बुनियादी सुविधा भी मयस्सर नही,देश के उर्जाधानी सिंगरौली को !

युवा कलेक्टर भी नहीं ला सके सिंगरौली वासियों के जिंदगी में सकारात्मक बदलाव


ब्दुल रशीद।। निति आयोग के रिपोर्ट के अनुसार देश के 110 अतिपिछडे जिले में शिवराज के सिंगापुर, सिंगरौली जिला तीसरे स्थान पर है।अर्थात देश के उर्जाधानी के नाम से ख्याति प्राप्त जिला सिंगरौली भुखमरी,कुपोषण और बीमारी से बेहाल है।बुनियादी सुविधाओं और पीने के साफ़ पानी कि कमी से त्राहिमाम है।

युवा कलेक्टर भी नहीं ला सके सिंगरौली वासियों के जिंदगी में सकारात्मक बदलाव 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था युवा आईएस अफ़सर पिछले जिलों में अच्छा परिणाम देते हैं.लेकिन सिंगरौली जिले के कमान संभालने वाले युवा आइएस ऐसा कर न सकें। सिंगरौली जिले का गठन 24 मई 2008 में हुआ था.नौ साल में नौ कलेक्टर ने जिले में अपनी सेवा दी.इनमे से सात ऐसे कलेक्टर थे जो सीधे आईएस चयनित युवा थे.विवेक पोरवाल,पी.नरहरी,मनोज खत्री,एम.साल्वेंद्रम,रघुराज राजेंद्रन,शशांक मिश्रा और अनुराग चौधरी। निति आयोग के रिपोर्ट के अनुसार ये सभी युवा कलेक्टर 11,78132 (2011 जनगणना के अनुसार) सिंगरौली वासियों के आभाव पूर्ण जिंदगी में कोई सकारात्मक बदलाव नहीं ला पाए।

ये रहे जनप्रतिनिधि

सिंगरौली जिला के गठन के बाद से भाजपा के रामलल्लू वैश्य विधायक रहें, सांसद के रूप में भाजपा के गोविन्द प्रसाद मिश्र (२००९) रीती पाठक (२०१४), महापौर के रूप में श्रीमती रेनू शाह,(बसपा)और अब श्रीमती प्रेमावती खैरवार(भाजपा)।

बुनियादी सुविधाओं से जूझ रहा है सिंगरौली।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि, घोषणाओं के इस वीर पुरुष ने सिंगरौली को जिला बनाने के बाद श्रेय लूटने के लिए पहले स्थापना दिवस कार्यक्रम में घोषणा की थी कि सिंगरौली को सिंगापुर बनाएंगे। उनकी घोषणा को पूरे हुए 10 साल हो गए लेकिन आदिवासी बहुल यह जिला आज भी बुनियादी सुविधाओं से जूझ रहा है। सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री ने सिंगरौली में एयरपोर्ट बनाने की भी घोषणा की थी, लेकिन उसे भी 5 साल से अधिक समय हो गया, वह भी पूरा नहीं हुआ।

देश के सर्वाधिक पिछड़े जिले

1. मेवात
2. आसिफाबाद
3. सिंगरौली
4. किफिरे
5. श्रावस्ती
6. बहराइच
7. सिद्धार्थ नगर
8. बलरामपुर
9. नामसाई
10. सुकमा

बुनियादी सुविधाओं का अभाव

ये जिले शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण जैसे मानव विकास के पैमाने पर तो पिछड़े हैं हीं, यहां बिजली, पानी और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है। नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने भी कहा कि देश के मानव विकास सूचकांक में व्यापक परिवर्तन लाने के लिए इन जिलों की स्थिति में सुधार लाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इन जिलों में विकास कार्याें की निगरानी सबसे अहम होगी।
कांत ने कहा कि वास्तविक समय के डेटा की उपलब्धता,सार्वजनिक डोमेन में बहुत नजदीकी से निगरानी और राज्यों की रैंकिंग से ही यह समस्या दूर होगी। कांत ने कहा, “उनका नाम जाहिर कर उन्हें शर्म दिलाना चाहिए..क्योंकि नेता और सरकारी अधिकारी को यह महसूस होना चाहिए कि उन्हें दंडित किया जाएगा। अगर आप स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण के क्षेत्र में अपना प्रदर्शन नहीं सुधारते हैं तो मतदाता आपको खारिज कर देंगे।”

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