्णय पर जनहित में पुनर्विचार करने हेतु ह्रदय से आभार व्यक्त किया एवं धन्यबाद दिया।

टिप्पणी पोस्ट करें

MKRdezign

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget